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बोलीदार को दो साल के लिए मिलेगा रेत उत्खनन का पट्टा, शासन ने जारी किया छत्तीसगढ़ गौण खनिज साधारण रेत नियम 2019

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नए नियमों से अब नई सरकार को कुल 2 सौ करोड़ का राजस्व मिलने की उम्मीद है। इससे पहले साल भर में सिर्फ 13 करोड़ की रायल्टी मिल रही थी। रेत के मूल्य पर भी नियंत्रण रहेगा

सीजी न्यूज रिपोर्टर

प्रदेश में रेत खदानों के संचालन के लिए छत्तीसगढ़ गौण खनिज साधारण रेत (उत्खनन एवं व्यवसाय) नियम, 2019 बनाया गया है। पंचायतों और नगरीय निकायों के माध्यम से रेत खदानों के संचालन की वर्तमान व्यवस्था में बदलाव करते हुए अब रेत खदान का संचालन करने कलेक्टर के माध्यम से रिवर्स बिडिंग की जाएगी। इस आधार पर रेत उत्खनन के लिए व्यक्ति या संस्था का चयन किया जाएगा।

नए नियमों के अनुसार रेत खदान संचालक को खनिज रेत का मूल्य और अन्य प्रभारित करों को खदान क्षेत्र में आम जनता के लिए प्रदर्शित करना होगा। रेत परिवहन में शामिल वाहनों और रेत व्यवसाय से जुड़े ट्रेडर्स का पंजीयन कराना भी अनिवार्य रहेगा। ठेकेदार को रायल्टी और अन्य करों का अग्रिम भुगतान करने के बाद खनिज ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से ट्रांसपोर्टेशन का पास जारी किया जाएगा। विभागीय अफसरों ने बताया कि 19 अगस्त को रायपुर, बिलासपुर, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, कोरबा, मुंगेली, कांकेर, बलौदाबाजार-भाटापारा और अन्य जिलों में कुल 60 रेत खदानों के लिए एनआईटी जारी किया गया है।

रेत खदान का पट्‌टा लेने के लिए छत्तीसगढ़ के मूल निवासी ही नीलामी में भाग ले सकते हैं। रेत उत्खनन में किसी व्यक्ति, फर्म और संस्था का एकाधिकार समाप्त करने नई व्यवस्था की गई है। किसी भी एजेंसी को जिले में सिर्फ एक खदान समूह और पूरे प्रदेश में अधिकतम 5 समूहों की रेत खदानें ही मिल सकती है। नई व्यवस्था के तहत प्रदेश भर में रेत के अवैध उत्खनन, परिवहन, भंडारण पर प्रभावी नियंत्रण करने जिला और प्रदेश स्तर पर उड़नदस्ता दलों का गठन किया जा रहा है।

नियमों का उल्लंघन करने पर दोषी के विरूद्ध कार्यवाही करने और रेत परिवहन में शामिल वाहन और ट्रेडर्स के 3 बार से ज्यादा अवैध परिवहन में लिप्त पाए जाने पर उल्लंघनकर्ता के विरूद्ध ऑनलाईन पंजीयन से पृथक कर दिया जाएगा। इससे पहले खनिज रेत का उत्खनन और व्यवसाय ग्राम पंचायतों के माध्यम से हो रहा था। संबंधित ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत और नगरीय निकाय सिर्फ रायल्टी प्राप्त कर रेत खदानों का संचालन करवा रहे थे।

पुरानी व्यवस्था में अवैध तरीके से निजी व्यक्तियों की मशीनें लगाकर रेत खदानों को ठेके पर दे दिया जा रहा था। माईनिंग प्लान और पर्यावरण नियमों का पालन ग्राम पंचायतों ने नहीं किया। जिन खदानों में मैन्युल लोडिंग के लिए अनुमति मिली थी, उन खदानों में भी मशीनों से लोडिंग की शिकायतें मिल रही थी। पंचायतों का खदान संचालन में कोई नियंत्रण नहीं होने से मूल्य वृद्धि के साथ-साथ अव्यवस्था हो गई थी। नई व्यवस्था के तहत आम जनता को निर्धारित दर पर सुगमता से रेत मिलेगा।