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वोरा निवास में उमड़ने लगी टिकट के दावेदारों की भीड़, पैराशूट प्रत्याशी, कांग्रेस नेताओं के रिश्तेदारों को टिकट न देने की मांग उठी, भाजपा में अंतर्कलह बढ़ी

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छत्तीसगढ़ में अभी तक नगरीय निकाय चुनाव की विधिवत घोषणा नहीं हुई है, लेकिन शहर का सियासी पारा लगातार बढ़ता जा रहा है। सोशल मीडिया में टिकट की दावेदारी के साथ कांग्रेस-भाजपा के कद्दावर नेताओं के निवास पर भीड़ उमड़ने लगी है। टिकट के लिए राजनीतिक नेताओं के घर चक्कर काटने का दौर तेज हो गया है। वार्ड आरक्षण होने के कारण पैराशूट प्रत्याशी से लेकर रिश्तेदारों को टिकट वितरण का मुद्दा फिर गरमाने लगा है।

10 महीने पहले राज्य में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद टिकट के लिए सबसे ज्यादा मारामारी इसी पार्टी में मची है। दुर्ग शहर विधायक अरूण वोरा के निवास पर सभी 60 वार्डों के पार्षद पद के दावेदार अपने समर्थकों के साथ टिकट पर दावा ठोंक रहे हैं। टिकट वितरण की प्रक्रिया को लेकर भी रोज नए नए रोचक सुझाव दिए जा रहे हैं। कांग्रेस के वार्ड कार्यकर्ताओं का कहना है कि किसी भी हालत में वार्ड में पैराशूट प्रत्याशी न उतारा जाए। दूसरे वार्ड का प्रत्याशी न थोपा जाए।

कई पार्षद या कद्दावर नेता वार्ड आरक्षण के बाद अपनी पत्नी, माता या अन्य रिश्तेदारों की दावेदारी पर भी ज्यादातर कार्यकर्ता आपत्ति कर रहे हैं। आपको बता दें कि, वार्डों की आरक्षण प्रक्रिया के बाद कई दिग्गज वरिष्ठ पार्षदों के वार्ड आरक्षित हो गए हैं। चुनाव में अपने वार्ड से दावेदारी करने से वंचित होने के बाद अपने परिजनों के लिए टिकट की मांग कर रहे हैं। महापौर का चुनाव पार्षदों के द्वारा करने का फैसला होने के बाद महापौर के दावेदार कई दिग्गज कांग्रेसी भी अपनी सुविधा के अनुसार दूसरे वार्ड से टिकट की दावेदारी कर रहे हैं।

कार्यकर्ताओं के सुझाव से संबंधित सवालों पर विधायक अरुण वोरा ने साफ कहा है कि जमीनी कार्यकर्ताओं की किसी भी कीमत पर अनदेखी नहीं की जाएगी। सभी सुझाव और आपत्तियों पर चर्चा होगी। टिकट वितरण पर उन्होंने दो टूक जवाब देते हुए कहा कि स्क्रीनिंग कमेटी और प्रदेश नेतृत्व के सामंजस्य से वार्ड की जनता की भावनाओं के अनुरूप टिकट वितरण किया जाएगा। हर हाल में जीत दर्ज करने वाले दावेदार को टिकट मिलना चाहिए। इस कसौटी पर खरे उतरने वाले प्रत्याशी को टिकट मिलेगी।

भाजपा में बढ़ी अंतर्कलह

विधानसभा चुनाव में बुरी तरह पराजय के बाद लोकसभा में भाजपा की जीत हुई। दुर्ग सीट पर शानदार फतह दर्ज करने के बाद यह माना जा रहा था कि भाजपा नेताओं के बीच सामंजस्य बढ़ेगा। मगर यहां एकदम उलटा हो रहा है।भाजपा संगठन चुनाव में हाल ही में जिस तरह के घटनाक्रम हुए हैं, उससे तय हो गया है कि दो गुटों के बीच नए सिरे से खींचतान मचेगी। संगठन चुनाव में एकतरफा ढंग से चहेते लोगों को नियुक्त करने के मामले में भी जिला भाजपा के शीर्ष नेता आमने सामने हो गए हैं। देखना ये है कि अापसी लड़ाई बंद कर नगरीय निकायों की चुनावी तैयारी में भाजपा नेता कब जुटेंगे?