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सीएम ने वित्त आयोग से जीएसटी क्षतिपूर्ति बढ़ाने की मांग की, नक्सल प्रभावित राज्य का हवाला देकर विशेष अनुदान की मांग भी दोहराई, केन्द्रीय करों में राज्य का हिस्सा 50 प्रतिशत करने का आग्रह किया

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सीजी न्यूज रिपोर्टर

15वें वित्त आयोग के अध्यक्ष एनके सिंह और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मौजूदगी में आज मंत्रालय में में छत्तीसगढ़ शासन के मंत्रीपरिषद के सदस्यों, वित्त आयोग के सदस्यों और राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक हुई जिसमें सीएम ने जीएसटी क्षतिपूर्ति को बढ़ाने की मांग की। सीएम ने कहा कि जीएसटी क्षतिपूर्ति 2022 में बंद हो जाएगी। उन्होंने 2002 के बाद भी 5 साल और क्षतिपूर्ति देने का आग्रह किया।

सीएम ने कहा कि छत्तीसगढ़ में विकास की व्यापक संभावनाओं के साथ विशिष्ट चुनौतियां भी है। संभावनाओं का दोहन और चुनौतियों का सामना करते हुए राज्य को विकास का लंबा सफर तय करना है। उन्होंने राज्य के विकास के लिए महत्वपूर्ण निर्णयों, कार्यक्रमों और कार्यों की जानकारी दी। आयोग कोे छत्तीसगढ़ के विकास और नागरिकों के हित में काम करने कई प्रस्ताव देते हुए आयोग से सहयोग का आग्रह किया। राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और कुपोषण के लिए वित्त आयोग से विशेष रूप से सहयोग देने का अनुरोध किया।
बैठक में राज्य के मानव विकास सूचकांक, पर्यावरण, वामपंथी उग्रवाद, क्षेत्रीय असंतुलन, वन क्षेत्रों में विकास और चुनौतियों, समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई। आयोग के अध्यक्ष एनके सिंह ने छत्तीसगढ़ की परिस्थितियों के साथ यहां की नक्सल और वन क्षेत्रों की विशिष्ट समस्याओं को देखते हुए मुख्यमंत्री के सुझावों सहित विचार-विमर्श के दौरान मिले प्रस्तावों पर सहानभूति से विचार करने की बात कही।
सीएम ने कहा कि समर्थन मूल्य पर धान खरीदी और बोनस वितरण से राज्य सरकार को 6 हजार 21 करोड़ का अतिरिक्त व्यय भार उठाना पड़ा। लगभग 17 लाख 50 हजार किसानों की ऋण माफी से लगभग 9 हजार करोड़ का अतिरिक्त व्यय भार आया। खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत कमजोर परिवारों के साथ ही सामान्य परिवारों को भी प्रति राशन कार्ड 35 किलो चावल देने की यूनिर्वसल पीडीएस योजना पर 22 सौ करोड़ का अतिरिक्त वार्षिक व्यय संभावित है। 400 यूनिट तक बिजली बिल आधा करने से लगभग 8 सौ करोड़ अतिरिक्त व्यय का अनुमान है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि 14वें वित्त आयोग ने केंद्रीय करों में राज्यों का हिस्सा बढ़ाकर 42 प्रतिशत किया था, लेकिन केन्द्रीय करोें पर उपकर, अधिभार और करों पर दी जाने वाली कटौती व छूट के कारण सही मायने में 42 प्रतिशत राशि राज्यों को नहीं मिल सकी है। उन्होंने केन्द्रीय करों में राज्यों के हिस्से को 42 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने का प्रस्ताव भी दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने आयोग को राज्य-विशेष अनुदानों के लिए 1 लाख 76 हजार 2 सौ 15 करोड़ रूपए के प्रस्ताव दिए हैं। राज्य गठन के बाद अब तक राज्य को केन्द्र से कोई विशेष आर्थिक सहायता नहीं मिली है। उन्होंने वित्त आयोग से इन प्रस्तावों पर और केन्द्र व राज्यों के बीच राजस्व वितरण के लिए दिए अन्य सुझावों पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया।
बैठक में मंत्रीमण्डल के सदस्य ताम्रध्वज साहू, मोहम्मद अकबर, डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, डॉ. शिवकुमार डहरिया, अनिला भेड़िया, उमेश पटेल, अमरजीत भगत, वित्त आयोग के सदस्य अजय नारायण झा, डॉ. अनूप सिंह, डॉ. अशोक लाहिरी, रमेश चंद, वित्त आयोग के सचिव अरविंद मेहता, राज्य शासन के मुख्य सचिव सुनील कुजूर, अपर मुख्य सचिव वित्त अमिताभ जैन, अपर मुख्य सचिव वन सीके खेतान, अपर मुख्य सचिव कृषि केडीपी राव सहित प्रमुख अधिकारी उपस्थित थे।

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