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शहरी सत्ता की जंग शुरू – ये हैं दुर्ग के तीन हाई प्रोफाईल वार्ड, दो वार्डों में कांग्रेस की चाल तेज, एक में भाजपा के बागी आगे

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सीजी न्यूज डॉट कॉम। स्पेशल रिपोर्टर

दुर्ग नगर निगम के 60 वार्डों में चुनाव के लिए प्रचार अभियान अभी शुरुआती दौर में है। चुनाव जीतने कांग्रेस-भाजपा ने तगड़ी मोर्चेबंदी शुरू कर दी है। जनसंपर्क कार्यक्रम तय हो रहे हैं। प्रत्याशियों ने नागरिकों से मिलना शुरू कर दिया है। 9 दिसंबर को नाम वापसी का अंतिम दिन है। इसके बाद विधिवत जनसंपर्क अभियान शुरू होगा। दूसरी ओर, पार्टी के नेता बगावत पर उतारू प्रत्याशियों को चुनाव मैदान से हटने मान मनौव्वल कर रहे हैं। मतदाताओं को रिझाने और ज्यादा से ज्यादा वोट पाकर जीत दर्ज करने की प्लानिंग हो रही है। प्रत्याशियों के रणनीतिकार बागियों के कारण वोट बंटने के खतरे पर भी नजर रख रहे हैं। शुरुआती दौर होने के बावजूद कई वार्डों में प्रत्याशियों की छवि और उनकी सक्रियता के कारण चुनावी समीकरण साफ नजर आने लगा है।

शहर के तीन सबसे हाई प्रोफाईल वार्डों में ऐसा है चुनावी सीन

बोरसी पश्चिम वार्ड 49 

यहां करीब 33 सौ मतदाता हैं जिसमें लगभग 3 सौ मतदाता जोगी नगर बस्ती में रहते हैं जबकि 3 हजार मतदाता कॉलोनी एरिया में निवास करते हैं। पंचशील नगर, रजनीगंधा कालोनी, अमन अपार्टमेंट, विद्युत नगर जैसी कॉलोनियों में फैले यहां के शिक्षित निवासी वार्ड को आदर्श वार्ड बनाने और जरूरी सुविधाओं की मांग करते रहे, लेकिन अभी तक कोई भी पार्षद उनकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा।

वार्ड में राकेश शर्मा (कांग्रेस) और आशुतोष दुबे (भाजपा) के अलावा कांग्रेस के बागी उम्मीदवार भास्कर कुंडले चुनाव मैदान में  हैं। कांग्रेस ने वार्ड का सर्वे करने के बाद यहां के शिक्षित मतदाताओं की उम्मीदों के अनुरूप काफी सोच विचार के बाद उच्च शिक्षित और मिलनसार प्रत्याशी को चुनाव मैदान में उतारने का फैसला किया। राकेश शर्मा एम कॉम, एलएलबी की शिक्षा हासिल करने के बाद पीएचडी कर चुके हैं। उनकी दिलचस्पी सामाजिक कार्यों में ज्यादा रही।

छात्र जीवन में राकेश छात्रों की समस्याओं को सुलझाते रहे।  लोकप्रिय छवि के कारण उन्हें सुराना कॉलेज का छात्र संघ अध्यक्ष चुना गया। बाद में वे रविशंकर यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ पदाधिकारी भी निर्वाचित हुए। छात्र जीवन के बाद उन्होंने शहर की सबसे प्रमुख सामाजिक संस्था युवा शक्ति का गठन किया। इंदिरा मार्केट स्थित श्री सिद्धी विनायक मंदिर के निर्माण में संस्थापक सदस्य के रूप में उल्लेखनीय भागीदारी निभाने के साथ ही शहर के अन्य सामाजिक संगठनों से जुड़कर राकेश ने शहर के विकास और सामाजिक-सांस्कृतिक संपदा को पुष्ट करने का काम किया।

राकेश की कार्यशैली को करीब से देखने वाले लोगों का कहना है कि वे समस्याओं से भागते नहीं हैं। समस्या चाहे जैसी हो, हर हाल में सुलझाने की कला के माहिर खिला़ड़ी हैं। यही उनकी सबसे बड़ी खूबी है। स्वभाव से जितने मिलनसार हैं, उतने ही विनम्र भी। इसी कारण राकेश न सिर्फ अपने वार्ड बल्कि पूरे शहर में लोकप्रिय हैं। उन्हें महापौर पद के लिए कांग्रेस का सबसे सशक्त चेहरा माना जा रहा है। राकेश को यहां से कांग्रेस प्रत्याशी बनाने के कारण यह वार्ड शहर का सबसे हाई प्रोफाईल वार्ड बन गया है।

राकेश के सामने भाजपा प्रत्याशी आशुतोष दुबे की न तो वार्ड में कोई खास पहचान है, न शहर में। हालत ये है कि भाजपा संगठन के ज्यादातर लोगों ने आशुतोष के बारे में सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी। कांग्रेस से बगावत करने वाले प्रत्याशी भास्कर कुंडले 5 साल तक पार्षद रहे, लेकिन वार्ड की जनता की उम्मीदों को पूरा करने में नाकाम रहे। सफाई जैसी बुनियादी समस्या का समाधान भी नहीं कर पाए। वार्ड में खुबसूरत गार्डन विकसित करने की मांग लगातार होती रही लेकिन भास्कर कुंडले इस मांग को अनसुना करते रहे। स्थानीय नागरिक अब राकेश से वार्ड में खूबसूरत गार्डन बनाने के साथ ही आदर्श वार्ड के रूप में विकसित करने की मांग कर रहे हैं।

कातुलबोड वार्ड 60

महापौर चंद्रिका चंद्राकर इसी वार्ड में रहती हैं। उनके पति रत्नेश चंद्राकर को भाजपा प्रत्याशी बनाया गया हैं। पांच साल पहले तक पूर्व महापौर सरोज पांडेय की सबसे करीबी रही नगर निगम की एमआईसी मेंबर जयश्री जोशी अब इस वार्ड से कांग्रेस उम्मीदवार हैं। यही वजह है कि यह वार्ड चुनावी लिहाज से हाई प्रोफाइल वार्ड बन चुका है। जयश्री जोशी इस वार्ड की पार्षद रह चुकी हैं। नगर निगम में लोक कर्म प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल चुकी हैं। उनकी तेजतर्रार छवि और निगम अफसरों से विकास कार्य कराने के तौर तरीके को पूरे शहर के लोगों ने देखा और सराहा है। जयश्री जोशी को नगर निगम के काम टालने वाले अफसरों से काम कराना आता है।

दूसरी ओर,  महापौर के पति रत्नेश चंद्राकर वार्ड में अपनी खास छवि नहीं बना पाए हैं। महापौर जैसे महत्वपूर्ण पद पर रहने के बावजूद वार्ड में लोगों की उम्मीदों के अनुरूप विकास कार्य कराने में चंद्रिका चंद्राकर विफल रही। इसका खामियाजा भी रत्नेश को भुगतना पड़ रहा है।

कातुलबोड वार्ड 59

भाजपा की डॉ. चंद्रकला खिचरिया का मुकाबला कांग्रेस के निखिल खिचरिया से है। लेकिन यहां सबसे मजबूत स्थिति नगर निगम के एमआईसी मेंबर रहे शिवेंद्र परिहार की है। पिछले चुनाव में भाजपा से प्रत्याशी बनाए गए शिवेंद्र ने टिकट न मिलने पर बगावत करते हुए नामांकन भर दिया है। स्थिति ये है कि तीनों प्रत्याशियों में शिवेंद्र सबसे मजबूत प्रत्याशी है। शिवेंद्र ने 5 साल तक वार्ड में लगातार सक्रिय रह कर विकास कार्य कराए हैं। अगर शिवेंद्र ने कल नामांकन वापस नहीं लिया तो तीनों प्रत्याशियों में सबसे मजबूत शिवेंद्र ही रहेंगे, यह तय है। भाजपा प्रत्याशी डॉ खिचरिया त्रिपुरा के राज्यपाल रमेश बैस की रिश्तेदार हैं। पहले भी वार्ड से पार्षद रह चुकी हैं। वे एमआईसी मेंबर भी रही। शांत सौम्य डॉ. खिचरिया का कार्यकाल उल्लेखनीय नहीं माना गया। उनके देवर निखिल खिचरिया को कांग्रेस प्रत्याशी बनाया गया है। अभी तक निखिल वार्ड चुनाव में रंग नहीं जमा पाए हैं।