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बारिश के मौसम में सर्पदंश का खतरा ज्यादा, ऐसे बचें, फिर भी डस ले तो ये सावधानियां बरतें

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सीजी न्यूज रिपोर्टर

बारिश के मौसम में सर्पदंश का डर बना रहता है। बचाव के लिए कई जरूरी सावधिनयां बरतना जरूरी है। अक्सर लोग जागरूकता के अभाव में सर्पदंश के शिकार होते हैं। धमतरी के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ.डीके तुर्रे ने लोगों से सावधानी बरतने और जागरूक रहने की अपील करते हुए कहा है कि लोगों को जागरूक करने मितानिन और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया गया है ताकि मरीज को सही समय पर इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया जा सके। उन्हें हिदायत दी गई है कि किसी विषैले जीव के काटने पर मरीज को फौरन अस्पताल पहुंचाएं। डॉ.तुर्रे ने जनहित में ये जानकारी दी है।

सर्प दंश से बचने ये सावधानी बरतें

  • सर्पदंश से बचने गड्ढे, पेड़ की खोह में हाथ नही डालें।
  • बरसात में नंगे पैर न घूमें।
  • जूते को झाड़कर पहनें।
  • सांप को पकड़ने या छेड़ने की कोशिश न करें।
  • घरों में गोबर के कंडे के ढेर, पैरा, लकड़ी के गट्ठे का इस्तेमाल करते समय सावधानी बरतें।

अगर सांप डस ले तो ये करें

  • बैगा-गुनिया से झाड़-फूंक के चक्कर में ना पड़ें। पीड़ित रोगी को सीधे अस्पताल पहुंचाएं।
  • रक्त का बहाव और विष का फैलाव धीमा करने रोगी को दिलासा दें।
  • शरीर के जिस अंग को सर्प ने डसा है, उसे स्थिर रखकर पट्टी का उपयोग करें।
  • पीड़ित व्यक्ति को लेटे हुए स्थिति में रखकर जल्द अस्पताल ले जाएं।
  • सर्प दंश वाले अंग पर अंगूठी, कंगन, जूते या अन्य दबाव बनाने वाली वस्तुओं को निकालें।
  • तत्काल 108 संजीवनी एक्सप्रेस को काॅल कर या नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र में इलाज के लिए ले जाएं।
  • किसी भी बंधन या दबाव बनाने वाली पट्टी न लगाएं।
  • सर्पदंश वाले स्थान को ज्यादा कसकर न बांधें।
  • जहर निकालने के लिए चीरा लगाने या चूसकर जहर निकालने से बचें।
  • रोगी को मादक पेय या एस्पिरिन न दें।
  • पीड़ित व्यक्ति को चलने नहीं दें।
  • सर्पदंश वाले स्थान पर बर्फ लगाकर ठंडा न करें।

ये हैं लक्षण

जिस जगह पर सांप ने डसा है वहां दांतों के निशान काफी हल्के होते हैं। दंश वाले स्थान पर तीव्र जलन, दर्द, खुजलाहट, पलकों का गिरना, मिचली आना, किसी वस्तु का दो दिखाई देना, अंतिम अवस्था में चेतनाहीनता, मांसपेशियों में ऐंठन और हाथ-पैरों में झनझनाहट, चक्कर आना और दम घुटना है।