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शहर के विकास में एमआईसी मेंबर नहीं कर पाए कोई कमाल, एवरेज से भी कमजोर रहा 5 साल का कार्यकाल

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दुर्ग । नगरीय निकाय चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही दुर्ग नगर निगम की चुनावी हलचल तेज हो गई है। अगला महापौर कौन होगा? कैसा कार्यकाल होगा ? क्या बदलाव आएंगे नई परिषद के कार्यकाल में और नगर निगम के विकास कार्यों में क्या बदलाव आने की संभावना है ? इन सवालों पर चर्चा तेज हो गई हैं। पिछले पांच साल में एमआईसी की 60 से ज्यादा बैठकें हुई जिसमें दो-तीन सदस्यों को छोड़कर बाकी सदस्य बिना तैयारी के आए।

सामान्य सभा में भी महापौर केबिनेट के यही दो-तीन सदस्य सक्रिय रहे। विभागीय योजनाओं की जानकारी, अध्ययन और विपक्ष के सवालों के जवाब देने में अक्षम रहे ज्यादातर एमआईसी मेंबर। चुनावी हलचल तेज होने के साथ ही आम जनता ने पिछले 5 साल के कार्यों का आकलन शुरू कर दिया है। आम जनता को महापौर चंद्रिका चंद्राकर और उनके केबिनेट यानी एमआईसी सदस्यों से क्या उम्मीदें थी ? और उन्होंने पांच साल के कार्यकाल में क्या किया? इसका आकलन भी हो रहा है।

द सीजी न्यूज  ने शहर की सरकार के जानकारों, राजनीतिक विशेषज्ञों से चर्चा और पिछले 5 साल के कार्यकाल के दौरान एमआईसी सदस्यों की सक्रियता के आधार पर उनके कामकाज का आकलन किया है।

ऐसा रहा महापौर परिषद (एमआईसी) के सदस्यों का रिपोर्ट कार्ड

दिनेश देवांगन (नगरीय नियोजन एवं लोक कर्म प्रभारी) –

वार्ड की जनता के लिए पूरी तरह समर्पित रहे। वार्ड की समस्याओं को लेकर सजग भूमिका निभाई और समस्याओं का शतप्रतिशत निराकरण करने का प्रयास करते रहे। वार्डवासियों की निस्तारी के लिए तालाबों में ड्रेनेज का पानी भरने से न रोक पाना बड़ी विफलता। दिनेश के प्रयासों के बावजूद तालाबों की गंदगी, प्रदूषण, बदहाली जस की तस। लोक कर्म प्रभारी के रूप में सक्रिय रहे पर खास उपलब्धि नहीं रही। 10 -15 साल पहले शुरू हुई योजनाएं ही पूरी हो पाई। अपने कक्ष में निर्माण कार्यों का ठेका देने ठेकेदारों का रिंग बनाने में सक्रिय भागीदारी के कारण चर्चित रहे। ठेकेदारों को धमकाने और लेन-देन की शिकायतों के आरोप भी लगे। सदन के भीतर और बाहर महापौर के संकटमोचक के रूप में सक्रिय भूमिका निभाई।

देवनारायण चंद्राकर (जलकार्य प्रभारी ) –

वार्ड की जनता के लिए बेहद सक्रिय रहे। वार्ड की सफाई व्यवस्था से लेकर निर्माण कार्य, पानी सप्लाई, सौंदर्यीकरण जैसे हर मुद्दे पर लगातार सक्रिय रहे। जलकार्य प्रभारी के रूप में फेज टू योजना को पूरा कराने पीएचई और जलकार्य विभाग के अफसरों को नियंत्रित करने लगातार दबाव बनाया। ये बड़ी उपलब्धि रही। पानी सप्लाई से संबंधित समस्याओं का निराकरण करने निगम की टीम के साथ खुद मौके पर डटे रहकर काम पूरा कराते रहे। अरबों रुपए खर्च के बावजूद शहर की वाटर सप्लाई का सिस्टम अब तक न सुधर पाना बड़ी नाकामी। तेजतर्रार छवि के साथ विपक्ष से भिड़ने में हमेशा आगे रहे।

शिवेंद्र परिहार (राजस्व प्रभारी) –

कातुलबोड वार्ड की जनता के लिए समर्पित भाव से काम किया। वार्ड की समस्याओं का निराकरण करने लगातार सक्रिय रहे। बाजार विभाग के प्रभारी के रूप में उपलब्धि खास नहीं रही। पूर्व महापौर सरोज पांडेय के कार्यकाल में शहर में नए मार्केट सहित अन्य स्थानों पर विकसित किए गए बाजारों को सुविधाजनक, व्यवस्थित करने कोई प्लान नहीं बनाया। दो स्थानों पर साप्ताहिक हाट बाजार शुरू करना उपलब्धि रही लेकिन इन साप्ताहिक बाजारों में सुविधाओं का विस्तार नहीं किया। पब्लिक डिमांड के बावजूद अन्य स्थानों पर साप्ताहिक बाजार शुरू नहीं कर पाए। मार्केट की दुकानों से राजस्व बढ़ाकर आम जनता को टैक्स या सफाई शुल्क में राहत देने में विफल रहे। बोरसी बाजार की दुकानों सहित कई दुकानों का आवंटन कई साल से लटके रहना सबसे बड़ी नाकामी। महापौर के संकटमोचक के रूप में विपक्ष को निशाने पर लेने में अग्रणी भूमिका रही।

चंद्रशेखर चंद्राकर (स्वास्थ्य एवं चिकित्सा प्रभारी) –

सहज सरल व्यक्तित्व के शेखर ने शंकर नगर वार्ड के पार्षद की भूमिका बेहतर तरीके से निभाई। वार्ड की समस्याओं को लेकर सजग रहे। शुरुआती दौर में सफाई व्यवस्था सुधारने कई बार प्रयास किए लेकिन विभागीय अमले पर नियंत्रण न होने के कारण व्यवस्था जस की तस रही। शहर की सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने में सार्थक भूमिका निभाने में विफल रहे। निगम को सफाई के विशेष प्रयोगों के लिए अवार्ड मिले लेकिन इन प्रयोगों में तत्कालीन कमिश्नर एसके सुंदरानी की भूमिका रही। बेहद महत्वपूर्ण विभाग होने के बावजूद पिछले दो साल से विभागीय कार्यों में खास सक्रिय नहीं दिखे। वार्ड स्तर पर सक्रियता बरकरार है। शहर को क्लीन सिटी बनाने के लिए कोई बड़ा प्रोजेक्ट शुरू नहीं हो पाया। हाल ये है कि सफाई व्यवस्था सुधारने न सिर्फ निगम कमिश्नर बल्कि संभागायुक्त और कलेक्टर को सड़कों पर घूमना पड़ रहा है।

विजय जलकारे (पर्यावरण एवं उद्यानिकी प्रभारी) –

दीपक नगर वार्ड के पार्षद के रूप में बढ़िया काम किया। जनसमस्याओं को सुलझाने में लगातार सक्रिय और सजग रहे। पर्यावरण प्रभारी के रूप में खास सफल नहीं। पर्यावरण विभाग को बेहद सीमित संसाधन और फंड मिलने के कारण पर्याप्त काम नहीं हो पाया।  नगर निगम ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में पिछले 5 साल में पौधरोपण करने या पूर्व के वर्षों में किए गए पौधरोपण को बचाने की दिशा में कोई उल्लेखनीय कार्य नहीं किया। सीमित संसाधनों के साथ विजय ने बेहतर कार्य करने की दिशा में सार्थक प्रयास किए लेकिन शहर को ग्रीन सिटी बनाने का सपना होर्डिंग पर लिखे नारों तक ही सीमित रह गया।

प्रमोद पाटिल ( अग्निशमन, विद्युत संधारण एवं यांत्रिकी विभाग) –

वार्ड की समस्याओं के लिए सक्रिय रहे। न सिर्फ अपने वार्ड बल्कि पटरीपार के दूसरे वार्डों की समस्याओं का निराकरण करने में भी वहां के पार्षदों को सहयोग देते रहे। विद्युत यांत्रिकी विभाग ने सक्रिय भूमिका नहीं निभाई। शहर में एलईडी लाईट लगाकर 7 साल तक मेंटेनेंस करने का ठेका लेने वाली एजेंसी की लापरवाही पर नियंत्रण नहीं रख पाए। शहर की प्रकाश व्यवस्था पहले से बेहतर हुई है लेकिन पाटिल  इसका श्रेय नहीं ले पाए। स्ट्रीट लाइट बंद होने या पर्याप्त रौशनी न होने की समस्याओं पर विधायक अरूण वोरा ज्यादा सक्रिय रहे। करोड़ों का बिजली बिल बकाया होने से नगर निगम की बिजली काटने पर निगम प्रशासन या विद्युत यांत्रिकी विभाग की भूमिका शून्य रही।  विधायक अरूण वोरा ने सीधे चीफ सेक्रेटरी से फोन पर चर्चा की तब स्ट्रीट लाइट चालू हो पाई।

प्रवीर मोहन पिंटू (वित्त, लेखा एवं अंकेक्षण विभाग प्रभारी) –

वार्ड में समस्याओं का निराकरण करने में लगातार सक्रिय रहे। नगर निगम का बेहद महत्वपूर्ण विभाग होने के बावजूद विभाग प्रभारी का कोई नियंत्रण नहीं रहा। विभाग प्रभारी के रूप में बजट को लेकर प्रवीर मोहन के पास कोई विजन नहीं रहा। बजट कैसे बनेगा? बजट के प्रावधान क्या हैं? बजट में शामिल प्रस्तावों को लागू कैसे किया जाएगा? बजट के अनुसार फंड मिला या नही? इसकी कोई ठोस समीक्षा नहीं हुई। वित्त विभाग पूरी तरह निगम कमिश्नर और अकाउंट सेक्शन के अफसरों के नियंत्रण में रहा। वित्त प्रभारी के रूप में प्रवीर मोहन औसत रहे।

सोहन जैन ( संस्कृति, पर्यटन, मनोरंजन, विरासत संरक्षण विभाग प्रभारी) –

वार्ड में सक्रियता सामान्य रही। पूर्व महापौर सरोज पांडेय के कार्यकाल में शुरू हुए सांस्कृतिक-धार्मिक कार्यक्रम पहले की तरह होते रहे। सोहन जैन की कामयाबी बस यहीं तक सीमित रही। शिवनाथ नदी तट पर कई साल से हो रहे महाशिवरात्रि पर्व , दुर्ग आयडल सहित अन्य धार्मिक, सांस्कृतिक आयोजन सफलता से हुए। विभाग की ओर से शहर में नए कार्यक्रम, आयोजन की संभावना के बावजूद कोई काम नहीं हुआ। प्रभारी के रूप में विशेष पहचान बना पाने में नाकाम रहे। पांच साल तक विवादों से दूर रहे। एमआईसी प्रभारी के रूप में औसत रहा कार्यकाल।

कविता तांडी (सामान्य प्रशासन विभाग) –

वार्ड में विकास कार्यों को कराने में लगातार सक्रिय रही। वार्ड में पानी, सड़क जैसी हर समस्याओं का निराकरण करने में जोरशोर से काम किया। सामान्य प्रशासन विभाग का दायित्व निभाने में नाकाम। नगर निगम का कामकाज सुधारने की दिशा में सामान्य प्रशासन विभाग की भूमिका शून्य रही। सदन के भीतर और बाहर विपक्ष पर तीखा हमला करने में भाजपा की महिला पार्षदों में सबसे आगे रही। महापौर की संकटमोचक के रूप में विपक्ष के हमले का जमकर जवाब दिया।

रीता बजाज (गरीबी उपशमन एवं सामाजिक कल्याण विभाग) –

स्वभाव से जितनी शांत, उतनी ही शांति से विभाग का कामकाज निबटाया। गरीबों के कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन करने में सक्रिय रही। राज्य शासन की योजना के तहत तीर्थयात्रियों को तीर्थ यात्रा पर भेजने सहित अन्य सभी विभागीय कार्यों को सक्रियता से समय पर पूरा किया। सामान्य सभा में भूमिका साधारण। वार्ड की समस्याओं का निराकरण करने में काफी सक्रिय रही।

भारती नरेंद्र बंजारे (शिक्षा, खेलकूद, युवा कल्याण विभाग) –

शिक्षा और खेलकूद व युवा कल्याण जैसे महत्वपूर्ण विभाग के काम सामान्य रूप से निबटाती रही। कोई विशेष उल्लेखनीय उपलब्धि नहीं रही। स्वभाव से शांत, सरल भारती बंजारे विवादों से भी दूर रही। वार्ड में सक्रियता से विकास के कार्य कराए लेकिन एमआईसी मेंबर के रूप में औसत कामकाज। सदन के भीतर और बाहर शांत रही। विवादों से दूर।

गायत्री साहू (महिला एवं बाल विकास विभाग प्रभारी ) –

बोरसी वार्ड में पार्षद के रूप में ज्यादा सक्रिय रही। कई साल से समस्याओं से जूझ रहे वार्ड में विकास कार्यों को पूरा कराने में सफल।   विभाग प्रभारी के रूप में तीज महोत्सव का आयोजन एकमात्र उपलब्धि मानी जाएगी। इसके सिवा कोई उल्लेखनीय कार्य नहीं किया। नगर निगम की सामान्य सभा के दौरान विपक्ष से भिड़ने में सदन के भीतर और बाहर सक्रियता औसत से भी कम। पार्षद के रूप में बेहतर कार्यकाल लेकिन एमआईसी सदस्य के रूप में औसत से भी कम।

(महापौर चंद्रिका चंद्राकर और सभापति राजकुमार नारायणी सहित नगर निगम के प्रशासनिक कामकाज का रिपोर्ट कार्ड कुछ देर में। )