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लापरवाही और कमीशनखोरी का खेल देखना है तो पद्मनाभपुर गार्डन का हाल देखिये, 82 लाख की लागत से बने गार्डन की सूरत 6 महीने में ही बिगड़ने लगी, नहीं हो रहा रखरखाव, पोल सामग्री चोरी, कई पोल गिरने लगे  

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सीजी न्यूज रिपोर्टर

नगर निगम में सरकारी धन का किस कदर दुरुपयोग हो रहा है, इसका ताजातरीन उदाहरण देखना है तो पद्मनाभपुर में अमृत मिशन योजना से बने नए गार्डन का हाल देख लीजिये। यहां गार्डन के रेनोवेशन का काम पूरा हुए सिर्फ 6 महीने बीते हैं। हाल ये है कि यहां हुए स्तरहीन निर्माण कार्यों की पोल अभी से खुलने लगी है। प्रकाश व्यवस्था के लिए लगाए गए पोल गिरने की हालत में हैं। लाइट व अन्य सामग्री की चोरी होने लगी है। लोकार्पण के बाद निगम अफसरों ने गार्डन की सुध तक नहीं ली।

गार्डन निर्माण में 82 लाख रुपए खर्च किए गए। इसके बाद निगम प्रशासन ने व्यवस्था दुरुस्त रखने में दिलचस्पी नहीं ली। अमृत मिशन योजना के तहत गार्डन निर्माण या सौंदर्यीकरण का काम ढाई साल पहले स्वीकृत हुआ। काम की धीमी रफ्तार और बार-बार काम रुकने के कारण यह योजना अब से 6 माह पहले पूरी हुई। लोकार्पण के बाद इस गार्डन की देखरेख और रखरखाव के साथ सुरक्षा के लिए कोई भी गार्ड, माली या केयरटेकर तैनात नहीं किया गया। बिजली के 3 पोल चोरी हो चुके हैं। इनमें सोलर लाइट लगाई गई थी। पोल मजबूती से न लगाने के कारण गिरने लगी है।

ऐसा है निगम अफसरों का रवैया

सरकारी धनराशि की बर्बादी करने में माहिर दुर्ग नगर निगम के अफसरों को जनता की सहूलियत और सुविधओं की जरा भी फिक्र नहीं है। हाल ये है कि ठेकेदार को वर्कआर्डर देने के बाद निगम के इंजीनियर साइट पर सिर्फ लेआउट के लिए ही जाते हैं। साइट पर क्या काम हो रहा है और किस गुणवत्ता का हो रहा है, इससे निगम इंजीनियरों को कोई मतलब नहीं। निर्माण कार्यों की गुणवत्ता जांचने परखने के लिए इंजीनियर साइट पर जाते ही नहीं। निर्माण कार्य किस गुणवत्ता से करना है, यह ठेकेदार ही तय करता है। उसे पूरी छूट रहती है। निगम के इंजीनियर सिर्फ इस्टीमेट बनाते हैं और उसके बाद ठेकेदार का बिल तैयार करते हैं। क्वालिटी की जांच करने कोई झांकने भी नहीं जाता।

दो दशकों में सिर्फ सरकारी पैसों की बर्बादी हुई, कमीशनखोरी का खेल जमकर चला

पिछले दो दशकों में नगर निगम में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता के साथ हुए खिलवाड़ और सत्ता की शह पर करोड़ों नहीं बल्कि अरबों रुपए खर्च किए गए। इसके बावजूद शहर की हालत नहीं सुधर पाई। चौपाटी, पुष्पवाटिका, गौरवपथ, चौक-चौराहों के सौंदर्यीकरण के कई कार्यों को बार-बार किया गया। एक ही काम के बार-बार बिल बनते रहे। बिल पास भी होते रहे। नीचे से लेकर ऊपर तक कमीशन का खेल चलता रहा। स्तरहीन निर्माण कार्यों के कारण शहर के लोग तकलीफें झेलते रहे। सुंदर और स्वच्छ शहर का सपना,,, सपना ही रह गया।

दर्जनों बार शिकायत कर चुके, नहीं होती कार्रवाई

गार्डन निर्माण कार्य की स्वीकृति मिलने से लेकर लोकार्पण होने के बाद अभी तक निगम की लापरवाही को लेकर दर्जनों बार सवाल उठाने के बाद भी अफसरों पर कोई असर नहीं होता। पहले टेंडर प्रक्रिया लटकाई गई। बाद में निर्माण कार्य कछुआचाल से चलता रहा। अब लोकार्पण के बाद यहां की देखरेख के लिए कोई व्यवस्था नहीं हो पाई है। कई बार शिकायत के बाद भी नगर निगम के अफसर ध्यान नहीं दे रहे हैं।

राजेश शर्मा,

पार्षद वार्ड 45, पूर्व नेता प्रतिपक्ष नगर निगम दुर्ग

सीजी न्यूज का सवाल ???

सवाल ये है कि निगम प्रशासन की दिलचस्पी आखिर किसमें है। सरकार से योजनाओं के लिए राशि की मांग करने में,,, राशि मिलने के बाद टेंडर प्रक्रिया में,,, चहेते ठेकेदार को ठेका देने में,,, और फिर ठेकेदार से कमीशन वसूलने में। पूरा सिस्टम इसी मकड़जाल में उलझा हुआ है। सरकार से मिली राशि से शहर की तस्वीर संवारने की नीयत होती तो पद्मनाभपुर गार्डन का हाल इतने कम समय में इतना बुरा नहीं होता। सच तो ये है कि पूरे शहर का हाल इतना बुरा नहीं होता। यही हालत रही तो पुष्पवाटिका और चौपाटी की तरह चंद महीनों में पद्मनाभपुर गार्डन भी उजड़ जाएगा।