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चुनाव से पहले नगर निगम की आखिरी सामान्य सभा में जमकर हंगामा, अमृत मिशन प्रोजेक्ट को लेकर अफसरों की मनमानी पर विपक्षी पार्षद बिफरे, सत्तापक्ष ने भी अफसरों को घेरा

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  • 7 करोड़ की लागत से 4 ओवरहेड टंकियों के निर्माण का प्रस्ताव सामान्य सभा में लाए बिना अफसरों ने जारी कर दिया टेंडर
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सामान्य सभा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के पार्षदों के बीच कई बार तीखा विवाद हुआ।

नगर निगम की सामान्य सभा में अमृत मिशन प्रोजेक्ट को लेकर जमकर हंगामा मचा। नगर निगम की अंतिम सामान्य सभा के अंत में पार्षदों ने ग्रुप फोटोग्राफी कराई लेकिन इससे पहले कई मुद्दों पर कांग्रेस भाजपा के पार्षद आपस में भिड़ते रहे। अमृत मिशन प्रोजेक्ट के तहत स्वीकृत चार ओवरहेड टंकियों के निर्माण का प्रस्ताव एमआईसी या सामान्य सभा में लाए बिना टेंडर निकालने का मुद्दा पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेश शर्मा ने उठाया। विपक्षी पार्षदों के अलावा सत्तापक्ष ने भी इस मामले में अफसरों को घेरा।

राजेश शर्मा ने कहा कि पहले ओवरहेड टंकियों के रेनोवेशन का प्रस्ताव था। निगम प्रशासन ने अचानक चार ओवरहेड टंकियों के निर्माण करने टेंडर जारी कर दिया। सामान्य सभा में इस संबंध में प्रस्ताव पारित किया जाना चाहिए था। यह प्रक्रिया अपनाए बिना ही सीधे टेंडर कर दिया गया। उनकी आपत्ति के दौरान ही जलकार्य विभाग के एमआईसी मेंबर देवनारायण चंद्राकर ने यह कहकर सदन को चौंका दिया कि उन्हें भी टंकी निर्माण की जानकारी नहीं है। इस मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ।

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अमृत मिशन को लेकर उठे सवालों के दौरान निगम अफसर काफी परेशान रहे। महापौर सहित सत्तापक्ष के पार्षदों के पास भी सवालों का जवाब नहीं था।

बाद में निगम कमिश्नर इंद्रजीत बर्मन ने सफाई देते हुए सदन को बताया कि राज्य शासन का आदेश 27 सितंबर को मिला जिसके तहत टेंडर किया गया है। इस पर सत्तापक्ष और विपक्षी पार्षदों ने कहा कि शासन का आदेश जारी होने के बाद आनन फानन में टेंडर कैसे कर दिया गया। इसकी जानकारी देते हुए एमआईसी और सामान्य सभा में प्रस्ताव पारित क्यों नहीं लाया गया। पार्षदों ने इस मामले को लेकर दोषी अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की।

इसी दौरान सांसद और विधायक निधि से स्वीकृत विकास कार्यों को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के पार्षदों के बीच जमकर हंगामा हुआ। एमआईसी सदस्य विजय जलकारे ने आरोप लगाया कि बस स्टॉप शेड निर्माण के लिए एक निजी  कंपनी को ठेका दिया गया है। इसके बावजूद राज्यसभा सांसद व विधायक निधि से बस स्टॉप निर्माण की स्वीकृति दीजा रही है। यह सांसद और विधायक की निधि का दुरुपयोग है। इसी दौरान एमआईसी सदस्य दिनेश देवांगन ने विधायक अरुण वोरा पर जनता के पैसे का दुरुपयोग करने का आरोप लगा दिया। इसके बाद सदन में काफी शोर शराबा होने लगा। दोनों पक्षों के पार्षद आमने सामने आ गए।

कांग्रेस पार्षदों ने कहा कि नगर निगम का सत्तापक्ष राज्यसभा सांसद मोतीलाल वोरा और विधायक अरूण वोरा की निधि से स्वीकृत कार्यों को रोकने का प्रयास कर रहे हैं। करीब 80 विकास कार्यों को जानबूझकर रोका गया है। सत्तापक्ष को शहर के विकास की चिंता नहीं है। काफी हंगामे के बाद यह मामला शांत हुआ। बैठक में रायपुर नाका मुक्तिधाम के पास नवनिर्मित दुकान क्रमांक 1 व 4 और तकिया पारा व सदर नाका की दुकानों के आवंटन को स्वीकृति दी गई। बैठक में आपापुरा वार्ड क्रमांक 31 का नया नामकरण करते हुए लंगूरवीर वार्ड करने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से मंजूर किया गया।

बैठक में विधायक अरुण वोरा भी काफी देर तक मौजूद रहे। निगम की अंतिम सामान्य सभा में महापौर चंद्रिका चंद्राकर, वरिष्ठ पार्षद आरएन वर्मा, नेता प्रतिपक्ष लिखन साहू, एमआईसी सदस्य दिनेश देवांगन, देवनारायण चंद्राकर, शिवेन्द्र परिहार, प्रकाश गीते, हमीद खोखर, राजकुमार वर्मा सहित अन्य पार्षद, निगम कमिश्नर इंद्रजीत सिंह बर्मन व अन्य अधिकारी-कर्मचारी मौजूद थे।