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1 नवम्बर को सोनिया गांधी करेंगी छत्तीसगढ़ राज्योत्सव का शुभारंभ, तीनों दिन रंग जमाएंगे छत्तीसगढ़ी कलाकार

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 पंडवानी, पंथी, करमा, सैला, सुआ, सरहुल और राउत नाचा के कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे छत्तीसगढ़िया कलाकार. गीत गजल की महफिल सजेगी, वाद्य यंत्रों के संगीत गूंजेंगे301.jpg

छत्तीसगढ़ राज्य के 20 वें स्थापना दिवस पर 1 नवंबर को शाम 7 बजे कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी राज्योत्सव का शुभारंभ करेंगी। 1 नवंबर से 3 नवम्बर तक साइंस कालेज मैदान, रायपुर में भव्य और गरिमामय राज्योत्सव का आयोजन किया जा रहा है। राज्योत्सव में छत्तीसगढ़ी लोक कला-संस्कृति की छटा बिखरेगी। छत्तीसगढ़ के लोकप्रिय शास्त्रीय नृत्य, वादन, गायन के साथ गीत-गजल व सुगम संगीत की महफिल भी सजेगी।

राज्योत्सव में पंडवानी गायन, पारम्परिक नृत्य पंथी, गेड़ी, गौरी-गौरा, राउत नाचा, करमा, सैला, गौर, ककसाड़, धुरवा, सुआ नृत्य, सरहुल नृत्य, सैला नृत्य, राउत नाच, और ककसार नृत्य का प्रदर्शन किया जाएगा। 1 नवंबर को राज्योत्सव का शुभारंभ होने के बाद 2 नवम्बर को समारोह की मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ की राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके होंगी।  राज्योत्सव का समापन 3 नवम्बर को मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के मुख्य आतिथ्य में सम्पन्न होगा।

इस साल राज्योत्सव में छत्तीसगढ़ राज्य के ही कलाकारों को प्रस्तुति के लिए आमंत्रित किया गया है। प्रतिदिन राज्य के अलग अलग अंचलों के पारंपरिक लोकनृत्यों की छटा के साथ ही पारंपरिक लोक गाथाओं की प्रस्तुति होगी। कार्यक्रम का आरंभ मांगलिक मोहरी वादन से होगा। इसके बाद छत्तीसगढ़ महतारी की वंदना गीत-अरपा पैरी के धार की प्र्रस्तुति होगी। फिर लोकनृत्यों का संगम होगा, जिसमें राज्य के विभिन्न अंचलों के लोक नर्तक दलों की प्रस्तुति होगी। पंडवानी गायन, रायगढ़ की कत्थक शैली में समूह नृत्य की प्रस्तुति के साथ रंगारंग लोकमंच के कार्यक्रम होंगे।
राज्योत्सव के दूसरे दिन सांस्कृतिक संध्या का आरंभ खंझेरी भजन से होगा। इसके बाद उत्तर छत्तीसगढ़ का सरहुल और सैला नृत्य, मध्य छत्तीसगढ़ का राउत नाच तथा दक्षिण छत्तीसगढ़ का ककसार नृत्य होगा। अल्फाज और आवाज गीत-गजलों के कार्यक्रम के बाद पियानो व एकार्डियन और वाद्यवृंद की प्रस्तुति होगी। ओड़िसी और भरतनाट्यम के अलावा पारंपरिक भरथरी गायन और सरगुजिहा गीत प्रस्तुत किए जाएंगे। लोकमंच के साथ कार्यक्रम का समापन होगा।
राज्योत्सव की तीसरी सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत छत्तीसगढ़ी सुगम गायन से होगा। इस दिन पूर्वी छत्तीसगढ़ का करमा, उत्तरी छत्तीसगढ़ का लोहाटी बाजा, दक्षिण छत्तीसगढ़ का गेड़ी नृत्य और मध्य छत्तीसगढ़ का पंथी नृत्य होगा। इसके अलावा कठपुतली का कार्यक्रम, कबीर सूफी गायन होगा। वाद्यवृंद में तालकचहरी और सेक्सोफोन व गिटार की प्रस्तुति होगी। पारंपरिक लोक गायन ढोलामारू के बाद कार्यक्रम की समाप्ति लोकमंच से होगी।