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दुर्ग में भाजपा संगठन चुनाव में अनियमितता की शिकायत, प्रदेश चुनाव प्रभारी रामप्रताप सिंह  और पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह से मिलकर बताया ऐसे हुई गड़बड़ी

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दुर्ग जिले में भाजपा संगठन चुनाव में हुई अनियमितताओं का मामला अब गरमाने लगा है। धमधा मंडल चुनाव और दुर्ग शहर के अंतर्गत पटरीपार मंडल के चुनाव में काफी विवाद की स्थिति रही। चुनाव में मनमाने तरीके से अध्यक्ष पद पर नियुक्ति करने की शिकायत प्रदेश भाजपा चुनाव प्रभारी रामप्रताप सिंह और पूर्व मुख्यमंत्री से की गई है। सांसद विजय बघेल से भी भाजपा कार्यकर्ताओं ने इस मामले की शिकायत की है। भाजपा नेताओं ने एकतरफा ढंग से हुई नियुक्तियों को निरस्त कर निष्पक्ष चुनाव कराने की मांग की है।

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सिकोलाभाठा मंडल चुनाव में गड़बड़ी, पूर्व मुख्यमंत्री से मिलकर नियुक्तियां रद्द करने की मांग की गई

एक अन्य शिकायत में सिकोलाभाठा मंडल चुनाव को लेकर अनियमितता की शिकायत की गई है। शिकायत में कहा गया है कि चुनाव अधिकारी और पर्यवेक्षकों ने अनियमितता बरतते हुए पहले चुनाव स्थगित किया। बाद में जिला कार्यालय में बैठकर मनमाने तरीके से अध्यक्ष की घोषणा कर दी। शिकायतकर्ता मनमोहन शर्मा ने बताया कि अध्यक्ष पद के लिए उनके अलावा कुल 17 लोगों ने नामांकन भरा।

9 दावेदारों ने मेरे समर्थन में नाम वापस ले लिया। एक अन्य  दावेदार के समर्थन में 5 लोगों ने नाम वापस लिया। एक अन्य दावेदार ने पार्टी के हित में नाम वापस लिया। इसके बाद चुनाव अधिकारी और पर्यवेक्षक ने एकपक्षीय कार्रवाई करने का प्रयास किया। पार्टी के सक्रिय और समर्पित कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध किया तो चुनाव स्थल पर माहौल खराब होने का हवाला देते हुए वहां से जाने लगे। पार्षद अरूण सिंह ने इस पूरे मामले की जानकारी सांसद विजय बघेल को दी। सांसद ने पर्यवेक्षक लाभचंद बापना से निष्पक्ष चुनाव कराने कहा।

बाफना ने कहा कि मनमोहन के पक्ष में पूरा समर्थन है. लेकिन इसकी घोषणा चुनाव अधिकारी कांतिलाल बोथरा ही कर सकते हैं। बाद में बोथरा ने कह दिया कि हमारी नेता का आदेश है कि घोषणा नहीं करना है। घोषणा प्रदेश से होगी। उनके ऐसा कहने पर कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी शुरू कर दी। बाद में जिला भाजपा कार्यालय में गलत तरीके से दूसरे व्यक्ति के नाम की घोषणा कर दी गई।

शिकायतकर्ताओं ने पटरीपार मंडल चुनाव में हुई अनियमितता को गंभीरता से लेते हुए निर्वाचन प्रक्रिया को अवैध करार देने की मांग की है। शिकायतकर्ताओं ने कहा है कि नए सिरे से मंडल अध्यक्ष का चुनाव कराया जाना चाहिए। शिकायत करने वालों में मनमोहन शर्मा, पार्षद अरुण सिंह, शंकर दमाहे, मंडल उपाध्यक्ष गुरदीप सिंह, कैलाश प्रजापति, पूर्व एल्डरमैन उमेश यादव, संतोष यादव, राहुल साहू, रतनदीप सिंह, कीर्तन साहू सहित अन्य लोग शामिल हैं।

कांग्रेस का काम करने वाले को बनाया धमधा मंडल अध्यक्ष

प्रदेश चुनाव प्रभारी राम प्रताप सिंह से शिकायत में कहा गया है कि 2 नवंबर को धमधा मंडल का चुनाव हुआ जहां चुनाव प्रभारी नजरूद्दीन खोखर, पर्यवेक्षक कांतिलाल जैन उपस्थित थे। सह निर्वाचन अधिकारी लुकेश बघेल वहां मौजूद नहीं थे। चुनाव प्रभारी नजरूद्दीन खोखर ने बिना किसी की सहमति से महेश कुमार और जाकिर खोखर को सहायक निर्वाचन अधिकारी बनाया और चुनाव प्रक्रिया पूरी कराने लगे जो पूरी तरह गलत था।

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शिकायत में बताया गया है कि चुनाव प्रक्रिया में 23 लोगों ने मंडल अध्यक्ष के लिए दावेदारी की जिसमें से चार-पांच लोग हर चुनाव में पार्टी विरोधी गतिविधि में शामिल रहते हैं। धमधा मंडल के अधिकांश पदाधिकारियों ने ऐसे लोगों की दावेदारी का कड़ा विरोध किया। लिखित शिकायती पत्र भी दिया। मंडल अध्यक्ष के दावेदार अशोक यादव के समर्थन में 40-50 महिलाओं ने पत्र दिया। इस समय तक बोरी मंडल का चुनाव निबटाकर पूर्व विधायक लाभचंद बाफना और जिला उपाध्यक्ष रमन यादव भी उपस्थित हो चुके थे।

दावेदारों को एक नाम पर सहमत होने की समझाईश दी गई लेकिन कोई भी दावेदार नाम वापस लेने तैयार नहीं हुआ। बाद में चुनाव अधिकारी नजरुद्दीन खोखर ने कहा कि समन्वय समिति बनाकर अध्यक्ष के नाम की घोषणा प्रदेश से की जाएगी। इसके बाद बैठक समाप्त कर दी गई। समन्वय समिति में लाभचंद बाफना, नजरूद्दीन खोखर, कांतिलाल जैन, महेश कुमार, नरेश साहू शामिल किए गए। दुर्ग पहुंचने पर समिति के नामों में ओवरराइटिंग कर जाकिर खोखर का नाम जोड़ा गया।

शिकायत में कहा गया है कि जिला भाजपा कार्यालय में समन्वय समिति के सदस्यों की मौजूदगी में नजरूद्दीन खोखर ने पार्टी की जिला अध्यक्ष उषा टावरी को एक पत्र दिया जिसमें 7 दावेदारों के नाम वापस लेने का जिक्र था। इसमें से अवध ताम्रकार और आनंद ताम्रकार का हस्ताक्षर ही नहीं था। एक अन्य दावेदार सक्रिय सदस्य ही नहीं है। इसी दौरान बाफना ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान ऐसा कोई पत्र नहीं दिया गया। यह पत्र बाद में दिया गया होगा। इस तरह के पत्र के आधार पर निर्णय नहीं लिया जा सकता ।

बाफना की आपत्ति के बावजूद उषा टावरी कहती रही कि नाम वापस लेने और समर्थन देने का पत्र मेरे पास आया है। मुझे नवीन जैन के नाम की घोषणा करना पड़ेगा। इस पर बाफना समेत जिला उपाध्यक्ष, मंडल अध्यक्ष, दोनों उपाध्यक्षों और दोनों महामंत्री ने साफ कहा कि कांग्रेस का काम करने वाले व्यक्ति को अध्यक्ष बनाना पार्टी हित में नहीं है। आपत्ति के बावजूद दूसरे दिन नवीन जैन के नाम की घोषणा कर दी गई।

इस नियुक्ति से मंडल कार्यकर्ताओं में गहरी नाराजगी है। सांठ गांठ कर नगर पंचायत चुनाव में कांग्रेस को पहुंचाने की कोशिश के तहत ऐसा किया गया है। नाराज भाजपा नेताओं ने कहा है कि नियुक्तियां निरस्त कर पूर्व विधायक लाभचंद बाफना और मंडल अध्यक्ष नरेश साहू के निर्देश पर नया मंडल अध्यक्ष बनाने की प्रक्रिया पूरी करें। ऐसा न होने पर हजारों कार्यकर्ता सामूहिक रूप से इस्तीफा देंगे। नगर पंचायत चुनाव और पंचायत चुनाव में भी पार्टी को भारी नुकसान होगा। शिकायत करने वालों में मंडल अध्यक्ष नरेश साहू, आरूणी दानी सहित अन्य लोग शामिल हैं।

अब सांसद और मंडल अध्यक्ष को गोली मारने की धमकी 

दुर्ग सदर मंडल अध्यक्ष रहे कांशीनाथ शर्मा ने आज पुलिस से शिकायत की है कि उन्हें सुबह फोन पर जान से मारने की धमकी दी गई। शर्मा ने कहा कि अज्ञात व्यक्ति ने उन्हें फोन कर धमकी दी। गंदी गालियां देते हुए कहा कि सांसद विजय बघेल और कांशीनाथ शर्मा दोनों ज्यादा राजनीति कर रहे हो। दोनों को गोली मार दूंगा। शर्मा ने बताया कि गालियां और धमकी सुनकर वे सहम गए। इसकी शिकायत उन्होंने एसपी से की है।