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राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के घर में सबसे अच्छा जल संरक्षण – भूपेश

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सीजी न्यूज रिपोर्टर

रेन वॉटर हार्वेस्टिंग विषय पर आयोजित कार्यशाला में जल संरक्षण को लेकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि वाटर हार्वेस्टिंग कोई नई चीज नहीं है। हमारे पुरखे गुजरात और राजस्थान में पानी का संरक्षण करते थे। सबसे अच्छा जल संरक्षण पोरबंदर में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के घर में है। उनके घर में छत का पानी घर के आंगन में बने कुंए में एकत्र होता था। इस समय शहरों के साथ-साथ गांवों की गलियों, सड़कोें और आंगन में कांक्रीटीकरण होने से पानी जमीन के अंदर नहीं जा रहा।

अपने घर का उदाहरण देते हुए बघेल ने कहा कि उन्होंने वर्ष 2001 में अपने घर में रूफ वाटर हार्वेस्टिंग करवा लिया था। इस गर्मी में मोहल्ले के बोर में पानी सूख गया लेकिन मेरे घर के ट्यूबवेल में पानी था। लोग अपने आंगन में कुंए में छत का पानी एकत्र कर सकते हैं। असफल बोर को रूफ वाटर हार्वेस्टिंग से जोड़कर छत का पानी जमीन के अंदर डाल सकते है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री डॉ. शिव कुमार डहरिया ने कहा कि प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में 47 हजार भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग कराने का लक्ष्य तय किया गया है। अब तक साढ़े 15 हजार  भवनों में यह काम पूरा हो चुका है। आवास एवं पर्यावरण मंत्री मोहम्मद अकबर ने कहा कि ग्लोबल वार्मिग के कारण  मौसम बदल रहा है। चेरापूंजी में सबसे ज्यादा वर्षा होती थी लेकिन अब वहां एक-एक बूंद के लिए लड़ाई होती है। पहले चेक डेम आदि बनाकर वाटर रिचार्जिंग का प्रयास किया गया लेकिन यह ज्यादा सफल नहीं हुआ। राज्य सरकार ने नरवा योजना के माध्यम से प्राकृतिक जल स्त्रोतों को पुनर्जीवित करने का प्रयास शुरू किया है।