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सबसे ज्यादा सक्रिय रहे भाजपा पार्षदों की टिकट कटने से भाजपा नेता हैरान

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नगर निगम के सबसे सक्रिय पार्षदों में गिने जाने वाले शिवेन्द्र सिंह परिहार, ज्ञानेश्वर ताम्रकार, अल्का बाघमार को इस बार टिकट नहीं दी गई है। ये तीनों पार्षद पांच साल तक लगातार सक्रिय रहे। शिवेंद्र परिहार को महापौर चंद्रिका चंद्राकर के विश्वासपात्र और सक्रिय पार्षदों में गिना जाता है। उन्होंने पांच साल तक महापौर पर होने वाले हर हमले का मुखर जवाब दिया। कांग्रेसियों को तीखा जवाब देते रहे। वहीं दूसरी ओर, अलका बाघमार सुबह से शाम तक महापौर चंद्रिका चंद्राकर के साथ पूरे दिन साए की तरह साथ रही।

ज्ञानेश्वर ताम्रकार न सिर्फ वार्ड में लगातार सक्रिय रहे बल्कि नगर निगम में जनहित के लिए आवाज उठाने वाले मुखर पार्षदों में उनकी गिनती होती है। उनकी टिकट कटने से लोग हैरान हैं। शंकर नगर में पार्षद रहे सुरेंद्र बजाज की टिकट कटने से भी लोग हैरानी जता रहे हैं। बजाज का वार्ड आरक्षित होने के कारण पिछले चुनाव में उन्होंने लगातार सक्रियता के दम पर अपनी पत्नी रीता बजाज को चुनाव लड़ाया और जीत दर्ज की। बाद में रीता बजाज को एमआईसी मेंबर बनाया गया।

एक अन्य एमआईसी मेंबर जलकार्य विभाग के प्रभारी देवनारायण चंद्राकर की टिकट पेंडिंग रहने पर भी राजनीतिक हलकों में आश्चर्य जताया जा रहा है। इसके अलावा वरिष्ठ भाजपा नेता देवेंद्र चंदेल भी पोलसाय पारा वार्ड से टिकट के दावेदार हैं। नगर निगम में पिछले 5 चुनावों में इस वार्ड में चंदेल परिवार का कोई न कोई सदस्य विजयी होता रहा है। उनकी टिकट भी पेंडिंग रखी गई है।

पटरीपार के बेहद सक्रिय पार्षद अरूण सिंह की टिकट पर भी कोई फैसला नहीं लिया गया है। पार्षद अरूण सिंह को पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के समर्थकों में गिना जाता है। वे सांसद विजय बघेल के भी करीबी हैं। टिकट वितरण से मायूस लोगों में सांसद विजय बघेल से जुड़े दावेदार ज्यादा हैं। सांसद सरोज पांडेय के कट्‌टर समर्थक शिवेंद्र परिहार और अलका बाघमार की टिकट कटने पर भी हैरानी जताई जा रही है। हालांकि टिकट वितरण में सांसद सरोज पांडेय का दबदबा साफ़ दिख रहा है।