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चुनावी दंगल में दमदार पार्षदों की स्थिति बेहतर, नए प्रत्याशियों की योग्यता और क्षमता को तौल रहे मतदाता

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रैली में भीड़ जुटाने का ठेका ले रहे एजेंट, कई बार दोपहर और शाम की शिफ्ट में अलग-अलग झंडा उठाए चल रही है किराए की टोलियां

नगर निगम चुनाव में इस बार कांग्रेस और भाजपा ने कई नए चेहरों को चुनाव मैदान में उतारा है। इसमें से कई प्रत्याशी पहले से राजनीति या सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहे हैं। कई प्रत्याशी ऐसे हैं जिन्हें उनके पति, पुत्र या अन्य रिश्तेदारों की सक्रियता के कारण टिकट मिली है। नए चेहरों में से ज्यादातर प्रत्याशियों का सामाजिक-राजनीतिक क्षेत्रों में योगदान शून्य रहा है। आम मतदाता इन नए नवेले चेहरों को उम्मीदों की कसौटी पर तौल रही है। वार्ड की जरूरतों और छोटे मोटे कार्य कराने की क्षमता को परखा जा रहा है। सभी प्रत्याशियों में सबसे बेहतर कौन ??? इसका आकलन किया जा रहा है। मतदाता हर प्रत्याशी को एक ही आश्वासन दे  रहे हैं – हमारा वोट आपको ही मिलेगा।

चुनावी हलचल अब तेज होने लगी है। घर-घर जनसंपर्क अभियान तेज करने के साथ ही भीड़ जुटाकर रैली निकालने, नारेबाजी करने का दौर चल रहा है। भीड़ जुटाने के लिए कई वार्डों में एजेंट तय हो गए हैं। एजेंट को ठेका दे दो, भीड़ वही जुटाएंगे। रैली में जुटाई गई भीड़ के हर चेहरे के लिए 2 सौ से 3 सौ रुपए का रेट तय है। एजेंट ही भुगतान कर रहे हैं। रैली में शामिल लोगों को नाश्ता या भोजन कराने का जिम्मा भी एजेंट की जिम्मेदारी है। प्रत्याशी इन सब कार्यों का ठेका एजेंट को दे रहे हैं। तय रेट के साथ नाश्ता मिलेगा या भोजन ? रैली में कितना समय लगेगा ? कितना पैदल चलना पड़ेगा। सब कुछ पहले से तय हो रहा है। चुनावी सीन इतना दिलचस्प है कि कई लोग दोपहर में कांग्रेस की रैली में शामिल होते हैं तो शाम के समय वे पड़ोस के वार्ड में भाजपा या निर्दलीय प्रत्याशियों की रैली में नारे लगाते हैं। रैली में भीड़ बढ़ाने का काम दो-दो शिफ्ट में चल रहा है।

पुलगांव वार्ड 55

पिछली बार वार्ड से पार्षद चुनाव जीतने वाले सुरेंद्र राजपूत की पत्नी शकुंतला राजपूत इस बार कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रही हैं। राजपूत नगर निगम के उन गिने चुने पार्षदों में से एक हैं जो विकास कार्यों और आम जनता की सुख सुविधा के लिए हर समय तैयार रहते हैं। उनका परिवार पुलगांव वार्ड की जनता को अपना परिवार मानता है। यही वजह है कि हर घर में राजपूत परिवार का सीधा और जीवंत संपर्क है। भाजपा से देवकी दुबे को इस चुनाव में अपनी ताकत सिद्ध करना है। यह काम राजपूत परिवार की छवि के कारण काफी कठिन माना जा रहा है।

कचहरी वार्ड 38

पूर्व पार्षद नीता जैन के चुनाव मैदान में उतरने से भाजपा प्रत्याशी ममता कुशल जैन और कांग्रेस प्रत्याशी सरस्वती सिन्हा की मुश्किलें बढ़ गई हैं। नीता जैन उन पार्षदों में से हैं जिन्हें सिर्फ वार्ड ही नहीं बल्कि पूरे शहर की समस्याओं को समय-समय पर उठाने के कारण जाना जाता है। दुर्ग कोर्ट में एडवोकेट होने के साथ ही वे बार एसोसिएशन की अध्यक्ष रह चुकी हैं। अपने मुद्दों को लेकर नीता किसी से भी भिड़ने से पीछे नहीं हटती। जनसमस्याओं को लेकर डटी रहने वाली नीता की स्थिति बेहतर है। वार्ड में जैन और अग्रवाल समाज के वोटर ज्यादा हैं। मुश्किल ये है कि नीता के अलावा दो और प्रत्याशी जैन समाज से चुनाव लड़ रहे हैं। इसके कारण वोट बंटने का खतरा है। ऐसी स्थिति में कांग्रेस प्रत्याशी सरस्वती सिन्हा को फायदा हो सकता है।

गायत्री मंदिर वार्ड 25

कांग्रेस के पार्षद व निगम सभापति राजकुमार नारायणी का दबदबा लगातार गायत्री मंदिर वार्ड में कायम रहा है। उनकी पत्नी सोनम नारायणी भी चुनाव जीत चुकी है। पिछला चुनाव जीतने के बाद नारायणी नगर निगम के सभापति बने। इस दौरान उन्होंने पांच साल के कार्यकाल में वार्ड में विकास कार्य कराने के साथ ही निगम के भ्रष्टाचार को लगातार उजागर किया। कई बार उनके भंडाफोड़ अभियान के कारण दोषी अफसरों के खिलाफ कार्रवाई भी हुई। मतदाताओं की समस्याओं का निराकरण करने लगातार सक्रिय रहने के साथ ही वे मतदाताओं के सुख दुख में हमेशा भागीदार रहे हैं। भाजपा ने कुलदीप सिंह चौहान को प्रत्याशी बनाया है। चौहान को वार्ड में मतदाताओं से संपर्क साधने और विश्वास जीतने में कितनी सफलता मिलती है? यह देखा जाना अभी बाकी है।

संतराबाड़ी वार्ड 26

कांग्रेस प्रत्याशी सत्यवती वर्मा वार्ड की पार्षद रह चुकी हैं। वे दूसरी बार चुनाव लड़ रही हैं। यह वार्ड 1994 से पूर्व महापौर आरएन वर्मा के कब्जे में है। हर बार भाजपा ने उन्हें हराने के लिए नए प्रत्याशी पर दांव खेला और हर बार उन्हें पराजय मिली। वार्ड में काफी संख्या में सिंधी वोटर होने के कारण इस बार भाजपा ने पूर्णिमा मोटवानी को प्रत्याशी बनाया है। इससे पहले भी सिंधी समाज से प्रत्याशी खड़े किए गए लेकिन वर्मा का विजय रथ कभी नहीं रुका। पूर्व महापौर होने और वरिष्ठ पार्षद के रूप में आरएन वर्मा ने हमेशा वार्ड के हितों का ध्यान रखा। नागरिकों की समस्याओं का हर हाल में निराकरण करने की खूबी के कारण वार्ड के मतदाता उन्हें विजयी बनाते हैं।

मोतीपारा वार्ड 30

भाजपा ने यहां से विनीत ताम्रकार को प्रत्याशी बनाया है जबकि कांग्रेस प्रत्याशी भोला महोबिया यहां से तीसरी बार चुनाव लड़ रहे हैं। इससे पहले भोला महोबिया वार्ड से दो बार पार्षद चुने गए हैं। उनके वार्ड में मेन मार्केट का आधा हिस्सा आता है। मार्केट की समस्याओं को सुलझाने के साथ ही मतदाताओं से जीवंत संपर्क और सादगी भरे विनम्र व्यवहार के साथ समस्याओं का निराकरण तत्काल कराने की कला में भोला माहिर हैं। उनका यही हुनर मतदाताओं को प्रभावित करता है। भाजपा ने विनीत ताम्रकार को प्रत्याशी बनाया है। विनीत को अपने समाज के वोट पर भरोसा है। पर, आम मतदाता भोला महोबिया पर ज्यादा भरोसा कर रहे हैं।

पोटिया कला (उत्तर) वार्ड 53 

भाजपा प्रत्याशी अजय वर्मा और कांग्रेस प्रत्याशी भोजराज यादव के बीच संघर्ष को भाजपा की पार्षद रही सविता साहू ने कठिन बना दिया है। अजय यहां से पार्षद चुनाव जीत चुके हैं। वार्ड में उनका जीवंत संपर्क और विकास कार्य कराने के कारण अजय यहां के मजबूत प्रत्याशी हैं। कांग्रेस ने भोजराज यादव पर भरोसा किया है। कांग्रेस पार्टी के कार्यक्रमों में लगातार सक्रियता के साथ सांसद मोतीलाल वोरा और विधायक अरूण वोरा की निधि से विकास कार्यों की मांग करने में भोजराज यादव पीछे नहीं रहे। मतदाताओं से बेहद विनम्र व्यवहार उनकी ताकत है। पिछले चुनाव में वार्ड की पार्षद चुनी गई सविता साहू ने टिकट न मिलने पर भाजपा से बगावत कर चुनावी समर में उतर गई। सविता साहू ने 5 साल तक वार्ड में लगातार सक्रिय रहकर विकास कार्य कराए हैं। चुनाव में टिकट न मिलने से उन्हें जनता की भरपूर सहानुभूति मिल रही है। अगर वार्ड के भाजपा वोट बंटे तो सीधा फायदा कांग्रेस को होगा।