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चुनाव में 10 के नोट की सीरिज वाली गड्डी का अजीबोगरीब फंडा, गड्‌डी लेकर घूम रहे प्रत्याशी और उनके सगे संबंधी, एक वोट की कीमत एक हजार से तीन हजार तक, कंबल, साड़ी, शराब भी बांट रहे मतदाताओं को

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सीजी न्यूज डॉट कॉम 

गुरुवार की रात 12 बजे चुनाव प्रचार थम गया। लेकिन शाम से ही चुनाव प्रबंधन का निर्णायक दौर शुरू हो गया। यह खेल आज शुक्रवार को भी दिन भर चला। मतदाताओं का वोट पाने के लिए गिफ्ट, लिफाफे, कंबल, साड़ी, बिछिया, दारू बांटने का खेल पूरे उफान पर चलता रहा। रात के अंधेरे में चुपके-चुपके माल सप्लाई होता रहा। कल शाम से शुरू हुए इस खेल में आज दिन भर दोबारा नए सिरे से छानबीन की गई कि कहीं कोई छूटा तो नहीं। कोई कमी तो नहीं रह गई। मतदाताओं को भुगतान के लिए शहर के चार वार्डों में 10 के नए नोटों की सीरिज वाली गड्‌डी का अजीबोगरीब फंडा चला। एक प्रत्याशी तो बाकायदा गंगाजल के लोटे पर मतदाताओं का हाथ रखवाकर शपथ ले रहा है कि नोट लेने के बाद दगाबाजी नहीं करेगा।

सबसे पहले 10 के नोट की बात करें। पिछले चुनाव में एक वार्ड में 10 के नोट का खेल काफी सफल रहा। प्रत्याशी के कई रिश्तेदार मतदाताओं को 1 हजार रुपए का भुगतान करने के साथ ही उसे 10 रुपए का नोट भी थमाया। मतदान करने के बाद 10 का वही नंबर वाला नोट लाने पर फिर से एक हजार रुपए का भुगतान किया गया। इसके लिए बाकायदा 10 के नए नोटों की सीरिज वाली गड्डी का प्रयोग किया गया। चुनाव में भारी मतों से जीतने के बाद इस बार भी चुनाव में उस प्रत्याशी ने इसी फंडे से भुगतान किया। खास बात ये है कि बगल वाले वार्ड में इस बार दो-दो प्रत्याशियों ने इस फंडे को अपनाया है। इसी तरीके से मतदाताओं को भुगतान की व्यवस्था की जा रही है।

एक प्रत्याशी के खासमखास समर्थक ने नाम और वार्ड की शिनाख्त न होने देने की शर्त पर बताया कि वार्ड में दोनों प्रमुख प्रत्याशियों ने 10-10 के नोटों की नई सीरिज की गड्‌डी की व्यवस्था की है। गड़्डी  से एक नोट निकालकर हर मतदाता को दिया जा रहा है। साथ में एक से दो हजार रुपए तक भुगतान भी किया जा रहा है। मतदान के बाद इसी नंबर का नोट दोबारा लाने पर उसे इतनी ही राशि फिर दी जाएगी। ये खेल जबर्दस्त तरीके से हिट हो गया है।

मतदाता दगाबाजी कर ले तो भी प्रत्याशी को पता नहीं चलेगा। कई मतदाता दोनों प्रत्याशियों से वोट की कीमत लेने के साथ 10 का नोट ले रहे हैं। वोट देने के बाद दोबारा वसूल करेंगे। वोट किसे देंगे, पता नहीं। इस समस्या से निबटने के लिए कई प्रत्याशी बाकायदा कसम खिला रहे हैं। एक प्रत्याशी ने तो गंगाजल से भरे बर्तन लोटे पर हाथ रखवाकर शपथ दिला रहे हैं कि नोट के बदले वोट उन्हें ही मिलेगा। दगाबाजी नहीं की जाएगी।

कई वार्डों में मतदाताओं को लुभाने के लिए बाकायदा अलग-अलग लिस्ट तैयार की गई है। लिस्ट के अनुसार गिफ्ट बांटे जा रहे हैं। कहीं साड़ी, कंबल, बिछिया, चांदी के आईटम का गिफ्ट तो कहीं पांच सौ, एक हजार रुपए के नोट बंट रहे हैं। पुरुष मतदाताओं के लिए एक स्पेशल लिस्ट अलग से तैयार की गई है जिसमें ब्रांड के नाम हैं। कई मतदाता गोवा की चेपटी और चिकन चखना की सौगात से खुश हैं तो कई मतदाताओं को हाई ब्रांड की शराब चाहिए। सबकी पसंद अलग-अलग … सबके लिए अलग-अलग ब्रांड की व्यवस्था है।

… तो बड़ा कसूरवार कौन,,, नेता या मतदाता

जिस अंदाज में चुनाव जीतने के लिए पैसे, दारू और गिफ्ट दिए जा रहे हैं, उससे यह समझ पाना मुश्किल है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की हत्या करने में ज्यादा कसूरवार कौन है ? चुनाव में एक एक वोट से हार जीत का फैसला होता है। यहां हाल ये है कि सैकड़ों मतदाताओं से प्रलोभन और पैसों के दम पर वोट हासिल किए जा रहे हैं। मतदाताओं का हाल ये है कि वो किसी भी प्रत्याशी का गिफ्ट वापस नहीं लौटा रहे। आने दो,,, आने दो,,, की तर्ज पर हर प्रत्याशी से वोट की कीमत वसूल की जा रही है। मतदाताओं का यही वर्ग नेताओं को भ्रष्टाचार के लिए सबसे ज्यादा कोसता है। एक एक वोट के लिए पैसे खर्च करने के बाद चुनाव जीतकर अगर नेता जी खर्च हुई रकम की भरपाई करने भ्रष्टाचार करते हैं तो बड़ा कुसूरवार कौन होगा ??? नेता जी या मतदाता ???