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जनता कांग्रेस को मान-मनौव्वल के बाद सिर्फ 16 प्रत्याशी मिले, पटरीपार में बागियों ने कांग्रेस-भाजपा की नींद उड़ाई

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पटरीपार के कई वार्डों में बागी चुनाव समीकरण को न सिर्फ बिगाड़ रहे हैं, बल्कि कई वार्डों में पूरे चुनावी सीन में बागी प्रत्याशी अभी से कांग्रेस और भाजपा प्रत्याशियों पर भारी पड़ने लगे हैं। पटरीपार के वार्ड 59 में भाजपा से बगावत कर चुनाव लड़ने वाले शिवेंद्र परिहार ने न सिर्फ भाजपा बल्कि कांग्रेस प्रत्याशी की हालत खराब कर दी है। वार्ड 21 में भाजपा के बागी अरूण सिंह की लोकप्रियता के आगे दोनों प्रमुख दलों के प्रत्याशी कहीं टिक नहीं पा रहे हैं। इधर, नगरीय निकाय चुनाव में सबसे खराब हालत जनता कांग्रेस की है। दुर्ग नगर निगम के 60 वार्डों में जनता कांग्रेस को काफी मान मनौव्वल के बाद सिर्फ 16 प्रत्याशी ही मिल पाए हैं। ज्यादातर प्रत्याशी जनता कांग्रेस के बैनर तले चुनाव नहीं लड़ना चाहते। पार्टी से चुनाव चिन्ह के अलावा किसी भी तरह की मदद भी नहीं मिल रही है।      

तितुरडीह वार्ड 21

भाजपा से बगावत कर चुनाव लड़ने वाले पार्षद अरूण सिंह दोनों प्रमुख दलों पर भारी पड़ रहे हैं। लोकप्रियता के मामले में अरूण सिंह, भाजपा प्रत्याशी संजय सिंह और कांग्रेस के ज्ञानेंद्र देवांगन की तुलना में मीलों आगे हैं। अरूण सिंह ने 5 साल के कार्यकाल में 44 करोड़ रुपए के विकास कार्य कराए। शहर में सबसे ज्यादा विकास कार्य इसी वार्ड में हुए। इसका पूरा श्रेय अरूण सिंह को जाता है। स्थानीय नागरिक भी अरूण को इसका श्रेय देने के साथ ही जनहित के कार्यों को पूरा कराने की शैली के कायल हैं।

पांच साल के दौरान अरूण सिंह ने बता दिया कि विकास कार्य किस तरह कराए जाते हैं। जनहित को सबसे ज्यादा महत्व देने वाले अरूण की खासियत यह रही कि वे सत्तापक्ष के पार्षद होने के बावजूद गलत कार्यों का विरोध करने से वे कभी पीछे नहीं हटे। सीमेंट रोड निर्माण में सरकारी धन की बर्बादी और जिम में घटिया क्वालिटी की सामग्री खरीदने पर उन्होंने अफसरों को जमकर घेरा। सामग्री खरीदी की जांच कराने के साथ ही इस पर रोक लगाने के अलावा उन्होंने रोड निर्माण कार्य रुकवा कर सरकारी धन बर्बाद नहीं होने दिया। उनकी लोकप्रियता, स्पष्टवादिता और जनहित को सबसे ज्यादा महत्व देने वाली छवि के कारण भाजपा और कांग्रेस प्रत्याशी चुनाव प्रचार में टिक नहीं पा रहे हैं।

औद्योगिक नगर वार्ड 17

देवनारायण चंद्राकर (भाजपा) और तेजबहादुर बंछोर (कांग्रेस) के बीच सीधा मुकाबला है। चंद्राकर फिलहाल मजबूत प्रत्याशी माने जा रहे हैं, लेकिन सूत्रों का कहना है कि जैसे-जैसे मतदान का दिन करीब आएगा, वैसे-वैसे बंछोर की स्थिति बेहतर होगी। देवनारायण की स्थिति लगातार कमजोर होती जाएगी। बंछोर कई ऐसे मुद्दे उठा रहे हैं जिससे देवनारायण की इमेज पर असर पड़ रहा है। वर्तमान में दोनों प्रत्याशियों के बीच कड़ी टक्कर चल रही है।

शहीद भगत सिंह (उत्तर) वार्ड 20 –

निर्दलीय प्रत्याशी अनिल राव ने कांग्रेस भाजपा का समीकरण बिगाड़ा। उन्हें युवा वर्ग का भारी समर्थन मिल रहा है।

पिछला चुनाव जीतने के बाद भाजपा पार्षद शंकर दमाहे लगातार दूसरी बार यहां से चुनाव मैदान में हैं। कांग्रेस ने यहां से अमित देवांगन को प्रत्याशी बनाया है। यहां से निर्दलीय प्रत्याशी बी अनिल राव चुनाव मैदान में उतरे हैं। अनिल राव के चुनाव मैदान में उतरने से कांग्रेस और भाजपा का चुनावी समीकरण बदल गया है। अनिल को युवा वर्ग का जबर्दस्त समर्थन मिल रहा है। वार्ड पार्षद शंकर दमाहे ने वार्ड में 5 साल में विकास कार्य कराए हैं लेकिन स्थानीय नागरिकों का कहना है कि वार्ड की सफाई व्यवस्था में पर्याप्त सुधार नहीं हो पाया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अभी शंकर दमाहे को बी अनिल राव कड़ी चुनौती दे रहे हैं। हालांकि, कांग्रेस के अमित देवांगन ने भी यहां प्रचार अभियान शुरू कर दिया है। वे कितना असर डाल पाते हैं, यह अभी देखना बाकी है।

औद्योगिक नगर (दक्षिण) वार्ड 18 में कांग्रेस भाजपा के बीच सीधा मुकाबला

पटरीपार के वार्ड 18 में रोशनी देवांगन (भाजपा) और निर्मला साहू (कांग्रेस) की चुनावी ल़ड़ाई में निर्मला साहू की स्थिति बेहतर बताई जा रही है। निर्मला साहू वार्ड से पार्षद चुनाव जीत चुकी हैं। वे 2014 में नगर निगम की नेता प्रतिपक्ष भी रहीं। वार्ड की समस्याओं का निराकरण करने धरना प्रदर्शन से लेकर निगम अफसरों से लगातार भिड़ने के कारण निर्मला की स्थिति बेहतर है।

उरला वार्ड 58 में भी कांग्रेस-भाजपा की टक्कर, जोगी कांग्रेस को नहीं मिल रहा समर्थन

भाजपा के अभिषेक गुप्ता और कांग्रेस के बृजलाल पटेल के बीच मुकाबला है। यहां जनता कांग्रेस के डी प्रकाश ने भी नामांकन भरा है। पिछले चुनाव में सिकोला बस्ती से चुनाव लड़ने वाले डी प्रकाश का वार्ड आरक्षित होने के कारण उन्होंने बगल के वार्ड से किस्मत आजमाने का फैसला किया। वार्ड के निवासी न होने के कारण डी प्रकाश को मतदाताओं का समर्थन नहीं मिल रहा है। वार्ड में कांग्रेस औऱ भाजपा के बीच ही सीधी टक्कर है।