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धमधावासियों की मेहनत रंग लाई, हजारों पोस्टकार्ड भेजने पर केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने मांगें धरोहरों के दस्तावेज

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80 दिनों से चल रहा है पोस्टकार्ड अभियान, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन लाकर धरोहरों को बचाने की मांग

सीजी न्यूज़ रिपोर्टर। दुर्ग

धमधा के ऐतिहासिक स्थलों के पुरातात्विक संरक्षण को लेकर दिल्ली से रिपोर्ट तलब की गई है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने दुर्ग कलेक्टर से इस संबंध में स्थल निरीक्षण कर प्रतिवेदन देने कहा है। साथ ही धमधा के पुराने महल, सिंहव्दार, मंदिर के संगत दस्तावेज जैसे राजस्व रिकार्ड, पंचनामा, स्वामित्व, मालिकाना, ऐतिहासिक स्थलों की फोटो सहित संक्षिप्त विवरण आदि भेजने कहा है।

धमधा के लोगों ने केंद्रीय संस्कृति मंत्री प्रहलाद पटेल को पत्र लिखकर राजाकिला, सिंहव्दार और छह आगर छह कोरी तरिया (126 तालाबों) के संरक्षण की मांग की है, धर्मधाम गौरवगाथा समिति धमधा की अगुवाई में पोस्टकार्ड अभियान के तहत यह मांग की जा रही है।

समिति के संयोजकों ने बताया कि केंद्रीय मंत्री को 100 दिन तक 5050 पोस्टकार्ड भेजने का लक्ष्य रखा गया है। अब तक 3160 पोस्टकार्ड भेजे जा चुके हैं। पोस्टकार्ड अभिय़ान के साथ ही राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू, संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत, सांसद विजय बघेल, चुन्नीलाल साहू और कलेक्टर को भी पत्र भेजा गया था।

केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्रालय ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की नई दिल्ली के महानिदेशक को इस मामले को भेजा, जिसके बाद एएसआई के रायपुर कार्यालय से जानकारी मांगी गई। एएसआई रायपुर के अधीक्षण पुरातत्वविद उदय आनंद शास्त्री ने कलेक्टर को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि इस संबंध में आवश्यक स्थल निरीक्षण कर स्थल निरीक्षण प्रतिवेदन दें। साथ ही धमधा के पुराने महल, सिंहव्दार, मंदिर के संगत दस्तावेज जैसे राजस्व रिकार्ड, पंचनामा, स्वामित्व, मालिकाना, ऐतिहासिक स्थलों की फोटो सहित संक्षिप्त विवरण आदि भेजने कहा है।

एएसआई के पत्र के बाद कलेक्टर ने एसडीएम (राजस्व) से स्थल निरीक्षण कर प्रतिवेदन भेजने के निर्देश दिये हैं। यह पहली बार हो रहा है जब राष्ट्रीय स्तर से लेकर जिला व एसडीएम स्तर पर धमधा के ऐतिहासिक स्थलों की पड़ताल की जा रही है। नागरिक इसे पोस्टकार्ड अभियान की सफलता मान रहे हैं।

अभियान के संयोजकों ने बताया कि आजादी के पहले भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण नई दिल्ली ने 5 जुलाई 1909 को धमधा के राजा किला, प्रवेश व्दार आदि राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों की सूची में शामिल किया था। तब यहां पर पुरातत्व से छेड़छाड़ नहीं करने संबंधी सूचना बोर्ड भी लगाया गया था। देश आजाद होने के बाद वहां पुरातत्वीय संरक्षण का कोई काम नहीं हुआ। 11 अप्रैल 1961 को मिनिस्ट्री आफ साइंटिफिक रिसर्च एवं कल्चरल अफेयर्स आर्कियोलाजी ने एक आदेश निकालकर धमधा का नाम राष्ट्रीय महत्व की सूची से बाहर कर दिया। जिसके कारण यहां के प्राचीन राजा किला, सिंहद्वार, अनेक मंदिरों व प्राचीन कुंड व तालाबों का संरक्षण नहीं हो सका और ये नष्ट होने लगे। वर्तमान में धमधा के धरोहरों के साथ छेड़छाड़ व पुरातात्विक नियमों के विपरीत निर्माण कार्य हो गए हैं, जिनके कारण उसका ऐतिहासिक महत्व घटते जा रहा है। नागरिकों ने इसे संरक्षण करने एवं वहां उद्यान और बूढ़ा तालाब में लक्ष्मण झूला बनाए जाने की भी मांग की है।

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इन स्थानों पर हो पुरातात्विक शोध

धमधा अपने आप में प्राचीन और ऐतिहासिक स्थल के रूप में जाना जाता है, लेकिन पिछले कुछ दशकों से यह अपनी पुरातत्वीय पहचान खोते जा रहा है। धमधा के प्राचीन स्थलों में राजा किला, सिंहव्दार, त्रिमूर्ति महामाया मंदिर, शिव-विष्णु मंदिर चौखड़िया कुंड, रामजानकी मंदिर नैया पारा, चतुर्भुजी मंदिर तितुरघाट, सुरक्षा बुर्ज सिरनाभाठा, कांटा वाला मंदिर, शीतला मंदिर, राधाकृष्ण मंदिर, हनुमान मंदिर सहित अनेक पुरातत्वीय अवशेष बिखरे पड़े हैं। धमधा को छह कोरी छह आगर तरिया (126 तालाब) की नगरी के नाम से भी जाना जाता है। लेकिन अब इसकी यह पहचान खोती जा रही है।

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धरोहरों के संरक्षण पर काम कर रही है समिति

धर्मधाम गौरवगाथा समिति धमधा तालाबों और पुरातात्विक धरोहरों को बचाने के लिए गतिविधियां संचालित करती है। इसके पहले समिति ने एक धरोहर चरगोड़िया मंदिर का जीर्णोद्धार और एक संगोष्ठी का भी आयोजन धमधा में किया था। जिसमें पद्मश्री अरूण कुमार शर्मा, जीएल रायकवार समेत अनेक पुरातत्वविद पहुंचे थे। इस समिति ने पिछले साल पुरखौती पर्यटन यात्रा का भी आयोजन किया था, जिसमें 150 लोगों ने धमधा से सहसपुर, देवकर, देवरबीजा और सरदा के प्राचीन मंदिर तक यात्रा की थी और वहां भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण एवं पुरातत्व विभाग के अधीन होने वाले विकास कार्यों को देखा था। धर्मधाम गौरवगाथा समिति ने इन तालाबों के संरक्षण और धमधा में पुरातत्वीय उत्खनन व इतिहास पर शोध करने की मांग भी की है।