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गली-नुक्कड़ के चाणक्य अभी से करने लगे चुनावी जीत-हार के दावे, मतदाताओं से संपर्क साधने जी-जान से जुट गए हैं प्रत्याशी

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दुर्ग। नगर निगम के चुनावी दंगल में उतरे प्रत्याशियों ने अब मतदाताओं से संपर्क करने पर पूरा जोर लगा दिया है। प्रत्याशियों के रणनीतिकार मतदान से पहले के इलेक्शन मैनेजमेंट पर फोकस कर रहे हैं लेकिन प्रत्याशी सीधे घर-घर जाकर मतदान के दिन याद रखने की अपील कर रहे हैं। चुनाव करीब आने के कारण चौक-चौराहों पर प्रत्याशियों की जीत के साथ दावे करने का दौर शुरू हो गया है। गली-गली में पार्षद चुनाव के चाणक्य अभी से जीत हार का एक तरह से फैसला सुनाने लगे हैं।

देख लेबे तैं, ए बार वो जीतही बाबू जैसे दावे रोजमर्रा की बात हो गई है। चुनावी शोर के बीच अब शहर में चुनाव जिताने के लिए दिग्गज नेताओं ने दस्तक देना शुरू हो गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने आज सिकोला भाठा में चुनाव अभियान में शामिल होते हुए जनसभा को संबोधित किया। यहां बड़ी संख्या में रहने वाले आदिवासी वर्ग के मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए सभा का आयोजन किया गया।         

पद्मनाभपुर (पूर्व ) वार्ड 46 –

कांग्रेस प्रत्याशी कमला शर्मा और भाजपा प्रत्याशी स्मिता महाडिक के बीच एकदम सीधी टक्कर होने के बावजूद काफी हद तक मुकाबला एकतरफा चल रहा है। कमला शर्मा दुर्ग शहर की इकलौती पार्षद हैं जिन्हें सर्वश्रेष्ठ पार्षद का पुरस्कार मिला। महापौर सरोज पांडेय के दूसरे कार्यकाल में पुरस्कार की शुरुआत हुई और उस समय पद्मनाभपुर की पार्षद कमला शर्मा को सबसे सक्रिय रहकर विकास कार्य कराने के कारण यह पुरस्कार दिया गया। पार्षद पद की गरिमा बनाकर वार्ड में विकास कार्य कराने के कारण विपक्ष में होने के बावजूद नगर निगम ने उन्हें सर्वश्रेष्ठ पार्षद का पुरस्कार दिया। शहर का सबसे उपयोगी मांगलिक भवन कमला शर्मा के कार्यकाल की देन है। पद्मनाभपुर में पुरानी टंकियों के जर्जर होने के बाद नई टंकियों के निर्माण की शुरुआत भी कमला शर्मा ने की। जनता मार्केट के सामने बनी टंकी का निर्माण उन्हीं के कार्यकाल में हुआ। पार्षद कार्यकाल के दौरान उनके द्वारा कराए गए विकास कार्यों को जनता आज भी याद करती है। बाद में उनके पुत्र राजेश शर्मा ने वार्ड 46 में पार्षद के रूप में सक्रिय भूमिका निभाई। इसी सक्रियता के कारण अगले चुनाव में राजेश ने वार्ड 45 से चुनावी जीत दर्ज की। भाजपा प्रत्याशी स्मिता महाडिक को वार्ड में राजनीतिक रूप से सक्रिय न होने के कारण काफी संघर्ष करना पड़ रहा है।

कसारीडीह पश्चिम वार्ड 42 –  

सरिता साहू (भाजपा) और मनी बाई गीते (कांग्रेस) के अलावा निर्दलीय प्रत्याशी पुष्पा उमरे चुनाव मैदान में हैं। मनी बाई गीते का परिवार पिछले 25 वर्षों से वार्ड के विकास कार्यों में लगातार सक्रिय रहा है। कांग्रेस प्रत्याशी मनी बाई गीते के पुत्र प्रकाश गीते पिछले चुनाव में यहां से चुनाव लड़ा और पार्षद बने। इससे पहले 1994 में प्रकाश गीते के चाचा शिवराम गीते यहां से पार्षद चुनाव जीत चुके हैं। यानी गीते परिवार पिछले ढाई दशक से वार्ड में लगातार सक्रिय है। प्रकाश गीते ने पांच साल में नगर निगम के फंड से विकास कार्य कराने के साथ ही सांसद-विधायक निधि से भरपूर विकास कार्य कराए। मनीबाई गीते का सद्व्यवहार लोगों को प्रभावित कर रहा है। भाजपा की सरिता साहू का न तो पारिवारिक बैकग्राउंड राजनीति से जुड़ा है, न वे खुद सामाजिक राजनीतिक क्षेत्रों में सक्रिय रही हैं। उन्हें साहू समाज के वोट बैंक को ध्यान में रखकर टिकट दी गई है। भाजपा के युवा नेता प्रतीक उमरे ने बागी तेवर अपनाते हुए अपनी माता पुष्पा उमरे को निर्दलीय प्रत्याशी बनाया है। पुष्पा उमरे को प्रतीक की सक्रियता का कितना लाभ मिलेगा? यह अभी भविष्य के गर्भ में है। विकास कार्य कराने और लगातार सक्रिय रहने का सीधा लाभ गीते को मिल रहा है।

पद्मनाभपुर (पश्चिम) वार्ड 45 –

हेमा शर्मा (भाजपा) और शकुन पाल (कांग्रेस) के बीच मुकाबले को निर्दलीय रेखा तिवारी के चुनाव मैदान में उतरने से यहां चुनाव दिलचस्प हो गया है। शकुन पाल के पति लीलाधर पाल पिछले कार्यकाल में वार्ड 46 से पार्षद चुने गए और विकास कार्यों को लेकर लगातार सक्रिय रहे। पार्षद के सक्रिय चेहरे रहे लीलाधर की पत्नी शकुन को इस बार वार्ड 45 से टिकट मिली है। भाजपा ने हेमा शर्मा को टिकट दी है। हेमा शर्मा की राजनीतिक सक्रियता शून्य रही। उन्हें जिला भाजपा प्रवक्ता सतीश समर्थ का समर्थन हासिल है। निर्दलीय प्रत्याशी रेखा तिवारी 1999 में वार्ड 46 की पार्षद चुनी गई। अगले चुनाव में उन्हें कांग्रेस प्रत्याशी कमला शर्मा ने पराजित कर दिया। वे साल भर पहले जनता कांग्रेस से जुड़ी। हाल ही में कांग्रेस प्रवेश किया और कांग्रेस से टिकट न मिलने पर वे अब वार्ड 45 से निर्दलीय चुनाव ल़ड़ रही हैं। आम जनता के बीच वोट की लड़ाई में लगातार सक्रियता और विकास कार्यों का पुलिंदा तीनों में से सिर्फ कांग्रेस प्रत्याशी के पास है।

सिविल लाइन (दक्षिण ) वार्ड 48 –

कांग्रेस की महेश्वरी ठाकुर और भाजपा की माधुरी मंडावी के बीच सीधा मुकाबला है। पिछले 20 साल से इस वार्ड में कांग्रेस का कब्जा रहा है। यहां से पूर्व पार्षद देव कुमार जंघेल ने लगातार सक्रियता बनाए रखकर वार्ड को अजेय बना दिया है। पिछले चुनाव में वार्ड आरक्षित होने के कारण उन्होंने माहेश्वरी ठाकुर को कांग्रेस की टिकट दिलाई और विजय का सिलसिला बरकरार रखा। इस बार भी माहेश्वरी ठाकुर ही चुनाव मैदान में है। लगातार पांच साल तक विकास कार्य कराने के साथ ही माहेश्वरी ठाकुर ने हर घर में जीवंत संपर्क बनाए रखा। यही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। वार्ड में जनता की मांग पर लगभग सभी विकास कार्यों को उन्होंने स्वीकृत कराने में सफल रही। भाजपा ने यहां से लगातार प्रत्याशी बदले हैं। चुनाव को फोकस करते हुए किसी भी भाजपा कार्यकर्ता को यहां चुनाव नहीं लड़ाया गया। यही वजह है कि इस बार भी भाजपा की मुश्किलें कम नहीं हो रही है।