Breaking News

Top News

छत्तीसगढ़ में इंडस्ट्रीज डवलपमेंट करने सीएम ने किए ऐतिहासिक फैसले, औद्योगिक क्षेत्रों में भूमि आबंटन की दरों में  30 प्रतिशत की कमी, फूड प्रोसेसिंग, लघु वनोपज व हर्बल आधारित उद्योगों की स्थापना के लिए अब सिंगल विंडो प्रणाली, रियायत भी मिलेगी

Share Now

750CDFB2B72CBE44262120CD5837E2AF

मुख्यमंत्री चेम्बर ऑफ कॉमर्स के कार्यक्रम में सीएम ने किया ऐलान

10 साल से ज्यादा अवधि से संचालित 2 हेक्टेयर क्षेत्र तक की उद्योगों की भूमि फ्री होल्ड, औद्योगिक भूमि के हस्तांतरण शुल्क में कमी के साथ प्रक्रिया का सरलीकरण होगा

सीजी न्यूज रिपोर्टर

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य में औद्योगिक विकास के लिए आज कई ऐतिहासिक घोषणाएं की। मुख्यमंत्री ने औद्योगिक क्षेत्रों में भूमि आबंटन की दरों में 30 प्रतिशत की कमी के साथ ही राज्य में फूड प्रोसेसिंग, लघु वनोपज और हर्बल आधारित उद्योगों की स्थापना के लिए सस्ती दरों पर भूमि, पंूजी, ब्याज अनुदान और करों में छूट देने नई नीति तैयार करने की घोषणा की है। नई नीति 2 माह के भीतर तैयार कर ली जाएगी। मुख्यमंत्री आज राजधानी रायपुर में छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्रीज के कार्यक्रम में औद्योगिक और वाणिज्यिक प्रतिनिधियों से चर्चा कर रहे थे।

मुख्यमंत्री श्री बघेल ने कहा कि राज्य सरकार कृषि के साथ व्यवसाय और उद्योगों की उन्नति के लिए संकल्पित है। प्रदेश में कोर सेक्टर स्टील और सीमेंट से संबंधित उद्योंगों की स्थापना को प्रोत्साहित किया जाएगा। वर्तमान में इन उद्योगों को प्रतिबंधित सूची में रखा गया है, इन उद्योगों को प्रतिबंधित सूची से हटाया जाएगा। औद्योगिक क्षेत्रों में भूमि आबंटन के लिए निर्धारित दरों में 30 प्रतिशत की कमी की जाएगी। वर्तमान में औद्योगिक क्षेत्रों में आबंटित भूमि पर लीज रेंट की दर 3 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत की जाएगी।

प्रदेश में उद्योगों की स्थापना के लिए सभी प्रकार की अनुमतियां समय-सीमा में देने के लिए सिंगल विंडो प्रणाली को प्रभावी बनाया जाएगा। वर्तमान में उद्योगों की स्थापना के लिए भूमि उपलब्ध न होने के कारण आवेदन नही लिए जा रहे है। सभी जिला उद्योग केन्द्रों में नए आवेदन लिए जाएंगे और भूमि का आबंटन पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर किया जाएगा।

सीएम ने कहा कि प्रदेश में 10 साल से ज्यादा अवधि से संचालित 2 हेक्टेयर क्षेत्र तक की उद्योगों की भूमि फ्री होल्ड की जाएगी। औद्योगिक क्षेत्रांे में संचालित गोदामों का नियमितीकरण किया जाएगा। औद्योगिक भूमि के हस्तांतरण शुल्क में कमी की जाएगी और इसकी प्रक्रिया का सरलीकरण किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि आबंटित भूमि के आंशिक हस्तांतरण (सब-लीज) के प्रावधान किए जाएंगे। उद्योगों के पास उपलब्ध रिक्त भूमि या भूमि आबंटन के पश्चात् उद्योग की स्थापना न होने की दशा में उद्योग स्थापना हेतु अधिकतम एक वर्ष का अन्तिम अवसर दिया जाएगा। इसके बाद भूमि आबंटन दरों पर वापस लेकर अन्य पात्र उद्यमियों को दी जाएगी।

राज्य में वर्तमान में एक श्रमिक होने पर भी छोटे व्यपारियों को गुमाश्ता लायसेंस लेने की अनिवार्यता है जिसे बढ़ाकर न्यूनतम मजदूरों की संख्या 10 की जाएगी। फैक्ट्री एक्ट में विद्युत से संचालित डद्योगों में 10 या अधिक श्रमिक नियाजित करने वाले तथा बिना पावर के उपयोग से संचालित उद्योगों में मजदूरों की न्यूनतम संख्या 20 से बढ़ाकर 40 करने का प्रस्ताव भारत सरकार को सहमति के लिए भेजा जाएगा। राज्य में स्टील उद्योगों को आयरन अयस्क की सुगम उपलब्धता के लिए विशेष पहल की जाएगी। मुख्यमंत्री ने चेम्बर पदाधिकारियों की अन्य मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया।

कार्यक्रम में विधायक बृजमोहन अग्रवाल, कुलदीप जुनेजा, विकास उपाध्याय, रायपुर नगर निगम के महापौर प्रमोद दुबे, पूर्व महापौर किरणमयी नायक, चेम्बर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष जितेन्द्र जैन बरलोटा, लालचंद गुलवानी, पूरनलाल अग्रवाल, ललित जैसिंघ, प्रकाश अग्रवाल, योगेश अग्रवाल, अरविन्द जैन, महेन्द्र मुकीम, भरत बजाज, राजेन्द्र जग्गी, विवेक शास्वत, कमल शारडा सहित चेम्बर के अनेक पदाधिकारी, उद्योगपति और प्रदेश के विभिन्न स्थानों से आए व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या उपस्थित थे।