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देश के 14 राज्यों के अफसरों ने किया नरवा, गरुवा, घुरवा, बाड़ी का अध्ययन

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देश के 14 राज्यों के वन विभाग के अफसरों ने नरवा, गरुवा, घुरुवा और बाड़ी योजना का अवलोकन किया। योजना की बारीकी से जानकारी ली। ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए नरवा-घुरुवा योजना को बेहद कारगर बताते हुए दूसरे राज्यों से आए अफसरों ने इस योजना को लेकर काफी दिलचस्पी दिखाई। अफसरों को बताया गया कि नरवा-गरुवा योजना से न सिर्फ स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण व संवर्धन होगा बल्कि स्थानीय जनता को आजीविका का साधन भी उपलब्ध होगा।

राज्य वन अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान, रायपुर में भारतीय वन सेवा के उच्चाधिकारियों के लिए ‘‘सतत् मानव विकास में वानिकी का योगदान’’ विषय पर दो दिवसीय अखिल भारतीय अनिवार्य प्रशिक्षण कार्यशाला में 14 राज्यों के अफसर शामिल हुए। समापन से पहले आज योजना के तहत हो रहे कार्यों का अवलोकन कराया गया। प्रशिक्षण में तमिलनाडू, त्रिपुरा, महाराष्ट्र, झारखण्ड, गुजरात, केरल, मणिपुर, मेघालय, मध्यप्रदेश, असम, उत्तराखण्ड, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक तथा उड़ीसा के  22 भारतीय वन सेवा के उच्चाधिकारी शामिल हुए।

कार्यशाला में वानिकी संबंधी महत्वपूर्ण तकनीकी सत्रों के साथ-साथ प्रदेश में वानिकी के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों तथा छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी योजना छत्तीसगढ़ के चार चिन्हारी, नरवा, गरूवा, घुरवा, बाड़ी- ऐला बचाना है संगवारी का अध्ययन भी कराया गया। समापन सत्र में मनरेगा के आयुक्त एवं सचिव टीसी महावर ने कहा कि मानव विकास के लिए वानिकी की महत्वपूर्ण भूमिका है। छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में 44 प्रतिशत वन आच्छादित क्षेत्र है और 33 प्रतिशत जनजातियां निवास करती हैं। वनों से प्राप्त वनोपजों और अन्य वस्तुओं से न केवल स्थानीय लोगों की जरूरत पूरी होती है बल्कि उनकी आजीविका का आधार भी है।