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केबिनेट का फैसला, छत्तीसगढ़ खेल प्राधिकरण का गठन होगा, मंदी में उद्योगों को टिके रहने 2020 तक बिजली बिल में राहत, बस्तर व सरगुजा में विशेष कर्मचारी चयन बोर्ड गठित होगा

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सीजी न्यूज रिपोर्टर

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में आज मंत्रिपरिषद की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिये गए। प्रदेश में खेल विकास प्राधिकरण का गठन करने का निर्णय लिया गया। अचल संपत्तियों का रजिस्ट्री शुल्क 4 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत करने के निर्णय का अनुमोदन किया गया। औद्योगिक एवं आर्थिक मंदी के कारण स्टील उद्योगों को प्रतिस्पर्धा में टिके रहने के लिए राज्य शासन ने कई फैसले किए हैं।

केबिनेट की बैठक में आवासीय मकानों और फ्लैट्स पर पंजीयन शुल्क 4 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत करने के निर्णय का अनुमोदन किया गया। अचल संपत्ति की रजिस्ट्री में आ रही दिक्कतों को देखते हुए 19 जुलाई को कैबिनेट की बैठक में बाजार मूल्य गाइडलाइन दरों को पूरे प्रदेश में एकमुश्त 30 प्रतिशत घटाने का निर्णय लिया गया था। यह निर्णय को 25 जुलाई से लागू किया गया। 75 लाख रुपए बाजार मूल्य तक के आवासीय मकानों या फ्लैट्स के विक्रय पर 31 मार्च 2020 तक वर्तमान में लागू पंजीयन शुल्क (संपत्ति के गाइडलाइन मूल्य का 4 प्रतिशत) में 2 प्रतिशत की छूट दी जाएगी।

केबिनेट ने छत्तीसगढ़ खेल विकास प्राधिकरण के गठन का निर्णय लिया है। इसका मुख्य उद्देश्य खेल के क्षेत्र में नीतिगत निर्णय, खेल से जुड़े विभागों में समन्वय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के आयोजनों के संबंध में निर्णय लेना है। खेलों के लिए आवश्यक संसाधनों का सृजन, खेल उत्कृृष्टता केंद्र और खेल विद्यालयों के क्रियान्वयन सहित खेलों के विकास के लिए अन्य आवश्यक कार्य प्राधिकरण के माध्यम से किए जाएंगे। प्राधिकरण के अध्यक्ष मुख्यमंत्री होंगे। खेल एवं युवा कल्याण मंत्री प्राधिकरण के उपाध्यक्ष और सभी मंत्री सदस्य होंगे।

केबिनेट ने औद्योगिक और आर्थिक मंदी के कारण स्टील उद्योगों को प्रतिस्पर्धा में टिके रहने देने राज्य शासन ने वित्तीय वर्ष 2018-19 में घोषित विशेष राहत पैकेज की वैधता बढ़ा दी है। पैकेज की वैधता 31 मार्च 2019 को समाप्त हो चुकी है लेकिन अब इसे बढ़ाने का फैसला किया गया है। राज्य के जिन स्टील उद्योगों में अधिकतम 1 मेगावाट क्षमता के कैप्टिव पॉवर प्लांट का संचालन हो रहा है, उनके बिजली टैरिफ में सम्मिलित उर्जा प्रभार में 1 अप्रैल 2019 से 31 मार्च 2020 तक 80 पैसे प्रति यूनिट की छूट दी जाएगी।
केबिनेट ने बायो-एथेनॉल उत्पादन संयंत्र की स्थापना को प्रोत्साहन देने का फैसला किया। राज्य में धान की पैदावार ज्यादा होने पर धान और गन्ने का रस, बी-शीरा (मोलासेस) और अन्य कृृषि उत्पाद् जैसे पुआल, मक्का, ज्वार, बाजरा आदि से बॉयो-एथेनाल उत्पादन संयंत्र की स्थापना की जाएगी। इसमें ऊर्जा विभाग, सहकारिता, कृृषि एवं उद्योग विभाग सहयोग करेंगे।
केबिनेट ने डायवर्सन प्रकिया का सरलीकरण करते हुए फैसला किया है कि विकास योजना के अंतर्गत आने वाले ग्रामों में कृषि भूमि को गैर कृृषि भूमि में परिवर्तित करने संबंधी आवेदन सबसे पहले नगर एवं ग्राम निवेश विभाग में प्रस्तुत किया जाएगा। आवेदक के प्रस्तावित भूमि उपयोग विकास योजना के अनुरूप होने पर स्वीकृृति देते हुए भू-राजस्व के पुननिर्धारण के लिये सक्षम प्राधिकारी और अनुविभागीय अधिकारी को भेजा जाएगा। वर्तमान में डायवर्सन के लिए अलग अलग स्तर पर अधिकारी प्राधिकृत हैं। इस व्यवस्था को संशोधित और सरलीकृत करते हुए अनुविभागीय अधिकारी को ही नगर निवेश विभाग से प्राप्त विकास योजना के आधार पर डायवर्सन के लिए अधिकृत किया गया।

केबिनेट ने विशेष पिछड़ी जनजाति समूह के अभ्यर्थियों को सहायक शिक्षक और सहायक ग्रेड-3 के पदों पर संपूर्ण प्रदेश में सीधी भर्ती करने का फैसला किया। बस्तर एवं सरगुजा में विशेष कनिष्ठ कर्मचारी चयन बोर्ड के गठन का अनुमोदन किया गया। छत्तीसगढ़ वरिष्ठ मीडियाकर्मी सम्मान निधि नियम-2013 में संशोधन करते हुए पूर्व में अर्हतादायी आयु 65 वर्ष से घटाकर 60 वर्ष, सम्मान निधि 5 वर्ष से बढ़ाकर आजीवन और राशि 5 हजार से बढ़ाकर 10 हजार किया गया।
केबिनेट ने सौर सुजला योजना फेज 4 के तहत 20,000 सोलर पंपों की स्थापना करने का फैसला किया जिसमें से 4 हजार सोलर पंप इस साल सुराजी गौठान में स्थापित किये जाएंगे। नगरीय निकायों में अतिक्रमण हो चुकी भूमि के व्यवस्थापन, शासकीय भूमि के आवंटन सहित अन्य मामलों को लेकर भी फैसला किया गया। निजी उपयोग के लिए 7500 वर्गफीट तक भूमि आबंटन का अधिकार जिला कलेक्टर को दिया गया है। इससे ज्यादा शासकीय भूमि का आबंटन राज्य शासन करेगी।

सार्वजनिक या पंजीकृत संस्थाओं को भूमि आबंटन का अधिकार जिला कलेक्टर को दिया गया है। जिला स्तर पर शासकीय भूमि आबंटन व व्यवस्थापन के आवेदन जिला कलेक्टर के समक्ष प्रस्तुत करने समिति गठित की जाएगी। अपर कलेक्टर, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), संयुक्त कलेक्टर की अध्यक्षता में समिति गठित होगी। समिति में नगर एवं ग्राम निवेश कार्यालय के संयुक्त, उप या सहायक संचालक सदस्य होंगे। संबंधित नगरीय निकाय के आयुक्त या अधिकारी सदस्य होंगे।