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हाथियों से जनहानि रोकने 6 राज्यों के विशेषज्ञों ने मंथन किया

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सीजी न्यूज रिपोर्टर

प्रोजेक्ट एलीफेन्ट मानिटरिंग कमेटी द्वारा आयोजित तीसरी क्षेत्रीय कार्यशाला में हाथी और मानव के बीच बढ़ते द्वन्द्व को रोकने और हाथियों के संरक्षण के लिए विशेषज्ञों ने मंथन किया। अटल नगर स्थित अरण्य भवन में कार्यशाला के समापन अवसर पर प्रदेश के वनमंत्री मोहम्मद अकबर ने कहा कि हाथियों के संरक्षण और नजर रखने ठोस प्लान बनाकर क्रियान्वयन किया जाना चाहिए। हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने बार-बार प्रयोग की बजाय व्यवस्थित कार्ययोजना बनाने की जरूरत  है। कार्यशाला में 6 राज्यों के फारेस्ट अफसर और वन्य प्राणी विशेषज्ञ मौजूद थे।

अकबर ने कहा कि प्रदेश सरकार हाथी सहित सभी वन्य प्राणियों के संरक्षण के लिए प्रतिबध्द है। हाथी-मानव द्वन्द्व को न्यूनतम करने और हाथियो के संरक्षण के लिए राज्य स्तर पर वित्तीय संसाधनों की कमी नहीं होने दी आएगी। छत्तीसगढ़ सरकार ने पूर्व में एलीफेन्ट रिजर्व के लिए बादलखोल, तमोरपिंगला, सेमरसोत और लेमरू अभ्यारण्य को चिन्हित किया था, जिसमें बादलखोल और तमोरपिंगला, सेमरसोत अभ्यारण्य को नोटिफाइड किया गया है। अब लेमरू अभ्यारण्य को भी एलीफेन्ट रिजर्व के लिए नोटिफाइड करने मंत्रिमंडल की बैठक में प्रस्ताव लाया जाएगा।

केंद्र सरकार के वन विभाग के अपर महानिदेशक एमएम नेगी ने कहा कि यह पहला अवसर है जब छत्तीसगढ़ सरकार के सहयोग से कमेटी को फील्ड विजिट कराया गया। कार्यशाला में अन्तर्राज्यीय समन्वय और एकीकृत रणनीति, सूचनाओं के आदान-प्रदान पर एक सिस्टम बनाने पर सहमति जताई गई। कार्यशाला मे विशेषज्ञों के मंथन से निकले सुझावों को भारत सरकार को अवगत कराया जाएगा। प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री राकेश चतुर्वेदी ने कहा कि राज्य सरकार ने हाथियों से होने वाली जनहानि के प्रकरण में क्षतिपूर्ति राशि 4 लाख रूपए से बढ़ाकर 6 लाख रूपए कर दी है। कार्यशाला में प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य प्राणी अतुल शुक्ला, विशेषज्ञ आरएन श्रीवास्तव, डॉ मलिक ने भी विचार व्यक्त किए। कार्यशाला में 6 राज्यों के वन अधिकारी और वन्य प्राणी विशेषज्ञ उपस्थित थे।