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वन नेशन, वन इलेक्शन नीति ठीक, पर मोदी सरकार की नीयत में खोट, तानाशाही का खतरा

सीजी न्यूज रिपोर्टर

ट्विनसिटी के बुद्धिजीवियों के संगठन लोकतांत्रिक विचार मंच की विचार गोष्ठी में आज केंद्र सरकार के प्रस्तावित वन नेशन, वन इलेक्शन नीति पर वक्ताओं ने विचार व्यक्त किए। अधिकांश वक्ताओं ने कहा कि वन नेशन वन इलेक्शन नीति ठीक है, लेकिन मोदी सरकार की नीयत में खोट है। इस एजेंडा के माध्यम से केंद्र सरकार तानाशाही थोपने का प्रयास कर रही है। आरएसएस इस नीति की आड़ में राज्य विरोधी एजेंडा लागू कर सकती है।

दुर्ग के सिंधु भवन में विचार गोष्ठी में मुख्य वक्ता वित्त आयोग के पूर्व अध्यक्ष वीरेंद्र पांडेय ने कहा कि नीति भले ही ठीक है, लेकिन मोदी सरकार की नीयत संदिग्ध है। आज वन नेशन वन इलेक्शन की बात कर रहे हैं। कल वन नेशन वन पार्टी वन लीडर की बात करेंगे। मोदी सरकार कांग्रेस मुक्त भारत बनाने की बात करती रही है लेकिन कर्नाटक, गोवा और राज्य सभा मे जिस तरह भाजपा ने दलबदल कराया है, उससे ऐसा लगता है कि मोदी सरकार विपक्षविहीन भारत बनाने का प्रयास कर रही है।

गोष्ठी को संबोधित करते हुए आयोजक राजकुमार गुप्त नें कहा कि संघ के सरसंघ चालक गोलवलकर ने बंच आफ थाट्स में भाषावार राज्यों के गठन का विरोध किया है। इसी प्रकार दीनदयाल उपाध्याय ने एकात्म मानववाद की थ्योरी दी है। वन नेशन वन इलेक्शन के बहाने मोदी सरकार संघ का एजेंडा लागू करने का प्रयास कर रही है। गोष्ठी को डा. संजय दानी, डा. एसके अग्रवाल, विश्वरंजन सिन्हा, बृजेंद्र तिवारी, आईके वर्मा, घनश्याम सोनी, आलम खान, मेहरबान सिंह, राजेंद्र परगनिहा, सुरेंद्र मोहंती, शेषनारायण शर्मा, सतीश त्रिपाठी ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन नरेश विश्वकर्मा ने किया।

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