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कई वार्डों में बगावत से कांग्रेस-भाजपा के दमदार प्रत्याशी मुश्किल में, चुनावी गणित बिगाड़ रहे बागी

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दुर्ग। कांग्रेस और भाजपा ने काफी विचार-मंथन के बाद अपने प्रत्याशियों की घोषणा की। ऐन टाइम में इक्का-दुक्का प्रत्याशियों की टिकट भी बदली गई। तमाम एहतियात के बावजूद टिकट फाइनल होने के साथ ही दोनों दलों के बागियों ने चुनावी सीन बदल दिया। बागियों के निर्दलीय चुनाव लड़ने के कारण दोनों दलों के दिग्गज कहे जाने वाले प्रत्याशियों के चुनावी गणित पर असर पड़ रहा है। अभी भी कई वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशियों से समर्थन हासिल करने मान मनौव्वल का दौर चल रहा है। ऐसी संभावना जतााई जा रही है कि चुनाव करीब आने पर कई निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव मैदान से हट सकते हैं।

ब्राम्हणपारा वार्ड 32

विधायक अरूण वोरा ने कांग्रेस प्रत्याशी धीरज बाकलीवाल को जिताने की अपील करते हुए वार्ड में जनसंपर्क किया

सोहन जैन (भाजपा) और धीरज बाकलीवाल (कांग्रेस) के बीच सीधा मुकाबला है। सोहन जैन यहां से पार्षद निर्वाचित हो चुके हैं लेकिन स्थानीय नागरिक वार्ड की सफाई व्यवस्था से बेहद परेशान हैं। धीरज बाकलीवाल वार्ड के हर मतदाता से बेहतर संबंध हैं। राजनीति के साथ ही सामाजिक-धार्मिक कार्यक्रमों में लगातार सक्रियता उनका प्लस पाइंट है। सोहन जैन के व्यक्तिगत संबंध सभी से अच्छे हैं लेकिन वार्ड पार्षद के रूप में समस्याओं का निराकरण करने में वे हमेशा ढीले रहे हैं। यहां धीरज बाकलीवाल को उनकी लगातार सक्रियता का फायदा मिल रहा है।   

आपापुरा वार्ड 31

समर्थकों के साथ कांग्रेस प्रत्याशी मदन जैन

मदन जैन (कांग्रेस) और प्रशांत जोशी (भाजपा) के अलावा कांग्रेस से बगावत करने वाले पूर्व पार्षद अमृत जैन ने यहां के चुनाव को दिलचस्प बना दिया है। स्थिति ये है कि दोनों प्रत्याशियों की तुलना में अमृत जैन भारी पड़ रहे हैं। मदन जैन यहां से पार्षद चुनाव जीत चुके हैं लेकिन 2009 में पार्षद बने अमृत जैन शहर के गिने चुने जनप्रतिनिधियों में से एक हैं जो सही मायनों में सेवा भावना के साथ वार्ड की जनता की सेवा करते हैं। जनसेवा की भावना और बेहद विनम्र व्यवहार उनकी सबसे बड़ी ताकत है। वार्ड में पार्षद कार्यकाल के दौरान उनकी सेवा भावना की आज भी मिसाल दी जाती है। मदन जैन पिछले 40 साल से कांग्रेस के तेजतर्रार नेताओं में से एक हैं। चुनाव जीतने के सारे गुर से वाकिफ हैं। देखना ये है कि अमृत की बेहतर छवि और चुनाव जीतने के मदन के तौरतरीके के बीच भाजपा के प्रशांत जोशी कितनी चुनौती पेश कर पाते हैं।        

ठेठवार पारा वार्ड 6

कांग्रेस ने राजेश यादव को चुनाव मैदान में उतारा है। भाजपा नेता शिव चंद्राकर की पत्नी ज्योति चंद्राकर चुनाव लड़ रही है। स्कूली जीवन से राजनीति से जुड़े राजेश यादव ने 30 साल पहले छात्र राजनीति में जिस अंदाज में अपना दबदबा बनाया, उसकी चर्चा आज भी होती है। युवक कांग्रेस और एनएसयूआई जैसे संगठन का कुशल नेतृत्व करने के साथ ही राजेश ने कांग्रेस की राजनीति में लगातार सक्रिय भूमिका निभाई। उनके मुकाबले ज्योति चंद्राकर काफी कमजोर मानी जा रही है। ज्योति के पति शिव चंद्राकर यहां से 1999 में पार्षद चुने गए थे लेकिन वार्ड का विकास नहीं करा पाए। पिछले 20 साल से भाजपा की राष्ट्रीय महामंत्री सरोज पांडेय के सिपहसालार की भूमिका में हैं। इस दौरान नगर निगम की सत्ता पर सरोज पांडेय का एकतरफा दबदबा रहा। इसके बावजूद शिव चंद्राकर ने वार्डवासियों की समस्याओं पर कभी ध्यान नहीं दिया। वार्डवासी ज्योति की तुलना में धीर गंभीर राजनीति करने वाले राजेश यादव को ज्यादा तवज्जो दे रहे हैं।

तकिया पारा वार्ड 8

यहां भाजपा ने जाकिर खोखर को प्रत्याशी बनाया लेकिन बाद में सुरेंद्र बजाज को प्रत्याशी बना दिया गया। मुस्लिम बहुल वार्ड तकियापारा में कांग्रेस प्रत्याशी अब्दुल गनी काफी प्रभावशाली हैं। दो बार यहां से पार्षद चुनाव जीत चुके गनी को महापौर पद के दावेदारों में भी गिना जा रहा है। वे चुनाव लड़ने और जीतने की कला में माहिर हैं। बहुकोणीय मुकाबले में चुनावी सीन में निर्दलीय प्रत्याशी अहमद हसन और सैय्यद आसिफ ज्यादा असरदार नहीं दिख रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि जैसे-जैसे मतदान की तारीख करीब आएगी, चुनावी समीकरण बदलेगा। मस्लिम समाज के सीनियर नागरिक वोट बंटने के नुकसान बताकर एकजुटता पर जोर दे रहे हैं। बजाज को हरनाबांधा बेल्ट से ही उम्मीद है। इस बेल्ट में काफी वोट हैं लेकिन यहां के वोट एकमुश्त नहीं पड़ते, बल्कि बंट जाते हैं। अगर यहां के वोट एकजुट हुए तो गनी की मुश्किल बढ़ेगी। अभी तो यही माना जा रहा है कि बजाज की राह काफी मुश्किल भरी है।

गंजपारा वार्ड 36

कमल टावरी (भाजपा) और ऋषभ जैन (कांग्रेस) को निर्दलीय प्रत्याशी विवेक मिश्रा से कड़ी चुनौती मिल रही है। विवेक मिश्रा पिछले 10 साल से बेहद सक्रिय हैं। ऋषभ जैन ने कांग्रेस पार्षद के रूप में काफी काम किया लेकिन पिछले एक साल से वार्ड में उनकी सक्रियता में कमी आई है। अभी यह कह पाना मुश्किल है कि दोनों के मुकाबले में कमल टावरी कितने टिक पाएंगे और कितने वोट बटोर पाएंगे।

मठपारा (उत्तर ) वार्ड 4

भाजपा की लीना दिनेश देवांगन (भाजपा) और कांग्रेस की सोनिया सिन्हा के बीच सीधा मुकाबला है। वार्ड में  निर्दलीय ममता देवांगन के चुनाव मैदान में उतरने से समीकरण बिगड़ गए हैं। वे लीना देवांगन को नुकसान पहुंचा रही है। किल्ला मंदिर वार्ड 7 दीपेंद्र देशमुख (भाजपा) और मनदीप भाटिया (कांग्रेस) के अलावा कांग्रेस की बागी विभा नायक ने चुनाव मैदान में उतरकर चुनाव को दिलचस्प बना दिया है। विभा पिछले चुनाव में यहां से पार्षद चुनी गई थी। उनके चुनाव मैदान में आने के कारण मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। यहां सरदार मनदीप भाटिया काफी असरदार हैं। चुनावी सीन में दीपेंद्र की खास छवि नहीं बन पाई है।