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डेढ़ सौ करोड़ के अमृत मिशन प्रोजेक्ट में ठेका कंपनी की लापरवाहियों पर नगर निगम मेहरबान क्यों ? हर वार्ड में काम अधूरा छोड़ा, फिर भी सत्तापक्ष और निगम अफसरों ने साधा मौन

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22 मई को ढह गया था स्लैब, पर नोटिस के सिवा किसी पर भी कार्रवाई नहीं हुई

 नगर निगम में डेढ़ सौ करोड़ की लागत से चल रहे अमृत मिशन प्रोजेक्ट के काम में जबर्दस्त लापरवाही के बावजूद निगम का सत्तापक्ष और अफसरशाही ने चुप्पी साध रखी है। ठेका कंपनी ने अधिकांश वार्डों में काम अधूरा छोड़ रखा है। सड़कें खोदकर पाइपलाइन बिछाने का काम अधूरा छोड़ने से सड़कें ऊबड़खाबड़ हो गई हैं। कई वार्डों में पाइपलाइन बिछाने का काम डेढ़ साल पहले शुरू हुआ लेकिन अभी तक काम अधूरा है। इन वार्डों में पानी सप्लाई शुरू नहीं हो पाई है। पाइपलाइन बिछाने खोदे गए गड्‌ढे की गहराई को लेकर पहले भी कंपनी शक के घेरे में है। जांच हुई तो मिशन का काम देखने वाले कई अफसर नपेंगे, यह तय है।

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पद्मनाभपुर में पाइपलााइन की मरम्मत के दौरान रबर ट्यूब से पाइप को कवर करने की फोटो और रिकॉर्डिंग के बावजूद अफसरों ने कंपनी को क्लीन चिट दे दी।

शहर में 20 महीने पहले पानी सप्लाई करने अमृत मिशन प्रोजेक्ट शुरू किया गया। लक्ष्मी कंस्ट्रक्शन कंपनी ने बिना प्लान बनाए वार्डों में पाइपलाइन बिछाने का काम शुरू किया। काम की सुस्त रफ्तार के कारण अधिकतम वार्डों में अमृत मिशन  का पानी अभी तक सप्लाई नहीं हो पा रहा है। एग्रीमेंट के तहत कंपनी को 2020 तक काम पूरा करना है। हालत ये है कि शहर के 60 वार्डों में किसी भी भी वार्ड में सौ फीसदी काम पूरा नहीं हुआ है।

देखिए, कंपनी पर निगम अफसर इतने मेहरबान 

1- निगम प्रशासन कंपनी पर इतना मेहरबान रहा है कि शुरुआती दौर में जब कंपनी ने सिर्फ 6 करोड़ का काम किया था, तब कंपनी को 30 करोड़ का भुगतान एडवांस में किया जा चुका था। इस मामले में कई बार मीडिया में सवाल भी किए गए पर बाद में पूरे मामले में लीपापोती कर दी गई।

2- कंपनी पर दूसरी बार नगर निगम की मेहरबानी का पता तब चला जब ट्रांसपोर्ट नगर (करहीडीह) में ओवरहेड टंकी के निर्माण के दौरान स्लैब ढह गया। 22 मई को स्लैब ढहने के बाद तत्कालीन कमिश्नर ने कंपनी प्रबंधन और निगम अफसरों को शोकाज नोटिस जारी किया लेकिन नोटिस के बाद पूरा मामला रफा दफा कर दिया गया। इस मामले में शुरुआती जांच में लापरवाही और क्वालिटी खराब होने के साथ काम की मॉनिटरिंग न होने का खुलासा हुआ था। इसके बावजूद किसी भी अफसर या कंपनी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

3- हाल ही में एक और मामले में निगम अफसर कंपनी की वकालत करते नजर आए। पद्मनाभपुर में बिछाई गई पाइपलाइन फूटने से मरम्मत का काम शुरू किया गया। पाइपलाइन में रबर ट्यूब बांधकर कामचलाऊ मरम्मत होने पर स्थानीय नागरिकों ने वीडियो रिकॉर्डिंग कर ली। वीडियो बनते देख कंपनी की पोल खुलने के डर से स्टॉफ ने रबर ट्यूब हटा दिया और रातोंरात मैकेनिकल जाइंट से मरम्मत कर दिया। इसके बाद निगम अफसरों ने जांच के बहाने कंपनी की वकालत शुरू कर दी। गड्‌ढा खुदवाकर बताया गया कि रबर ट्यूब नहीं है। अफसरों ने साफ कह दिया कि अमृत मिशन प्रोजेक्ट को लेकर झूठी और बेबुनियाद शिकायतें की जा रही है।

शुरू से मिल रही है शिकायतें  

आपको बता दें कि अमृत मिशन प्रोजेक्ट के कामकाज में लापरवाही और भ्रष्टाचार को लेकर शुरू से शिकायतें मिलती रही हैं। ठेका कंपनी की लापरवाही के साथ-साथ प्रोजेक्ट के प्रभारी रहे निगम इंजीनियरों पर भी लापरवाही की शिकायतें मिली। प्रोजेक्ट की मॉनिटरिंग करने वाली स्वतंत्र एजेंसी पीडीएमसी के अफसरों की लापरवाही उजागर हो चुकी है। इसके बावजूद प्रोजेक्ट के किसी भी काम की न निगम अफसर मॉनिटरिंग कर रहे हैं, न पीडीएमसी के अफसर। मटेरियल, निर्माण कार्य और तकनीकी कार्यों की गुणवत्ता क्या होगी? यह निगम अफसर या पीडीएमसी के इंजीनियर तय नहीं करते। कंपनी का स्टॉफ ही सर्वेसर्वा है। निगम अफसर सिर्फ बिल बनाते हैं।

इंच टेप से गड्‌ढे की गहराई नाप कर विधायक दिखा चुके हैं गड़बड़ी

विधायक अरूण वोरा ने इस प्रोजेक्ट में चल रही गड़बड़ी को लेकर कई बार गंभीर शिकायतें की हैं। पाइपलाइन बिछाने के काम में हो रही गड़बड़ी दिखाने के लिए वोरा ने खोदे गए गड्‌ढे की नापजोख कर निगम अफसरों को आईना दिखा दिया। कंपनी को एक से डेढ़ मीटर गड्‌ढा खोदने का बिल भुगतान किया जा रहा है जबकि ज्यादातर वार्डों में सिर्फ दो फीट गहरा गड्‌ढा खोदा गया। बिल 4 से 6 फीट का बनाया गया।

स्लैब ढहने पर इन्हें मिली थी नोटिस, पर कार्रवाई नहीं हुई

स्लैब ढहने के मामले में अमृत मिशन के तत्कालीन नोडल अधिकारी व प्रभारी ईई आरके पांडेय, सहायक नोडल अधिकारी आरके जैन और सब इंजीनियर अंकुर अग्रवाल के साथ लक्ष्मी कंस्ट्रक्शन एजेंसी को शोकाज  नोटिस जारी किया गया था।  24 घंटे में जवाब मांगा गया। ओवरहेड टंकी का स्लैब ढहने के बावजूद जिम्मेदार और दोषी अफसरों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। कंपनी पर शुरू से मेहरबान रहे निगम प्रशासन ने स्लैब ढहने के मामले में भी कोई कार्रवाई नहीं की।

वर्जन

अमृत मिशन प्रोजेक्ट को लेकर शुरू से शिकायतें मिल रही हैं। इसके बावजूद निगम प्रशासन ने ठोस कार्रवाई नहीं की। पाइपलाइन बिछाने के लिए कम गहरा गड्‌ढा खोदना, गड्‌ढा खोदने के बाद महीनों तक काम पूरा न करना, स्लैब ढहने के बावजूद कंपनी और अफसरों पर कार्रवाई न होना यह दिखाता है कि प्रोजेक्ट किस तरह चल रहा है। डेढ़ सौ करोड़ के प्रोजेक्ट में हो रही लापरवाही और क्वालिटी को लेकर विधायक अरूण वोरा कई बार शिकायत कर चुके हैं। यह शोध का विषय है कि ठेका लेने वाली एजेंसी के खिलाफ निगम प्रशासन इतना मेहरबान क्यों है?

राजेश शर्मा,

पार्षद, पूर्व नेता प्रतिपक्ष, नगर निगम दुर्ग