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19 वार्डों में त्रिकोणीय मुकाबला, तीसरी ताकत के गणित में उलझे कांग्रेस-भाजपा के कई ताकतवर प्रत्याशी

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सीजी न्यूज डॉट कॉम

नगरीय निकाय चुनाव के लिए कल शनिवार को सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक मतदान होगा। दुर्ग नगर निगम के 60 वार्डों में प्रत्याशियों ने जमकर चुनाव प्रचार किया। नामांकन वापसी के बाद प्रत्याशियों के बीच रैली, झंडे, पोस्टर, फ्लैक्स, और जनसंपर्क अभियान की जंग लगातार तेज होती रही। कई वार्डों में आरोप-प्रत्यारोप के दौर भी चले। गुरूवार की रात 12 बजे चुनाव प्रचार थम गया। लेकिन शाम से ही चुनाव प्रबंधन का निर्णायक दौर शुरू हो गया। मतदाताओं का वोट पाने के लिए गिफ्ट, लिफाफे, कंबल, साड़ी, बिछिया बांटने का खेल अब पूरे शबाब पर है।

चुनावी सीन देखें तो पता चलेगा कि शहर के 19 वार्डों में कांग्रेस और भाजपा उम्मीदवारों को बागी उम्मीदवारों ने चुनौती दे रखी है। नामांकन भरने के बाद से शुरू हुआ चुनौती का खेल अब जनता की उम्मीदों पर परखी जाने वाली कसौटी और चुनाव प्रबंधन तक पहुंच चुका है। कई वार्डों में स्थिति ये है कि बागी उम्मीदवार दोनों प्रमुख दलों के घोषित प्रत्याशियों से चुनाव प्रचार में काफी आगे निकल गए हैं। कुछ वार्डों में शुरुआती चुनौती देने के बाद कांग्रेस और भाजपा के प्रत्याशियों ने अपनी स्थिति में जबर्दस्त सुधार कर लिया है।चुनाव से एक दिन पहले स्थिति ये है कि 19 वार्डों में त्रिकोणीय मुकाबला है। कई वार्डों में बगावत भारी पड़ रही है।

1 – मठपारा (उत्तर) वार्ड 4 में नगर निगम के पूर्व सभापति व एमआईसी सदस्य रहे दिनेश देवांगन की पत्नी लीना देवांगन (भाजपा) का मुकाबला सोनिया सिन्हा (कांग्रेस) से है लेकिन निर्दलीय प्रत्याशी ममता देवांगन के चुनाव मैदान में उतरने से लीना देवांगन की मुश्किलें बढ़ी हैं। फायदा सोनिया सिन्हा को मिलता दिख रहा है।

2 – किल्ला मंदिर वार्ड 7 में शुरुआती दौर में मनदीप भाटिया (कांग्रेस) को निर्दलीय प्रत्याशी कांग्रेस की बागी विभा नायक से नुकसान होता दिख रहा था। यहां दीपेंद्र देशमुख (भाजपा) चुनाव मैदान में हैं। मनदीप भाटिया के पक्ष में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने जिस तरह से चुनाव प्रचार किया उससे स्थिति बेहतर हुई है। मनदीप के पिता पूर्व पार्षद फत्ते सिंह भाटिया के कारण भी कांग्रेस बेहतर स्थिति में है।

3 – तकियापारा वार्ड 8 में अब्दुल गनी (कांग्रेस) और सुरेंद्र बजाज (भाजपा) के बीच निर्दलीय अहमद हसन और विलसन डिसूजा की चुनौती दिख रही थी। लेकिन मतदान से एक हफ्ते पहले से गनी की स्थिति काफी मजबूत हो गई। दो बार पार्षद रहे अब्दुल गनी महापौर पद के प्रबल दावेदार हैं। उन्हें सभी वर्गों का जबर्दस्त समर्थन मिल रहा है।

4 – स्वामी विवेकानंद नगर वार्ड 9 में रितेश सोनी (भाजपा) और बिजेंद्र भारद्वाज (कांग्रेस) की लड़ाई को भाजपा से बगावत करने वाले पार्षद ज्ञानेश्वर ताम्रकार ने धारदार बना दिया है। ज्ञानेश्वर ताम्रकार को भाजपा के सभी स्थानीय नेताओं का जबर्दस्त समर्थन मिल रहा है। यहां भाजपा नेता भीतरघात नहीं बल्कि खुलाघात कर रहे हैं। अन्य प्रत्याशियों पर ज्ञानेश्वर ताम्रकार भारी पड़ रहे हैं।     

5 – शहीद भगत सिंह (उत्तर ) वार्ड 20 में शंकर दमाहे (भाजपा) और अमित देवांगन (कांग्रेस) को कांग्रेस के बी अनिल राव से चुनौती मिल रही है। अनिल राव अपने वोट जितने बढ़ाएंगे, शंकर दमाहे को उतना ही फायदा होगा। हालांकि वार्ड के कई नागरिक कह रहे हैं कि अनिल राव बाजी पलटने में सक्षम हैं।

6 – तितुरडीह वार्ड 21 में संजय सिंह (भाजपा) और ज्ञानेंद्र देवांगन (कांग्रेस) के बीच चुनावी टक्कर जैसा कोई सीन नहीं है बल्कि यहां पिछले चुनाव में भाजपा से पार्षद चुने गए अरूण सिंह दमदार बताए जा रहे हैं। टिकट न मिलने पर भाजपा से बगावत कर दोबारा चुनाव मैदान में उतरे अरूण की स्थिति दोनों प्रत्याशियों से बेहतर बताई जा रही है।

7 – दीपक नगर वार्ड 23 में तिकोना मुकाबला किसी के लिए भी आसान नहीं है। यहां प्रियंका विजय जलकारे (भाजपा), सुखवंत कौर रंधावा (कांग्रेस) को भाजपा की बागी पूर्व एमआईसी मेंबर मीना सिंह से कड़ी चुनौती मिल रही है। सुखवंत के पक्ष में यहां मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू, पूर्व मंत्री बीडी कुरैशी, पूर्व विधायक प्रतिमा चंद्राकर प्रचार कर चुके हैं। यहां तीनों प्रत्याशियों के बीच कड़ी टक्कर है।

8 – आमदी मंदिर वार्ड 24 में नरेश तेजवानी (भाजपा) और किशन आहूजा (कांग्रेस) का चुनावी समीकरण निर्दलीय दीपक जैन ने बिगाड़ रखा है। नरेश तेजवानी यहां के ताकतवर उम्मीदवार हैं। किशन आहूजा ने अंतिम 7 दिनों में अपनी स्थिति में काफी सुधार किया है, लेकिन वार्ड के आधे हिस्से के मतदाताओं का समर्थन दीपक को मिल रहा है।

9– आपा पुरा वार्ड 31 में प्रशांत जोशी (भाजपा) और मदन जैन (कांग्रेस) को पूर्व पार्षद अमृत जैन लोढ़ा की उम्मीदवारी ने उलझा दिया है। चुनावी मैदान में मदन जैन को सबसे अनुभवी राजनेता माना जाता है। चुनावी समीकरण को पलटाने के माहिर खिलाड़ी मदन जैन की चमक इस बार वार्ड के व्यवहार कुशल पूर्व पार्षद अमृत जैन की प्रभावशाली छवि और इलेक्शन मैनेजमेंट के आगे फीकी पड़ गई है।

10 – गंजपारा वार्ड 36 में कमल टावरी (भाजपा) और ऋषभ जैन (कांग्रेस) को कांग्रेस के बागी विवेक मिश्रा से चुनौती मिल रही है। ऋषभ जैन ने पिछला चुनाव भारी अंतर से जीता था। इस बार भी उनका चुनाव प्रबंधन जबर्दस्त है। इसके बावजूद विवेक मिश्रा दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के लिए सिरदर्द बन चुके हैं। हालांकि विवेक अंतिम दौर के चुनाव प्रबंधन में कमजोर पड़ गए हैं।

11 – आजाद वार्ड 37 में श्रध्दा सोनी (कांग्रेस) और शितिजा शिव नायक (भाजपा) के बीच मुकाबले को निर्दलीय रागिनी सोनी के कारण काफी कड़ा मुकाबला हो गया है। श्रध्दा सोनी के पक्ष में कांग्रेस नेताओं ने काफी बेहतर माहौल बनाया है। वार्ड की पार्षद रह चुकी रागिनी सोनी का चुनावी गणित कुछ अलग किस्म का है। रागिनी के पति लंगूर सोनी से मतदाताओं के संबंध राजनीतिक समीकरण पर भारी पड़ते हैं।

12 – मिलपारा वार्ड 38 में ममता कुशल जैन (भाजपा) और सरस्वती सिन्हा (कांग्रेस) के बीच भाजपा की बागी नीता जैन ने यहां की राजनीति को उलझा रखा है। एक समीकरण ये कहता है कि नीता जैन के कारण न सिर्फ भाजपा के वोट बंट रहे हैं बल्कि जैन समाज के वोटों का बंटवारा भी हो रहा है। इसका सीधा लाभ सरस्वती सिन्हा को मिल सकता है। दूसरा समीकरण नीता जैन को प्रभावी बता रहा है।

13 – कसारीडीह ( पश्चिम ) वार्ड 42 में मनी बाई गीते (कांग्रेस) और सरिता साहू (भाजपा) को निर्दलीय पुष्पा उमरे कड़ी चुनौती दे रही हैं। पुष्पा उमरे भाजपा से एल्डरमैन रहे प्रतीक उमरे की माता हैं। भाजपा के वोट बंटने के कारण लाभ मनी बाई गीते को मिलता दिख रहा है। मनी बाई गीते के पुत्र प्रकाश गीते पिछले चुनाव में पार्षद चुने गए थे। प्रकाश के चाचा भी वार्ड पार्षद चुनाव जीत चुके हैं।

14 – बाबा गुरू घासीदास वार्ड 44 में संतोष कोसरे (भाजपा) और लक्ष्मण चंदानिया (कांग्रेस) के बीच प्रकाश जोशी ( जनता कांग्रेस ) ने तिकोने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। तीन साल पहले प्रकाश जोशी वार्ड पार्षद के उपचुनाव में एकतरफा जीते थे। इस बार भी उनके सामने  दोनों प्रत्याशी कमजोर आंके जा रहे हैं।

15 –  पद्मनाभपुर (पश्चिम) वार्ड 45 में हेमा शर्मा (भाजपा) और शकुन पाल (कांग्रेस) के बीच निर्दलीय रेखा तिवारी ने तिकोना मुकाबला बना दिया है। रेखा तिवारी पूर्व में भाजपा से पार्षद चुनी गई थी। बाद में उन्होंने जनता कांग्रेस पार्टी ज्वाइन की। हाल ही में वे कांग्रेस में शामिल हुई। अब वे फिर से बागी होकर चुनाव मैदान में उतरी हैं। तिकोने मुकाबले में कड़ी टक्कर है।

16 – सिविल लाइन ( उत्तर ) वार्ड 47 में नेहा अर्जुन कुुमार (भाजपा) को उजली सेनापति (कांग्रेस) को भाजपा की बागी उम्मीदवार एमआईसी मेंबर रही कविता तांडी से कड़ी चुनौती मिल रही है। कविता के पति डॉ देवनारायण तांडी भी वार्ड से पार्षद चुने जाने के बाद निगम के सभापति रह चुके हैं। पिछले 10 साल से वार्ड में सक्रियता के कारण तांडी बेहतर स्थिति में हैं।

17 – बोरसी ( पश्चिम ) वार्ड 49 में राकेश शर्मा (कांग्रेस) और आशुतोष दुबे (भाजपा) के बीच तीसरी ताकत के रूप में उभरे भास्कर कुंडले ने शुरुआत में कड़ी चुनौती पेश की, लेकिन वक्त बीतने के साथ ही राकेश शर्मा की स्थिति काफी मजबूत होती गई। महापौर पद के दावेदार राकेश की स्थिति काफी बेहतर बताई जा रही है। आशुतोष दुबे को भाजपा कार्यकर्ताओं का समर्थन नहीं मिल रहा है।

18 – पोटियाकला (उत्तर) वार्ड 53 में भोजराज यादव (कांग्रेस) और अजय वर्मा (भाजपा) को भाजपा की बागी उम्मीदवार सविता साहू के कारण चुनाव में कड़े मुकाबले की स्थिति है। पिछले चुनाव में सविता साहू वार्ड की पार्षद चुनी गई थी। सक्रियता के बावजूद टिकट न मिलने पर सविता ने बगावत कर चुनाव लड़ा। भाजपा के वोट सीधे-सीधे दो भागों में बंटने से कांग्रेस को इसका फायदा मिल सकता है।

19 – कातुलबोड ( उत्तर ) वार्ड 59 में चंद्रकला खिचरिया (भाजपा) और निखिल खिचरिया (कांग्रेस) को भाजपा के बागी शिवेंद्र परिहार से कड़ी टक्कर मिल रही है। निखिल शुरुआती दौर में काफी कमजोर थे लेकिन अंतिम 7 दिनों में उनकी स्थिति काफी हद तक सुधर गई है। चुनाव की शुरुआत में ही शिवेंद्र की स्थिति काफी बेहतर थी। इसे बनाए रखने में वे कामयाब रहे।