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स्कूलों में अंडा परोसने पर जैन समाज ने किया कड़ा विरोध, सरकार को चेतावनी दी, निकाय चुनाव में नुकसान होगा  

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जैन श्रमण संघ दुर्ग ने स्कूलों में अंडा वितरण करने के छत्तीसगढ़ सरकार के फैसले का कड़ा विरोध किया है। संघ ने बयान जारी कर कहा है कि छत्तीसगढ़ सरकार प्राइमरी और मिडिल स्कूलों के बच्चों को मध्यान्ह भोजन में अंडा परोस रही है। स्कूली बच्चों को अंडा मिलने पर सभी बच्चे सामूहिक रूप से बैठकर भोजन करते हैं। इसका कड़ा विरोध करते हुए बयान में कहा गया है कि स्कूलों में अंडा वितरण तत्काल बंद किया जाए। विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा जगह-जगह धरना-प्रदर्शन करने के बाद भी छत्तीसगढ़ सरकार स्कूलों में अंडा परोस रही है।

स्कूलों में शाकाहारी शिक्षक शिक्षिकाएं हैं। उनके माध्यम से अंडा वितरण कराया जा रहा है। इसके कारण वे मानसिक रूप से प्रताड़ित हो रहे हैं। बयान में कहा गया है कि तत्काल अंडा वितरण बंद न करने पर नगरीय निकाय चुनाव में सरकार को सर्व शाकाहारी समाज के विरोध का सामना करना पड़ेगा। कबीरपंथी परिवार, गायत्री परिवार, जैन समाज और सर्व शाकाहारी समाज इसका पुरजोर विरोध कर चुकी है। अगर तत्काल अंडा वितरण बंद नहीं किया जाएगा तो भविष्य में भी विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।

बयान में कहा गया है कि जैन संत छत्तीसगढ़ प्रवर्तक श्री रतन मुनि जी महाराज महा साध्वी श्री प्रियदर्शन जी और साध्वी लब्धि यशा जी ने छत्तीसगढ़ सरकार के इस निर्णय पर गहरा विरोध दर्ज किया है। उन्होंने सरकार को सद्बुद्धि प्रदान करने की प्रार्थना की है। पूर्व में विरोध प्रदर्शन के बाद सरकार ने यह आश्वासन दिया था कि स्कूलों में अंडा वितरण नहीं किया जाएगा बल्कि अंडा खाने वाले छात्रों को उनके घर में पहुंचा कर दिया जाएगा। इसके बाद भी स्कूलों में अंडा वितरण करना सरकार की तानाशाही प्रवृत्ति को उजागर करता है।यह घोर निंदनीय कृत्य है।

श्री जैन श्रमण संघ के सभी पदाधिकारियों और सदस्यों ने सरकार के इस कृत्य पर विरोध जताते हुए कहा है कि सरकार की प्रवृत्ति को देखकर ऐसा लगता है कि आने वाले समय में स्कूलों से मां सरस्वती की मूर्ति को हटाकर मधुशाला खोलने की तैयारी चल रही है। अंडा खिलाने के नाम पर कमीशन खोरी का गोरखधंधा बनाया जा रहा है। बयान में कहा गया है कि अंडा मांसाहारी भोजन है यह किसी भी वनस्पति से नहीं उगता है। मुर्गी से उत्पन्न होता है और अंडे के अंदर भी जीव पाया जाता है जिससे इसका विकास होते रहता है। अंडा को भोजन के रूप में प्राप्त करने पर जीव हत्या का दोष लगता है।

छत्तीसगढ़ शासन द्वारा अबोध बालकों को पाप का भागीदार बनाया जा रहा है। श्रमण संघ दुर्ग के अध्यक्ष निर्मल बाफना, मंत्री टीकम छाजेड़, प्रेम चौरड़िया, प्रवीण श्री श्रीमाल, विजय करनावट, सुरेश लुनिया, हरिश श्री श्री माल, रमेश बाधमार, विनय देशलहरा, प्रकाश काकरिया, सरिता श्री श्री माल, सपना संचेती, श्रेया बाघमार, युक्ता बोहरा ने संयुक्त बयान में कहा है कि लगातार अंडा वितरण जारी रखने पर हम इसका विरोध जारी रखेंगे। बच्चे विद्या अध्ययन के लिए स्कूल जाते हैं। विद्यालय एक मंदिर है। इसे मंदिर ही रहने दें।