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मास्टर प्लान की बैठक में गृहमंत्री बोले – कोई भी नहर बंद न हो, इधर… दुर्ग नगर निगम पहले ही पाट चुका है नहर, बन चुकी है सड़क  

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– हर वार्ड में गार्डन के लिए स्थान रिजर्व, बेपरवाह अफसरों ने नहीं बनाए उद्यान, रखरखाव तक नहीं किया, फेंसिंग तार से भी नहीं घेरा

– 3 साल पहले मास्टर प्लान बनाने की प्रक्रिया शुरू, अब तक सिर्फ बैठकें हो रही, निगम चुनाव की आचार संहिता लागू होने पर फिर टल जाएगा शहर का मास्टर प्लान

सीजी न्यूज रिपोर्टर

दुर्ग -भिलाई का नया मास्टर प्लान मजाक बनकर रह गया है। पिछले 3 साल से दुर्ग-भिलाई और आसपास के सौ गांवों को जोड़कर नया मास्टर प्लान बनाने मंथन किया जा रहा है। अभी तक मास्टर प्लान बनाने का काम पूरा नहीं हुआ। सिर्फ बैठकें हो रही हैं। मास्टर प्लान के प्रस्तावों को कभी जनप्रतिनिधि नामंजूर कर रहे हैं तो कभी शासन खारिज कर रहा है। नया मास्टर प्लान 2011 से लागू होकर 2031 तक यानी 20 साल के लिए लागू होना था, लेकिन प्रशासनिक अफसरों की लापरवाही के कारण हाल ये है कि अभी तक नया मास्टर प्लान बनकर तैयार ही नहीं हुआ। सिर्फ बैठकें हो रही हैं। 5 साल से सिर्फ विचार मंथन और दिशा निर्देश देने के सिवा कोई काम नहीं हो रहा है।

गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू की अध्यक्षता में आज कलेक्टरेट सभाकक्ष में हुई बैठक में गृहमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक नालों और तालाबों का संरक्षण किया जाए। कोई भी नहर बंद न हो। तालाब में पानी आना बंद न हो। उन्होंने आवासीय बसाहटों के अंतर्गत शहरी क्षेत्रों में उद्यान निर्माण का कार्य को मास्टर प्लान में शामिल करने पर जोर दिया। उन्होंने सड़कों के किनारे वृक्षारोपण को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान देने कहा है।

अब जरा शहर पर नजर डालें तो पता चलेगा कि

  1. खुद नगर निगम प्रशासन ने कर्मचारी नगर तक आवागमन के लिए अतिक्रमण हटाने की बजाय नहर को पूरी तरह पाटकर सड़क बना दी। उरला के तालाबों को भरने वाली जरूरी नहर का कहीं अता-पता नहीं है।
  2. साइंस कालेज के पास नहर को रेलवे प्रशासन ने पाट दिया जिसे पिछले साल खुलवाया गया। गर्मी में तालाब भरने के बाद रेल प्रशासन हर साल नहर को पाट देता है।
  3. तालाबों का संरक्षण करने की बजाय नगर निगम के अफसरों ने तालाबों के बगल में टायलेट का निर्माण कर निकासी सीधे तालाबों में कर दी।
  4. तालाब पार की जमीन घेरकर बने मकानों की नालियों का पानी तालाबों में भर रहा है। यानी निस्तारी तालाब गटर बन चुके हैं। अफसरों की देखरेख में कई साल से ये लापरवाही हो रही है।
  5. आवासीय बसाहटों में लगभग आधे से ज्यादा वार्डों में गार्डन के लिए जगह छोडी गई है लेकिन तीन चार वार्डों के उद्यानों को छोड़कर बाकी वार्डों में गार्डन की जगह पर अतिक्रमण हैं। नगर निगम ने गार्डन के लिए छोड़ी जमीन का रखरखाव नहीं किया। कई वार्डों में गार्डन की जगह पर असामाजिक तत्वों का कब्जा है।
  6. भिलाई शहर में रिसाली से रुआंबांधा और बोरसी एरिया में तालाबों को भरने वाली नहर में बेशुमार कब्जे हैं। इन कब्जों को हटाने के लिए जल संसाधन विभाग के अफसरों के साथ दोनों नगर निगमों के अफसरों ने कई बार नोटिस जारी की। हर बार नोटिस जारी करने के सिवा कोई काम नहीं हुआ। लोगों के कब्जे नहीं तोड़े गए।दूसरे शहरों का मास्टर प्लान बन चुका, दुर्ग भिलाई का का प्लान पेंडिंग – सांसद

बैठक में सांसद विजय बघेल ने कहा कि पूरे प्रदेश में दूसरे शहरों का मास्टर प्लान तैयार हो चुका है। दुर्ग-भिलाई का मास्टर प्लान लंबित है। नया मास्टर प्लान शीघ्र तैयार किया जाना चाहिए। प्रस्तावित मास्टर प्लान में लोगांे की आवश्यकता और जरूरत के हिसाब से हर प्रकार की सुविधा होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि जिनके पास 4 पहिया वाहन है, उसे अपने स्वामित्व की भूमि पर गैरेज का निर्माण करना चाहिए, ताकि सड़कों पर अनावश्यक यातायात दबाव व अव्यवस्था ना हो। उन्होंने छत्तीसगढ़ शासन द्वारा 5 डिसमिल से कम जमीन की रजिस्ट्री लागू करने के फैसले की सराहना की।

बैठक में विधायक विद्यारतन भसीन, जिला पंचायत अध्यक्ष माया बेलचंदन, दुर्ग नगर निगम की महापौर चन्द्रिका चन्द्राकर, भिलाई-चरौदा की महापौर चन्द्रकांता माण्डले, मास्टर प्लान में शामिल नगरीय निकायों के अध्यक्ष और प्रभावित ग्राम पंचायतों के सरपंच उपस्थित थे।