Breaking News

Top News

इन 6 वार्डों में कांग्रेस की जबर्दस्त मोर्चेबंदी, भाजपा की मुश्किलें बढ़ी

Share Now

शहर के दक्षिण में बसे 6 वार्डों में कांग्रेस की चुनावी रणनीति के कारण भाजपा कमजोर पड़ रही है। कांग्रेस प्रत्याशियों की जबर्दस्त तैयारियों के कारण निर्दलीय प्रत्याशी भी पिछड़ रहे हैं। कांग्रेस खेमे से कई प्रमुख नेताओं ने यहां चुनावी कमान संभाल रखी है। विधायक अरूण वोरा खुद सभी वार्डों के चुनाव प्रचार की तैयारी और जनसंपर्क अभियान की रिपोर्ट ले रहे हैं। भाजपा नेता एकजुट होकर चुनाव प्रचार अभियान शुरू नहीं कर पाए हैं। प्रदेश के गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू का निवास वार्ड 53 में होने के कारण यहां के सभी 6 वार्डों में कांग्रेस प्रत्याशियों को लाभ मिल रहा है।

यहां कांग्रेस नेत्री रत्ना नारमदेव, लोकसभा युवा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अय्यूब खान, कांग्रेस नेत्री सुमन पांडेय कांग्रेस कार्यकर्ताओं की टीम ने सुनियोजित तरीके से चुनावी रणनीति बनाकर प्रचार अभियान तेज कर दिया है। अय्यूब खान न सिर्फ लोकसभा स्तर पर बल्कि बस्तर, बिलासपुर जिलों के विधानसभा क्षेत्रों में भी चुनाव की कमान संभाल चुके हैं। वे यहां की यूथ टीम के साथ सभी 6 वार्डों में लगातार सक्रिय हैं। उनकी नजर एक-एक वोटर पर है। शहर कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री रत्ना नारमदेव ने भी पिछले चार विधानसभा चुनाव और महापौर चुनावों में शहर स्तर पर चुनाव संचालन समिति में रहकर काम किया है। उनके अनुभवों का लाभ भी इन वार्डों में मिल रहा है। भाजपा कैंप में टिकट वितरण से असंतोष और गुटीय लड़ाई के कारण निराशा छाई है।

बोरसी पश्चिम वार्ड 49 में कांग्रेस प्रत्याशी राकेश शर्मा के चुनाव मैदान में उतरने से यह सीट हाई प्रोफाइल हो गई है। राकेश की पूरे शहर में राजनीतिक सामाजिक क्षेत्रों में सक्रियता और विनम्र छवि के कारण इस वार्ड में कांग्रेस की जीत तय दिख रही है। भाजपा ने आशुतोष दुबे को टिकट दी है। आशुतोष का राजनीतिक या सामाजिक क्षेत्रों में कोई योगदान नहीं रहा। टिकट मिलने की उनकी एकमात्र योग्यता भाजपा का गुणगान करने वाले कवि सुरेंद्र दुबे का पुत्र होना है। आशुतोष को वार्ड के भाजपा नेताओं का समर्थन भी नहीं मिल रहा है। मतदाताओं के लिए वे नितांत नया चेहरा हैं। पिछले चुनाव में पार्षद रहे भास्कर कुंडले निर्दलीय प्रत्याशी हैं। उनके लगातार सक्रिय न रहने का खामियाजा उन्हें चुनाव में भुगतना पड़ रहा है।

वार्ड 50 में मनोज यादव (भाजपा) और ज्ञानदास बंजारे (कांग्रेस) के बीच सीधा मुकाबला है। बंजारे पिछले चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीतकर पार्षद पद पर निर्वाचित हो चुके हैं। उनकी साफ सुथरी छवि और विकास कार्यों के लिए लगातार सक्रियता के कारण वे बेहतर स्थिति में हैं। इसी तरह वार्ड 51 में पोषण लाल साहू (कांग्रेस) और अश्वनी साहू (भाजपा) के बीच मुकाबला है। पोषण साहू को उनकी सक्रियता और विकास कार्य कराने जुझारू छवि का लाभ मिल रहा है।

वार्ड 52 में गायत्री साहू (भाजपा) और एमन साहू (कांग्रेस) के बीच चुनावी लड़ाई में गायत्री साहू बेहतर स्थिति में हैं। वे पिछले दो चुनाव जीतकर पार्षद रही और वार्ड में लगातार सक्रिय रही जिसका लाभ उन्हें मिल रहा है। वार्ड 53 में अजय वर्मा (भाजपा) दो बार पार्षद चुने जाने के साथ ही नगर निगम में एमआईसी मेंबर रह चुके हैं। बीते पांच साल में वे वार्ड में सक्रिय नहीं रहे। इस अवधि में भोजराज यादव (कांग्रेस) को विकास कार्य कराने में लगातार सक्रियता का लाभ मिल रहा है। वार्ड से पिछले चुनाव में पार्षद रही सविता साहू को भी वार्ड की जनता का अच्छा समर्थन मिल रहा है। यहां भाजपा के वोटों का बंटवारा अजय वर्मा और सविता साहू के बीच हो रहा है। कांग्रेस नेता इस स्थिति का फायदा उठाकर चुनावी जीत की रणनीति बना रहे हैं।    

वार्ड 54 में अनूप चंदानिया (कांग्रेस) और देवेंद्र टंडन (भाजपा) के बीच चुनावी लड़ाई है। पिछली बार पार्षद चुनाव जीतने के बाद अनूप चंदानिया ने वार्ड के विकास के लिए पांच साल तक लगातार मोर्चेबंदी की। भाजपा की सत्ता होने के कारण कई बार विकास कार्य कराने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। विकास कार्यों के लिए उन्हें कई बार धरना-आंदोलन करना पड़ा। तगड़ी मोर्चेबंदी के बावजूद अनूप चंदानिया हर बार भाजपा नेताओं पर भारी पड़े।