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लाल चावल, काला चावल, कोदो कुटकी, कोसा खरीदने आएंगे 20 देशों से खरीदार

रायपुर में 20 सितंबर से शुरू होगा अंतर्राष्ट्रीय क्रेता-विक्रेता सम्मेलन

 

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सीजी न्यूज रिपोर्टर

देश विदेश में छत्तीसगढ़ के कृषि और वन उत्पादों की बिक्री को बढ़ावा देने 20 सितंबर से तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय क्रेता विक्रेता सम्मेलन शुरू होगा। सम्मेलन में 20 देशों के अंतर्राष्ट्रीय स्तर के 60 खरीदारों समेत देश के दूसरे प्रदेशों से बड़ी तादाद में खरीदार आएंगे। सम्मेलन में कृषि उपज, वनोपज, हैंडलूम, कोसा इत्यादि उत्पादों को अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर प्रोत्साहन दिया जाएगा। इनकी बिक्री बढ़ाने सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 20 सितम्बर को जीई रोड स्थित होटल सयाजी में सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे।
कृषि एवं जैव प्रौद्योगिकी, जल संसाधन मंत्री रवीन्द्र चौबे ने रायपुर में मीडिया को बताया कि सम्मेलन में छत्तीसगढ़ में विशेष गुणों से भरपूर फसलों की भरमार है। इन उत्पादों का व्यापार राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रोत्साहित करना जरूरी है। सम्मेलन के दौरान 20 और 21 सितम्बर को क्रेता और विक्रेता के बीच चर्चा, अनुबंध, एमओयू आदि होगा। 22 सितम्बर को आम जनता इन उत्पादों का अवलोकन कर खरीदारी कर सकते हैं। सम्मेलन में छत्तीसगढ़ के उत्पादों की ब्रांडिंग करने यह सम्मेलन किया जा रहा है।

चौबे ने बताया कि राज्य के कई कृषि उत्पादों ने विशिष्ट पहचान बनाई है। मुख्य रूप से धान, लाल चावल, काला चावल, आर्गेनिक विष्णुभोग चांवल, सुगंधित धान की दूसरी पारंपरिक किस्में व कोदो, कुटकी, रागी, जैसे पारंपरिक और बहूमूल्य कृषि उत्पाद के अलावा मक्का, मखाना, चना, लाल मसूर, सोयाबीन, रामतिल, तिल, फल-सब्जी जैसे फूलगोभी, पत्तागोभी, बैगन, हरा मटर, शिमला मिर्च, टमाटर, गवारफल्ली, मूली, अदरक, हरी मिर्च, हल्दी, पपीता, सीताफल, लीची, ड्रैगन फ्रूट, आंवला, कटहल, केला, नासपत्ती, एप्पल बेर, बेल, काजू, नींबू, गेंदा तथा ग्लेडिलस का उत्पादन हो रहा है।

इस क्षेत्र में विपणन, प्रसंस्करण तथा निर्यात की सम्भावनाओं को बढ़ाने की जरूरत है। इसी तरह वनांचल क्षेत्र में मुख्य रूप से महुआ, महुआ बीज, इमली, साल बीज, औषधीय पौधे जैसे कालमेघ, बेहड़ा, हर्रा, चारगुठली, गोंद, लाख, नागरमोथा, शहद, त्रिफला, अश्वगंधा, सफेद मूसली का संग्रहण और विक्रय को भी बढ़ावा दिया जाएगा। सम्मेलन में स्थानीय कृषकों को राष्ट्रीय-अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के क्रेताओं से सीधे बातचीत कर व्यापार का अवसर मिलेगा। इससे कृषकों को उत्पाद का बेहतर मूल्य मिलेगा। बिचौलियों का रोल खत्म करने में मदद मिलेगी।

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