Breaking News

Top News

जापानी खाएंगे छत्तीसगढ़ का अलसी, धनिया, काजू, मसूर, क्रेता-विक्रेता सम्मेलन में हुआ अनुबंध

Share Now

221

जशपुर, बस्तर, रायगढ और खैरागढ़़ में हो रही है पैदावार, किसानों को मिलेगा लाभ

छत्तीसगढ़ का अलसी, धनिया, काजू और मसूर खाएंगे जापानी। जी हां, यह सच है। रायपुर में क्रेता-विक्रेता सम्मेलन में  18 मीट्रिक टन काजू, 10 मीट्रिक टन धनिया, अलसी और 40 मीट्रिक टन मसूर दाल का अनुबंध किया है। अनुबंध होने से प्रदेश के काजू, अलसी उत्पादक किसान बेहद खुश हैं। किसानों को उम्मीद है कि भविष्य में उन्हें और आर्डर मिलेगा। इससे वे उत्पादन बढ़ाकर आमदनी बढ़ाएंगे।

222

विश्व के बेहद विकसित देशों में शामिल जापान में टेक्नॉलॉजी के क्षेत्र में काफी आगे है लेकिन कृषि उत्पादन के मामले में जापान आत्मनिर्भर नहीं है। कृषि भू-भाग ज्यादा न होने के कारण जापान में सीमित स्तर पर फसल उत्पादन होता है। जापान में रहने वाले भारतीयों के लिए कई भारतीय रेस्टॉरेंट हैं। भारतीय मूल के नागरिकों के अलावा जापानी भी यहां भोजन करते हैं। वहां रहने वाले योगेश शर्मा, श्याम सिंह क्रेता-विक्रेता सम्मेलन में शामिल होने पहली बार छत्तीसगढ़ आए और छत्तीसगढ़ में पैदा होने वाले काजू को जापान के मार्केट तक पहुंचाने 18 टन काजू का अनुबंध किया।

श्याम सिंह जापान में खाद्य सामग्री का व्यापार करते हैं। सरताज को डॉट लिमिटेड के माध्यम से खाद्यान्न सामग्री की  ऑनलाइन बिक्री करते हैं। यहां हुए सम्मेलन में उत्पादों को देखने के बाद क्वालिटी अच्छी लगी। जैविक उत्पाद होने के  कारण इसकी डिमांड है। जापान में काजू का उत्पादन बहुत कम है। छत्तीसगढ़ से काजू जाने के बाद यह जापानियों को बहुत पसंद आएगी। योगेश शर्मा ने बताया कि 10 मीट्रिक टन धनिया, अलसी और 40 मीट्रिक टन मसूर दाल के लिये भी अनुबंध किया गया है।

223

जशपुर, बस्तर, रायगढ़ में हो रहा काजू का उत्पादन
काजू उत्पादन में छत्तीसगढ़ की पहचान राष्ट्रीय स्तर लगातार बढ़ रही है। जशुपर, बस्तर और रायगढ़ क्षेत्रों में काजू के पौधे बड़े भू भाग में लगाए गए हैं। जशपुर में लगभग 7 हजार हेक्टेयर में काजू के पौधे लगाए गए हैं। इसमें से 15 सौ हेक्टेयर में उत्पादन हो रहा है। बस्तर में 20 हजार हेक्टेयर में काजू की फसल है। जशपुर के ग्रान प्लस आदिवासी सहकारी समिति, बस्तर के ग्रामोत्थान सेवा समिति, रायगढ़ के मॉ कैश्यू प्रोसेसिंग यूनिट से अलग-अलग छह-छह मीट्रिक टन का अनुबंध हुआ है।

खैरागढ़ का किसान नोहर सिंह खुश, जापानी लेंगे एक टन अलसी
खैरागढ़ के ग्राम हरदी के किसान नोहर सिंह जंघेल गन्ना, चना, धान की फसल के साथ कई साल से अलसी का उत्पादन कर रहे हैं। नोहर ने बताया कि जापान के व्यवसायी से अनुबंध हुआ है। हर सीजन में वे एक टन अलसी खरीदेंगे। सामान्य अलसी की कीमत 45 रूपये प्रति किलो है। जैविक खेती से उत्पन्न अलसी का मूल्य 80 से 90 रूपए है। जापान के व्यापारी को 220 रूपए प्रतिकिलो में अलसी देने का अनुबंध हुआ है। हैदराबाद के व्यापारी से 200 रूपए प्रति किलो में अलसी की बिक्री करेंगे।