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बिजली ट्रांसमिशन में छत्तीसगढ़ की लम्बी छलांग, 538 प्रतिशत की रिकार्ड तोड़ बढ़ोतरी

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छत्तीसगढ़ में उपलब्ध बिजली हर उपभोक्ता तक पहुंचाने में पॉवर कंपनी ने उल्लेखनीय काम किया है। पॉवर ट्रांसमिशन के क्षेत्र में 538 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। प्रदेश के हर श्रेणी के उपभोक्ताओं तक बिजली सप्लाई के लिए ट्रांसमिशन सिस्टम को सुदृढ़ बनाने का काम तेजी से चल रहा है। छत्तीसगढ़ स्टेट पाॅवर ट्रांसमिशन कंपनी की प्रबंध निदेशक तृप्ति सिन्हा के नेतृत्व में यह उपलब्धि हासिल की गई है। अति उच्च दाब उपकेन्द्रों और उनसे सम्बद्ध लाइनों का विस्तार प्रदेश के सुदूर इलाकों में किया गया है। इससे प्रदेश की ट्रांसमिशन क्षमता  8169 एमवीए हो गई है। राज्य गठन के समय प्रदेश की ट्रांसमिशन क्षमता सिर्फ 1257 एमवीए थी।

राज्य शासन ने ‘पाॅवर फार आॅल’ का लक्ष्य प्राप्त करने सुदूर ग्रामीण अंचलों तक बिजली पहुंचाने का काम तेजी से करने पर फोकस किया। गांव-गांव, घर-घर बिजली पहुंचाने की कंपनी की कामयाब कोशिशों के कारण प्रति उपभोक्ता विद्युत खपत में भी काफी बढ़ोतरी दर्ज हुई। विद्युत की अधिकतम मांग 1334 मेगावाट से बढ़कर 4760 मेगावाट तक पहुंच गई है। प्रदेश में विद्युत की बढ़ती मांग का आंकलन कर ट्रांसमिशन सिस्टम को मजबूत बनाने ट्रांसमिशन कंपनी ने सुनियोजित तरीके से कार्ययोजना का क्रियान्वयन किया।

कंपनी के एजीएम (जनसंपर्क ) विजय मिश्रा ने बताया कि राज्य गठन के समय अति उच्चदाब उपकेन्द्रों की संख्या 27 थी, जो अब बढ़कर 120 हो चुकी है। नए उपकेन्द्रों का निर्माण आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में प्राथमिकता के साथ किया गया जिससे बस्तर, सरगुजा के सुदूर इलाकों में निवास करने वाले आदिवासी परिवारों के घरों में बिजली पहुंच रही है। नए उपकेन्द्रों के निर्माण के साथ इनसे सम्बद्ध अतिउच्चदा लाईनों का विस्तार भी तेजी से किया गया। इससे प्रदेश में ईएचटी लाइनों की लंबाई 12610 सर्किट किलोमीटर हो गई है।