Breaking News

Top News

पूरे प्रदेश में धूमधाम से मनाया गया छठ पर्व, उगते सूर्य को दिया अर्घ्य  

Share Now

छठ पूजा के मौके पर आज रविवार को सुबह से लोगों में उत्साह का माहौल रहा। भिलाई, दुर्ग, रायपुर, बिलासपुर सहित प्रदेश भर में छठ पर्व धूमधाम से मनाया गया। शनिवार की शाम को सूर्य को अर्घ्य देने के बाद लोगों ने रविवार को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया। इससे पहले शुक्रवार की शाम को खरना के बाद निर्जला व्रत शुरू हुआ था जो आज शनिवार की रात भी जारी रहा। छठ मइया की पूजा का व्रत 36 घंटे निर्जला रखा जाता है जो काफी कठिन माना जाता है। छठ पर्व के दौरान शहर के प्रमुख तालाबों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुटे और भक्ति भाव के साथ भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया। इस दौरान जगह-जगह आतिशबाजी की गई।

38

मुख्यमंत्री छठ महापर्व में शामिल हुए, सूर्य मंदिर में पूजा अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख समृद्धि के लिए मांगा आशीर्वाद

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आज रायपुर स्थित महादेव घाट के अलावा बीरगांव और हीरापुर में आयोजित छठ महापर्व में शामिल होकर उत्तर भारतीय और भोजपुरी समाज सहित प्रदेशवासियों को छठ महापर्व की बधाई और शुभकामनाएं दी। उन्होंने छठ पूजा आयोजन समिति महादेव घाट के लिए उत्तर भारतीय और भोजपुरी समाज को सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यो के लिए भूमि प्रदान करने की घोषणा की। समारोह स्थल पर भोजपुरी लोक गायिका सुश्री देवी ने छठ मइया की आराधना पर आधारित भजनों की शानदार प्रस्तुति दी

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के बाद छत्तीसगढ़ में छठ महापर्व पर अवकाश की घोषणा हुई। आपकी खुशी में भागीदार बनकर मुझे खुशी हो रही है। राजधानी रायपुर सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों में रहने वाले उत्तर भारतीय और भोजपुरी समाज के लोग श्रद्धापूर्वक छठ महापर्व मना रहे हैं। यह पर्व हिन्दुस्तान में ही नहीं दुनिया के अनेक देशों में मनाया जा रहा है। इस पर्व में माताओं और बहनों द्वारा कठिन तपस्या कर परिवार की बेहतरी और सुख-समृृद्धि के लिए छठ मइया की पूजा की जाती है। उन्होंने माताओं-बहनों और सभी व्रतियों को बधाई और शुभकामनाएं दी।

35

आतिशबाजी होती रही, गूंजते रहे छठ मइया के गीत – दुर्ग शहर के ठगड़ा बांध, दीपक नगर स्थित रेवा तालाब, शीतला तालाब, शक्ति नगर तालाब, कातुलबोड सहित अन्य तालाबों के पार में प्रकाश व्यवस्था की गई थी। श्रध्दालुओं के अलावा जनप्रतिनिधियों के साथ अन्य समाजों के लोग भी छठ मइया की पूजा में शामिल हुए। छठ पूजा में सांसद विजय बघेल, विधायक अरूण वोरा, महापौर चंद्रिका चंद्राकर, एमआईसी मेंबर विजय जलकारे, शिवेंद्र परिहार, पार्षद अरूण सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधि शामिल हुए।

32.jpg

शहर के ठगड़ा बांध में श्रद्धापूर्वक छठ पर्व मनाया गया। विधायक अरूण वोरा ने श्रद्धालुओं को छठ पर्व की बधाई दी। इस दौरान वरिष्ठ पार्षद राजेश शर्मा, प्रकाश गीते सहित ठगड़ा बस्ती के नागरिक मौजूद थे। वार्ड नंबर 23 दीपक नगर स्थित रेवा तालाब में छठ पर्व धूमधाम से मनाया गया। डूबते व उगते सूर्य को अर्ध्य दिया गया। भक्ति संगीत के बीच लगातार आतिशबाजी होती रही।

31.jpg

श्रद्धालुओं ने तालाब के पानी में खड़े होकर उगते सूरज को अर्घ्य दिया। रेवा तालाब में श्रद्धालुओं को बधाई देने दुर्ग के सांसद विजय बघेल, विधायक अरुण वोरा, महापौर चंद्रिका चंद्राकर शामिल थे। वार्ड पार्षद विजय जलकारे, तेज बहादुर सिंह, विनोद मून, संजय सिंह, राजेश सिंह, मुन्ना सिंह, विनोद सिंह, रंजय सिंह, सियाजी सिह, देव कुमार सिंह, गणेश सिंह, बबलू सिंह, अरविंद सिंह, संतोष सिंह, सुनील सिंह के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

39

सभी प्रांतों के लोग मनाते हैं छठ पर्व – छठ पर्व , छठ या षष्ठी पूजा कार्तिक शुक्ल पक्ष के षष्ठी को मनाया जाने वाला एक हिंदू पर्व है। सूर्योपासना का यह अनुपम पर्व मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और नेपाल के तराई क्षेत्रों में मनाया जाता है। बिहार में यह पर्व सबसे ज्यादा धूमधाम से मनाया जाता है। अब अन्य प्रांतों के लोग भी धूमधाम से मनाने लगे हैं। प्रवासी भारतीयों के साथ-साथ विश्व भर में यह पर्व पूरे श्रध्दा और भक्ति के साथ मनाया जाने लगा है। यह पर्व वैदिक आर्य संस्कृति की झलक दिखलाता है। ऋग्वेद में सूर्यपूजन उषा पूजन और आर्य परंपरा के अनुसार यह पर्व मनाया जाता है। छठ पूजा सूर्य, उषा, प्रकृति, जल, वायु और उनकी बहन छठी मइया को समर्पित है।

सूर्य को अर्घ्य देने का महत्व

  • छठ मइया देती हैं संतान प्राप्ति का आशाीर्वाद

मान्यता है कि छठ मइया का पवित्र व्रत रखने से सुख और शांति की प्राप्ति होती है। यश, पुण्य और कीर्ति का उदय होता है। दुर्भाग्य समाप्त हो जाते हैं। निसंतान दंपति को संतान की प्राप्ति होती है।

  • सूर्यदेव देते हैं निरोग का वरदान

सूर्यदेव सभी प्राणियों पर समान रूप से कृपा करते हैं। वे किसी तरह का भेदभाव नहीं करते। सूर्यदेव प्रत्यक्ष दिखाई देते हैं और सभी प्राणियों के जीवन के आधार हैं। वैदिक काल से पहले से उनकी पूजा होती आई है। भगवान सूर्य अपने उपासक को आयु, आरोग्य, तेज, यश, वैभव और सौभाग्य का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। भगवान सूर्य की उपासना से रोगों से मुक्ति मिल जाती है। इस त्योहार में सूर्यदेव के साथ छठ मैय्या की पूजा की जाती है। प्रकृति देवी के छठे अंश को देवसेना कहा गया है। इसके कारण देवी का प्रचलित नाम षष्ठी है। षष्ठी देवी को ब्रह्मा की मानसपुत्री भी कहा गया है। पुराणों में देवी का नाम कात्यायनी भी है। षष्ठी देवी को ही स्थानीय बोली में छठ मैय्या कहा जाता है।