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जांबाज भूपेश … 14 साल पहले जंगल में तलवार, भाला, लाठी से लैस दर्जनों लोगों से घिरने के बाद भी नहीं डरे … पत्रकारों की जान बचाने जोखिम में डाल दी अपनी जान

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के जन्मदिन पर विशेष रिपोर्ट…14 साल पहले की सच्ची घटना … जिसकी इंडेप्थ स्टोरी पहले किसी भी अखबार में नहीं छपी … 

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कांकेर जिले के भानुप्रतापपुर ब्लॉक का भैंसाकन्हार गांव। 14 साल पहले यहां के वनक्षेत्र में खदान से लौह अयस्क निकालने बड़े पैमाने पर पेड़ काटे जा रहे थे। पर्यावरण नियमों को दरकिनार कर जंगल साफ करने का खेल चरम पर था। विधानसभा के उपनेता प्रतिपक्ष भूपेश बघेल ने इस मामले को जोरशोर से उठाया। इसके सबूत मीडिया को दिखाने भूपेश बघेल दुर्ग के कुछ पत्रकारों को लेकर भैंसाकन्हार पहुंचे। जंगल के बीच उस खदान एरिया में बेशुमार पेड़ों को गिराने की तस्वीरें लेने के बाद शाम 4 बजे हम वापस लौटने लगे।

लौह अयस्क की खदान की तरफ जाने के समय तेज बारिश से हम लोग पूरी तरह भीग चुके थे। लौटते समय भी आसमान पर काले बादल छाए थे। हलका अंधेरा छाने लगा था। दोबारा बारिश शुरू होने से पहले हाइवे पर खड़ी कारों तक पहुंचने के लिए हम सब तेजी से चल रहे थे। अभी करीब आधा किलोमीटर का रास्ता बचा था … हमें पता ही नही था कि आगे कोई खतरा हमारा इंतजार कर रहा है। भूपेश भैया से बातचीत करते हुए हम उस पगडंडी पर बढ़ते रहे। आगे कुछ दूर पर करीब 25-30 लोग खड़े दिखे। उन लोगों ने हमें रोका। सबके हाथ में हथियार थे …  तलवार, भाला, लाठी, लोहे की राड, पाइप वगैरह। उन्होंने शराब पी रखी थी। हमारा रास्ता रोकने के बाद उन्होंने हम लोगों को चारों तरफ से घेर लिया।

वो लोग खदान की लीज लेने वाली फर्म के गुर्गे थे। पर्यावरण नियमों को ताक पर रखकर अवैध पेड़ कटाई का मामला एक्सपोज होने से रोकने ये लोग हमें धमकी देने आए थे। उनका इरादा मारपीट कर डराने धमकाने का था। घातक हथियारों से लैस शराब के नशे में वो गुर्गे कुछ भी … मारपीट से ज्यादा जान से मारने के लिए भी आमादा थे। धमकियां भी जान से मारने की दे रहे थे। उन्होंने सबसे पहले भूपेश भैया को निशाने पर लिया। उन लोगों ने भूपेश भैया पर खदान बंद कराने की मुहिम चलाने और ग्रामीणों की रोजी-रोटी छीनने का आरोप लगाया। उनके गुस्से का शिकार पत्रकार भी हुए। गाली गलौज करते हुए हथियार लहराते वो सबको जिंदा गाड़ देने की धमकी देने लगे।

भूपेश भैया और उनके साथ आए माइनिंग एक्सपर्ट विनोद चावड़ा ने उन्हें समझाने की कोशिश की। उन्हें बताया कि जनप्रतिनिधि होने के नाते ऐसे मुद्दे उठाना उनका काम है। लेकिन, शराब के नशे में वो लोग किसी भी दलील को सुनने तैयार नहीं थे। आधे घंटे तक डर-दहशत-खौफ का यही माहौल रहा। हम लोगों के मन में एक ही सवाल था – आज सही सलामत वापस घर लौट पाएंगे या नहीं ? जान बचेगी या …?

उस खतरनाक और नाजुक समय में अचानक, जैसे पूरा सीन बदल गया। धमकियों के बीच युवा कांग्रेस में ताजा-ताजा शामिल हुए देवलाल ठाकुर (वर्तमान में बालोद जिला पंचायत अध्यक्ष) और छोटू यादव ने हिम्मत दिखाते हुए आगे बढ़कर भूपेश भैया को दोनों ओर से कवर किया। फिर सीधी चुनौती दे दी। हम भूपेश भैया को लेकर जा रहे हैं, जिसे रोकना है, रोक लो। जंगल के बीच दहशत, खौफ से भरे घटनाक्रम का यह बड़ा टर्निंग पाइंट था। देवलाल और छोटू यादव के साथ दल्लीराजहरा युवा कांग्रेस अध्यक्ष शीबू नायर ने भी आगे बढ़कर भूपेश भैया को कवर कर लिया। हम सब लोग अब हाईवे की तरफ बढ़ने लगे।   

हमारे ठीक पीछे हथियारों से लैस वो गुर्गे हमें आगे बढ़ने से रोकते हुए,,,गालियों के साथ धमकियां देते चलते रहे। गनीमत रही कि किसी ने भी उस दौर में हथियार नहीं चलाया। धमकियां और गालियां सुनते-सुनते हम सब हाईवे के करीब पहुंच गए जहां दल्ली राजहरा से हमारे साथ आए युवा कांग्रेसी हमारे वाहनों के साथ मौजूद थे। उम्मीद थी कि यहां पहुंचकर स्थिति-परिस्थिति बदलेगी। मगर नियति को कुछ और ही मंजूर था।

हमारे वहां पहुंचने से पहले कुछ ग्रामीणों ने हाईवे पर खड़े युवा कांग्रेसियों को बता दिया कि भूपेश बघेल और पत्रकारों को घेर लिया गया है। ये खबर सुनते ही दर्जन भर युवा कांग्रेसी दो कारों में सवार होकर पुलिस की मदद लेने भानुप्रतापपुर चले गए। हमारे देखते ही देखते दोनों कारें फर्राटा मारते हुए वहां से चली गई। हम रोड पर पहुंचे तो वहां सिर्फ एक कार खड़ी थी। खदान से लौटने वाले 12 लोग एक कार में कैसे बैठते ???

ऐसी थी भूपेश भैया की जांबाजी

उस खौफ के माहौल में हर कोई वहां से निकलना चाहता था। लेकिन उस दिन ऐसे ही खौफ के समय में हमें भूपेश भैया की जांबाजी का पता चला। आम तौर पर वीआईपी ऐसे मौके पर सबसे पहले अपनी सुरक्षा देखते हैं। पर भूपेश भैया ने अपनी जान की परवाह नहीं की। उन्होंने सबसे पहले पत्रकारों को वहां से सुरक्षित निकालने कहा। उनके कहने पर पत्रकार कार में बैठने लगे। पत्रकारों के साथ कार की पिछली सीट पर कांग्रेस नेता राजेंद्र साहू भी बैठ गए। देवलाल ने भूपेश भैया को सामने की सीट पर बैठा दिया। गुर्गे अभी भी हाईवे पर गरिया रहे थे। भूपेश भैया ने कार के बाहर देखा। दो पत्रकारों समेत देवलाल, छोटू यादव और दो-चार युवा कांग्रेसी शांत मुद्रा में खड़े थे। उनके लिए कार में जगह नहीं थी।

भूपेश भैया ने एक पल भी खुद की जान बचाने के बारे में नहीं सोचा। फौरन कार से बाहर निकल गए। उनके बाहर आने से खाली हुई सीट पर एक पत्रकार को बैठाकर दृढ़ता से बोले, मैं अपने किसी भी साथी को अकेला छोड़कर नहीं जाऊंगा। सभी को यहां से भेजने के बाद ही वापस लौटूंगा। उन्होंने ड्राइवर से कार बढ़ाने कहा। कार दौड़ने लगी। कुछ युवा कांग्रेसियों और एक पत्रकार को छोड़कर बाकी सभी लोग कार में बैठकर वहां से सुरक्षित निकल चुके थे। भूपेश भैया अपने गिने चुने साथियों के साथ जंगली इलाके में अंधेरी सुनसान सड़क पर हथियार लहराते गुर्गों की धमकियां झेलते रहे। भयंकर विषम परिस्थिति के बावजूद …न घबराए ,,, न डरे ,,, न अपनी जान की परवाह की ,,, पत्रकारों को सुरक्षित निकालने खुद की जान जोखिम में डाल दी।  

पुलिस ने गुर्गों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा, साथियों के साथ पुलिस सुरक्षा में लौटे

कांग्रेस नेता राजेंद्र साहू के साथ हम सभी पत्रकार 10 किलोमीटर दूर चाय-नाश्ते की एक होटल में रुके। भारी तनाव और बेसब्री से भूपेश भैया और अन्य लोगों का इंतजार करने लगे। करीब आधे घंटे बाद सभी लोग पुलिस सुरक्षा के साथ लौटे। सबने राहत की सांस ली। ईश्वर को धन्यवाद दिया। बातचीत के दौरान पता चला कि हमारी कार रवाना होने के बाद दुर्ग भिलाई के लोकल टीवी चैनल के एक पत्रकार और युवा कांग्रेस के दो-तीन कार्यकर्ताओं के साथ गुर्गों ने मारपीट का प्रयास किया। धक्कामुक्की करने लगे जिन्हें भूपेश भैया व अन्य लोगों ने बचाया। कुछ देर बाद भानु प्रतापपुर से पहुंची पुलिस ने खदान मालिक के गुर्गों को घेरा। दौड़ा-दौड़ा कर पीटा। गुर्गों की जमकर धुलाई हुई।

और फिर सबने लगाया ठहाका

खदान का हाल देखने जाते समय भूपेश भैया ने मुझसे सवाल किया था – बताओ हनीफ भाई,,, जंगल, बारिश, पगडंडी, फिसलन भरा रास्ता, पगडंडी… ऐसे माहौल में पहले कभी रिपोर्टिंग किये हो या नहीं। मैंने बताया कि इस तरह की परिस्थितियों में कई बार रिपोर्टिंग कर चुका हूं। बारिश में भीगना कोई खास बात नहीं है। कुछ घंटे बाद हथियारों से लैस गुर्गों की धमकियों, दहशत भरे माहौल के बाद रात 9 बजे ढाबे में भूपेश भैया ने पूरे माहौल को हल्का करने मुस्कुराते हुए मुझसे वही सवाल दोबारा किया। अब मेरा जवाब बदल चुका था –  आज का दिन पूरी जिंदगी नहीं भूल पाऊंगा, भैया। जान बच गई, यही गनीमत है। मेरे बोलने का अंदाज ऐसा था कि भैया के साथ सभी लोग ठहाका लगाकर हंसने लगे।

मीडिया हाउस ने नहीं छापी स्टोरी

रात 12 बजे के आसपास हम सब वापस दुर्ग लौटे। भूपेश भैया ने मुझे घर के पास ड्राप किया। थकान के बावजूद नींद कोसों दूर थी। प्रदेश के एक कद्दावर नेता को कई पत्रकारों के साथ एक घंटे से ज्यादा समय तक जंगल के बीच घेरकर  रखना, हथियार लहराते हुए जान से मारने की धमकी देना कोई छोटी-मोटी स्टोरी नहीं थी। पूरे घटनाक्रम की लाइव स्टोरी छापने की मंशा के साथ मैंने अगले दिन अपने रिपोर्टिंग इंचार्ज को फोन पर स्टोरी बताई। ( मेरे बॉस अवकाश पर थे)।  रिपोर्टिंग इंचार्ज ने साफ लफ्जों में स्टोरी ड्रॉप करने कह दिया। कहने लगे कि स्टोरी नहीं छपेगी। स्टोरी रोकने का आदेश किसने दिया और इसकी एवज में क्या डील हुई, इसका पता आज तक नहीं चला। जिस बड़ी स्टोरी को कवर करने हम सबकी जान खतरे में पड़ गई, वो स्टोरी छपी ही नहीं। खबर न छपने पर भूपेश भैया ने फोन पर मुझसे नाराजगी भी जताई। मैंने उन्हें वस्तुस्थिति से अवगत कराया लेकिन उनकी नाराजगी कम नहीं हुई।

14 साल बाद आज मन का बोझ हलका हुआ…

बाद में भूपेश भैया ने रायपुर में प्रेस कांफ्रेंस के माध्यम से पूरे मामले की जानकारी मीडिया को दी। विधानसभा में यह मामला गूंजा। इस घटना के विरोध में भिलाई 3, चरौदा, दल्ली राजहरा में कांग्रेसियों ने प्रदर्शन भी किया। शीबू नायर के नेतृत्व में दल्लीराजहरा में शहर बंद कराया गया। भैंसाकन्हार में अवैध उत्खनन और पर्यावरण नियमों के उल्लंघन के मामले को लेकर भूपेश भैया ने सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ी। लेकिन, पिछले 14 साल से मेरे मन में यह बोझ रहा कि इतनी बड़ी स्टोरी का लाइव कवरेज तो दूर सामान्य कवरेज भी नहीं हुआ।

तब के उप नेता प्रतिपक्ष भूपेश भैया अाज प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं। आज उनका जन्मदिन है। उनके जन्मदिन पर शुभकामनाओं के साथ … उनकी जांबाजी को सलाम …। करीब 14 साल बाद… आज अपनी न्यूज वेबसाइट सीजी न्यूज डॉट कॉम पर वही स्टोरी पोस्ट कर रहा हूं जो कभी छप नहीं पाई। शायद … अब मेरे मन का बोझ हल्का हो जाए।

…….हनीफ निजामी 

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