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किसानों को धान का बोनस देने पर केंद्र का प्रतिबंध, प्रदेश का धान लेने से भी इंकार किया, सीएम ने आज बुलाई तीन बड़ी बैठक, प्रदेश के सांसदों, राजनीतिक दलों और किसान संगठनों के साथ करेंगे नए हालात पर मंथन 

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केंद्र सरकार के खिलाफ गांव-गांव में फूटने लगा गुस्सा, दिल्ली जाकर प्रदर्शन करने तैयार हैं किसान

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धान खरीदी को लेकर केंद्र सरकार के बदले तेवर से प्रदेश के किसान खफा हैं। छत्तीसगढ़ के शांत रहने वाले किसानों का गुस्सा पहली बार फूट रहा है। केंद्र सरकार ने अचानक धान खरीदी पर बोनस देने पर प्रतिबंध लगा दिया है। सेंट्रल पूल का चावल खरीदने से भी केंद्र ने इंकार कर दिया है। इन मामलों को लेकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कई बार प्रधानमंत्री कार्यालय को चिट्‌ठी भेजी है। दो बार पीएम से मिलने का समय भी मांगा। न तो प्रधानमंत्री से मिलने का समय मिला, न बोनस पर रवैये में कोई बदलाव आया। गुस्साए किसान दिल्ली कूच करने की तैयारी कर रहे हैं।

यह मुद्दा कितना गंभीर है, इसका अंदाज इसी बात से लगा सकते हैं कि मुख्यमंत्री ने आज 5 नवंबर को सिर्फ इसी मुद्दे पर विचार मंथन करने तीन बड़ी बैठक बुलाई है। 5 नवम्बर को मंत्रालय (महानदी भवन) में पहली बैठक में राज्य के सभी लोकसभा और राज्यसभा सांसदों को आमंत्रित किया गया है। दूसरी बैठक सर्वदलीय होगी जिसमें सभी राजनीतिक दलों के पदाधिकारी शामिल होंगे। तीसरी बैठक में मुख्यमंत्री प्रदेश के किसान संघों के पदाधिकारियों के साथ इस विषय पर चर्चा करेंगे।

जाहिर है, इन बैठकों के बाद केंद्र सरकार के खिलाफ बड़े आंदोलन का सूत्रपात होगा। प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने इसकी तैयारी भी शुरू कर दी है। आज से केंद्र सरकार के खिलाफ किसान विरोधी रणनीति के विरोध में हर जिला मुख्यालय में बैठकों का दौर शुरू हो गया है। रणनीति बनाई जा रही है। किसानों के हित में ब्लाक, जिला और प्रदेश स्तरीय धरना प्रदर्शन का टाइमटेबल तैयार कर जिला व ब्लाक कांग्रेस कमेटियों को भेजा जा चुका है। किसानों से पीएम के नाम पत्र लिखने की अपील के साथ कांग्रेसी गांवों में जाकर केंद्र के रवैये की जानकारी दे रहे हैं।

बोनस पर मोदी सरकार का रवैया ऐसे बदलता रहा

2013 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने किसानों का धान 21 सौ रुपए प्रति क्विंटल की दर से खरीदने और 3 सौ रुपए प्रति क्विंटल बोनस देने का वादा किया था। इस मुद्दे पर भाजपा विधानसभा चुनाव जीत गई। 2014 में केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी। केंद्र सरकार ने बोनस देने पर प्रतिबंध लगा दिया। मोदी सरकार के प्रतिबंध के कारण 2014-15, 2015-16, 2016-17 में धान का बोनस नहीं दिया जा सका। केंद्र सरकार के प्रतिबंध के बाद राज्य सरकार के लिए बोनस वितरण करना संभव नहीं है। 2018 में विधानसभा चुनाव को देखते हुए मोदी सरकार ने कई माह पहले बोनस से प्रतिबंध हटा दिया। चुनाव में करारी पराजय के बाद अब मोदी सरकार ने फिर से प्रदेश के किसानों को बोनस देने पर प्रतिबंध लगा दिया है।

किसानों की उम्मीदों पर केंद्र सरकार ने पानी फेरा, किसान भड़के

पिछले साल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 25 सौ रुपए प्रति क्विंटल की दर से किसानों का धान खरीदने का वादा किया और चुनाव जीतने के बाद इसे पूरा भी किया। छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बना जहां किसानों को धान की इतनी ज्यादा कीमत मिली। नतीजा ये रहा कि देशव्यापी मंदी के बावजूद छत्तीसगढ़ में किसान खुशहाल रहे। ऑटोमोबाइल सेक्टर में पूरे देश में चिंताजनक स्थिति रही वहीं प्रदेश में वाहनों की जमकर खरीदी हुई। दीपावली में भी मार्केट में मंदी का असर नहीं दिखा। इस बार भी राज्य सरकार ने किसानों को धान का मूल्य 25 सौ रुपए प्रति क्विंटल देने की सभी तैयारियां पूरी कर ली लेकिन केंद्र सरकार के प्रतिबंध से स्थितियां बदल रही हैं। पिछले साल भूपेश सरकार की नीतियों से  खुशहाल किसानों की उम्मीदों पर केंद्र सरकार ने पानी फेर दिया है। गांव गांव में किसानों का गुस्सा फूटने लगा है।