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कांग्रेस प्रत्याशियों की लिस्ट तैयार, प्रदेश नेतृत्व की मुहर लगना बाकी, भाजपा में गुटीय दांवपेंच में उलझे नेता

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नगरीय निकाय चुनाव के लिए टिकट वितरण की प्रक्रिया अब अंतिम दौर में है। कांग्रेस और भाजपा में दिग्गज नेता हरेक वार्ड में प्रत्याशी चयन के लिए माथापच्ची कर रहे हैं। दुर्ग नगर निगम में पिछले 20 साल से भाजपा का दबदबा कायम है। लगातार चार चुनाव जीत चुके भाजपा नेता हर हाल में पांचवी बार भी जीत दर्ज करना चाहते हैं। दूसरी ओर, 15 साल बाद विधानसभा चुनाव में धमाकेदार विजय हासिल करने के बाद उत्साहित कांग्रेस नेताओं को इस बार निगम चुनाव में भी जीत की उम्मीद है।

सूत्रों के अनुसार कांग्रेस पार्टी ने दुर्ग नगर निगम के 60 वार्डों में प्रत्याशी चयन का काम पहले से ही पूरा कर लिया है। पार्टी के प्रति निष्ठावान रहे सक्रिय और जीत की संभावना वाले दावेदारों की लिस्ट तैयार हो गई है। इस लिस्ट पर सिर्फ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की मुहर लगना बाकी है। दूसरी ओर भाजपा खेमा कई वार्डों में अभी भी प्रत्याशियों की तलाश कर रहा है। पार्टी नेता हर हाल में विजय दर्ज करने वाले प्रत्याशी की तलाश कर रहे हैं।

भाजपा में छाई गुटबाजी के कारण भी टिकट वितरण का काम पेचीदा हो गया है। एक गुट विशेष के नेता हर हाल में महापौर पद पर काबिज रहने की रणनीति के तहत पार्षद पद के लिए अपने खासमखास दावेदारों की सूची तैयार कर रहे हैं। दूसरा गुट भी इसी रणनीति के तहत तैयारी में जुटा है। नामांकन की अंतिम तारीख 6 दिसंबर करीब होने के कारण कांग्रेस और भाजपा के दिग्गज नेता प्रत्याशियों की लिस्ट को अंतिम रूप देने में व्यस्त हैं, वहीं दावेदारों के बीच टिकट के लिए घमासान दिनोंदिन तेज हो रहा है।

वोरा के सामने गनी और डिसूजा के बीच जमकर तकरार  

विधायक अरूण वोरा के निवास पर कांग्रेस नेताओं के बीच टिकट के लिए जमकर तकरार होती रही। तकियापारा वार्ड 8 में कांग्रेस पार्षद व निगम के पूर्व नेता प्रतिपक्ष अब्दुल गनी और पूर्व पार्षद विन्सेंट डिसूजा के बीच विवाद शुरू हो गया। गनी यहां से पार्षद चुनाव के लिए दावेदारी कर रहे हैं वहीं डिसूजा चाहते हैं कि उन्हें टिकट मिले। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार अब्दुल गनी को टिकट मिलना तय है। पार्टी नेताओं के अनुसार सीनियर वोरा ने भी गनी की दावेदारी को हरी झंडी दे चुके हैं। दरअसल, गनी पिछले 30 साल से कांग्रेस के प्रति लगातार निष्ठावान रहे। विधानसभा चुनावों में अरूण वोरा के पक्ष में दिन-रात मेहनत की। लोकसभा चुनावों में भी पार्टी के लिए जमकर काम किया। नगर निगम में भी लगातार सक्रिय रहे। दूसरी ओर, चुनाव में विंसेंट डिसूजा की भूमिका लगभग नगण्य रही। बीच-बीच में नगर निगम के मुद्दे उठाने के बाद वे राजनीतिक मैदान से लंबे अंतराल के लिए गायब होते रहे। वार्ड में उनकी सक्रियता कभी कभार ही रही। गनी की 30 साल से लगातार सक्रियता डिसूजा की कभी कभार की राजनीति पर भारी पड़ रही है।

वार्ड 31 में अमृत और मदन जैन टिकट पाने भिड़ रहे  

आपापुरा वार्ड 31 में कांग्रेस पार्षद रह चुके अमृत लोढ़ा दावेदारी कर रहे हैं वहीं इस वार्ड से दो दशक पहले वार्ड पार्षद का चुनाव जीत चुके मदन जैन ने भी टिकट के लिए दावा किया है। मिलनसार छवि के अमृत लोढ़ा ने पार्षद कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी वार्ड के निवासियों से हमेशा जीवंत संपर्क रखा। मदन जैन ने कई बार पार्षद चुनाव जीतने के बाद 2004 में महापौर का चुनाव लड़ा, जिसमें उन्हें सरोज पांडेय ने लगभग 50 हजार वोट से करारी शिकस्त दी। पिछले चुनाव में मदन जैन ने कचहरी वार्ड से पार्षद का चुनाव लड़ा। इस बार उन्हें निर्दलीय प्रत्याशी आशीष दुबे ने हरा दिया। मदन जैन की पराजय दर पराजय उनकी टिकट में रोड़े अटका रही है। वैसे भी, मदन जैन अब कचहरी वार्ड के निवासी हैं। लिहाजा उनकी पैराशूट लैंडिंग आपापुरा वार्ड में संभव नहीं है। अमृत लोढ़ा का वार्ड में जीवंत संपर्क उनके लिए प्लस पाइंट है। बहरहाल दोनों दावेदारों के बीच आज वोरा निवास में टिकट की मांग को लेकर हलका विवाद हुआ। वोरा ने दोनों को शांत करा दिया।

भाजपा में गुटबाजी हावी, लिस्ट को लेकर अंदरखाने में चल रही है जबर्दस्त खींचतान

भाजपा नेता पिछले 6 महीने से ज्यादा समय से गुटबाजी में उलझे हैं। पूर्व मंत्री हेमचंद यादव के निधन के बाद दुर्ग की भाजपाई राजनीति पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव व राज्यसभा सांसद सरोज पांडेय के इर्द गिर्द केंद्रित हो गई थी। मगर, लोकसभा चुनाव में विजय बघेल की धमाकेदार जीत ने समीकरण बदल दिए। लोकसभा चुनाव के बाद भाजपाई खेमेबाजी तेज हो गई है। जिले की राजनीति में एक ओर सरोज पांडेय हैं तो दूसरी ओर लोकसभा सांसद विजय बघेल के साथ पूर्व मंत्री प्रेमप्रकाश पांडेय साथ-साथ हैं। हेमचंद समर्थक भाजपा नेताओं को अब बघेल और प्रेमप्रकाश का नेतृत्व मिल गया है। दोनों गुटों में ज्यादा से ज्यादा वार्डों में अपने गुट से प्रत्याशी घोषित करने की होड़ चल रही है। यह सब पार्टी के अंदरखाने में हो रहा है। हालांकि, संगठन चुनाव को लेकर कुछ दिनों पहले जिस अंदाज में खुलेआम तकरार की खबरें आई और और प्रदेश व राष्ट्रीय स्तर पर शिकायतों का दौर चला, उससे पार्टी की भारी फजीहत हुई है। संकेत मिल रहे हैं कि सीनियर नेता दोनों गुटों में संतुलन रखकर टिकट वितरण करेंगे।