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छत्तीसगढ़ में अब आदिवासियों की जमीन कोई दूसरा नहीं खरीद सकेगा, फर्जी प्रमाण पत्रों का एक माह में परीक्षण कर निराकरण होगा – सीएम

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सीजी न्यूज रिपोर्टर

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर छत्तीसगढ़ में नौकरी कर रहे लोगों के मामलों का परीक्षण एक माह के भीतर कर लिया जाएगा। ऐसे मामलों की जांच के बाद उचित निराकरण किया जाएगा ताकि फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर लोग नौकरी न कर सकें। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर के इंडोर स्टेडियम में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व में आदिवासियों की सहमति से जमीन खरीदने के संबंध में बनाए गए कानून को राज्य सरकार ने समाप्त कर दिया है। अब छत्तीसगढ़ में आदिवासी की जमीन कोई दूसरा नहीं खरीद सकेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब आदिवासियों को उनके जल, जंगल और जमीन के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकेगा। आदिवासियों की संस्कृति और परंपरा को संरक्षित करने राज्य सरकार दृढ़ संकल्पित है। समारोह की अध्यक्षता आदिम जाति, अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने की। समारोह में  उद्योग मंत्री कवासी लखमा, खाद्य मंत्री अमरजीत भगत, नगरीय विकास मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया, विधायक मोहन मरकाम, शिशुपाल सोरी, विनय भगत, पूर्व मंत्री लता उसेंडी और गंगा पोटाई, पूर्व विधायक गुलाब सिंह, अम्बिका मरकाम विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर के लोहंडीगुड़ा क्षेत्र में 10 गांवों के 17 किसानों को 4200 एकड़ भूमि लौटाई गई है। उन्होंने कहा कि आदिवासियों की वजह से ही आज जंगल बचे हैं। वनों का प्रबंधन आदिवासी ही बेहतर ढंग से कर सकते हैं। इसलिए राज्य सरकार वनवासियों को सामुदायिक वन अधिकार के पट्टे दे रही है। आज कोण्डागांव में 10 वनवासियों को 2000 एकड़ में सामुदायिक अधिकार के पट्टे दिए गए हैं। बघेल ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ ने 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस मनाने की घोषणा की। पहली बार राज्य सरकार ने इस अवसर पर शासकीय अवकाश घोषित कर जनभावना को सम्मान दिया है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए आदिम जाति विकास मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने कहा कि किसानों से अधिग्रहीत भूमि वापसी का राज्य सरकार का फैसला इतिहास में स्वर्ण अक्षर में दर्ज होगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने विभिन्न आदिवासी विकास प्राधिकरणों में स्थानीय आदिवासी विधायकों को अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के रूप में काम करने का अवसर देकर सम्मान दिया है। समारोह को उद्योग मंत्री कवासी लखमा, खाद्य मंत्री अमरजीत भगत, नगरीय विकास मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया, विधायक मोहन मरकाम ने भी सम्बोधित किया।

इससे पहले आदिम जाति विकास विभाग के सचिव डीडी सिंह ने स्वागत भाषण दिया। जीएस धनंजय ने समाज की ओर से मांग पत्र पढ़ा। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर आदिवासियों के अधिकारों पर प्रकाशित पुस्तक का विमोचन किया। समारोह में सर्व आदिवासी समाज के प्रदेश अध्यक्ष बीपीएस नेताम, डॉ. शंकर लाल उइके, कुंदन सिंह ठाकुर, एचके सिंह, नवीन कुमार भगत सहित समाज के पदाधिकारी, प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के नागरिक मौजूद थे।