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इंकम टैक्स छापे की हवाहवाई खबरों से मीडिया समूहों ने राज्य सरकार को बदनाम करने की साजिश तो नहीं की?

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बड़ा सवाल – जब ब्रीफिंग नहीं हुई तो सौ करोड़ कैश और विदेश में संपत्ति के दस्तावेज मिलने की खबरें मीडिया ने कैसे फैलाई?

सीजी न्यूज डॉट कॉम         

छत्तीसगढ़ में इंकम टैक्स विभाग की छापामार कार्रवाई को लेकर कांग्रेस और भाजपा  के बीच तकरार बढ़ गई है। कांग्रेस ने इस कार्रवाई पर असंवैधानिक तरीके से राज्य सरकार पर दबाव बनाने और सरकार को अस्थिर करने का आरोप लगाया है, वहीं भाजपा ने सवाल किया है कि इंकम टैक्स विभाग की छापामार कार्रवाई से कांग्रेस कांग्रेस और राज्य सरकार को किस बात का डर है? इस पूरे घटनाक्रम में कई सवाल उठ खड़े हुए हैं।

पहला सवाल. सबसे बड़ा सवाल ये है कि अभी तक किसी को भी यह पता नहीं है कि छापा किसने मारा? जिस टीम ने छापा मारा है, उसकी पहचान किसने की? जब छापा मारने वाली टीम ने चार दिनों में राज्य सरकार और इंकम टैक्स विभाग के किसी स्थानीय विभागीय अफसर को जानकारी नहीं दी, तो मीडिया को किसने बताया कि इंकम टैक्स के अफसरों ने ही छापा मारा है?

दूसरा सवाल. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और संसदीय कार्यमंत्री रविंद्र चौबे तीन दिनों से कह रहे हैं कि राज्य सरकार को अभी तक छापे की सूचना नहीं दी गई। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने 29 फरवरी को राज्यपाल को ज्ञापन दिया जिसमें तीन बार ‘कथित इंकम टैक्स विभाग’ और ‘कथित तौर पर छापामार कार्रवाई’ जैसे शब्दों का उल्लेख  है। कथित तौर पर यानी अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है कि छापा किसने मारा?

तीसरा सवाल. छापा मारने वाले अफसरों ने जब मीडिया ब्रीफिंग नहीं की तो मीडिया को यह खबर किसने बताई कि सौ करोड़ की संपत्ति मिली है। विदेशी मुद्रा और विदेश में संपत्ति के दस्तावेज मिलने की जानकारी किसने दी? अखबारों ने यह अफवाह क्यों फैलाई?

चौथा सवाल. सवाल ये भी उठ रहे हैं कि क्या मीडिया समूहों ने जानबूझकर फर्जी खबरें छापी ताकि राज्य सरकार को बदनाम किया जा सके। एक मीडिया समूह ने तो यहां तक लिखा है कि मुख्यमंत्री की डिप्टी सेक्रेटरी के सील किए गए आवास में बेहिसाब कैश और बेनामी संपत्ति होने के संकेत मिले हैं। अखबार के संपादक और पत्रकार इतने अंतर्यामी कैसे हो गए? जिस बंगले के भीतर कथित इंकम टैक्स के अफसर प्रवेश नहीं कर पाए, उसके भीतर कैश और संपत्ति की जानकारी मीडिया समूह को कैसे मिल गई? हवा-हवाई समाचार छापने से सवाल उठ रहे हैं कि इस कार्रवाई के जरिये क्या बड़े मीडिया समूहों ने प्रदेश सरकार को बदनाम करने की साजिश रची है?

पांचवा सवाल. आईटी विभाग छापे की डीटेल आखिर कब देगा?