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कहीं भीतरघात, तो कहीं खुलेआम किया घात-प्रतिघात, टिकट वितरण से नाराज कार्यकर्ताओं ने चुनाव में पार्टी नेताओं को दिखाई अपनी ताकत     

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सीजी न्यूज डॉट कॉम

नगरीय निकाय चुनाव के लिए आज मतदान की प्रक्रिया पूरी हो गई। दुर्ग नगर निगम के 60 वार्डों में एकाध छिटपुट घटनाओं को छोड़कर बाकी सभी वार्डों में शांतिपूर्वक मतदान हुआ। मतदान के साथ ही राजनीतिक स्तर पर जीत-हार के दावे शुरू हो गए हैं। इधर, मतदान की थकान के बीच दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रत्याशी अब भीतरघात या खुला घात करने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं की सूची तैयार कर रहे हैं। भीतरघात करने वाले कार्यकर्ताओं, संगठन पदाधिकारियों की पतासाजी की जा रही है। पार्टी स्तर पर शिकायतों का दौर भी शुरू हो गया है।

निगम चुनाव के लिए टिकट की घोषणा के बाद से ही दोनों राजनीतिक दलों में असंतोष के स्वर फूटे। कई लोगों ने बगावती तेवर अपनाते हुए निर्दलीय चुनाव लड़ा तो कई नाराज लोगों को पार्टी के प्रमुख नेताओं ने मान मनौव्वल कर समझा लिया। बड़ी तादाद उनकी रही जिन्होंने असंतोष को मन में दबाए रखा। यही असंतोष चुनाव में घात बनकर फूटा है। टिकट से वंचित नेताओं ने टिकट बांटने वाले नेताओं को सबक सिखाने की नीयत से भीतरघात किया। खास बात ये रही कि कांग्रेस की तुलना में भाजपा में बगावत, खुलाघात और भीतरघात ज्यादा हुआ। जमकर हुआ।

इन वार्डों में हुआ घात प्रतिघात का खेल

किल्लामंदिर वार्ड 7 में कांग्रेस और भाजपा प्रत्याशियों को भीतरघात का सामना करना पड़ा। वार्ड के एक पूर्व पार्षद ने यहां अपनी पार्टी यानी कांग्रेस के प्रत्याशी की बजाय निर्दलीय प्रत्याशी को समर्थन दिया। इसी वार्ड में भाजपा के शक्तिशाली गुट से ताल्लुक रखने वाले एक पूर्व पार्षद ने अपने समर्थकों के साथ पार्टी के पक्ष में कामचलाऊ तरीके से काम किया। पार्टी प्रत्याशी को निबटाने का काम पूरी शिद्दत से किया गया। नतीजे बताएंगे कि घात कितना सफल रहा।

तकियापारा वार्ड 8 में टिकट वितरण से आहत भाजपा कार्यकर्ताओं ने वार्ड में सिर्फ खानापूर्ति के लिए काम किया। मुस्लिम बहुल वार्ड में हर बार की तरह इस बार भी भाजपा ने मुस्लिम समाज से प्रत्याशी तय किया लेकिन बाद में टिकट बदल कर पड़ोस के वार्ड के पूर्व पार्षद सुरेंद्र बजाज को प्रत्याशी बना दिया। वार्ड में भाजपा के मुस्लिम नेताओं ने इसका तात्कालिक विरोध तो नहीं किया लेकिन यहां के सभी भाजपा नेताओं ने खुद को चुनावी समर से अलग कर लिया। भाजपा नेता दो हिस्सों में बंटे और भीतरघात करते हुए दो अलग-अलग प्रत्याशियों को समर्थन दे दिया।

स्वामी विवेकानंद वार्ड 9 में मुखर भाजपा पार्षद ज्ञानेश्वर ताम्रकार की टिकट कटी तो उन्होंने बगावत कर दी। उनके समर्थन में अधिकांश भाजपा नेताओं ने पार्टी से खुलाघात किया। खुलेआम घात करने से बचे कार्यकर्ताओं ने मतदान से ठीक दो दिन पहले कसर पूरी कर दी। यहां जमकर भीतरघात किया गया। तितुरडीह वार्ड 21 में भाजपा ने पार्षद अरूण सिंह की टिकट काटकर युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष रहे संजय सिंह को टिकट दी। सूत्रों के अनुसार संजय ने टिकट भी नहीं मांगी थी। इसके बावजूद उन्हें टिकट देने पर अरूण सिंह ने बगावत कर दी। यहां भाजपा की जमीनी टीम के ज्यादातर लोगों ने पार्टी से खुलाघात किया। जो बच गए, उन्होंने भीतरघात कर दिया।

दीपक नगर वार्ड 23 में भाजपा प्रत्याशी प्रियंका जलकारे को टिकट दी गई। यहां भाजपा के शक्तिशाली गुट से ताल्लुक रखने वाले एक भाजपा नेता शुरुआती दौर में चुप्पी साधे रहे। अंतिम तीन दिनों में उन्होंने कांग्रेस के पक्ष में घर-घर जाकर प्रचार किया। मतदान के दौरान दिन भर कांग्रेस कैंप में सक्रिय रहे। यहां कांग्रेस के अधिकांश कार्यकर्ता एकजुट दिखे लेकिन कई कार्यकर्ताओं ने निर्दलीय प्रत्याशी मीना सिंह को अंदरूनी तौर पर समर्थन देते हुए तगड़ी मोर्चेबंदी की।

आमदी मंदिर वार्ड 24 में कांग्रेस प्रत्याशी के लिए घूम-घूम कर वोटर पर्ची बांटने वाले कार्यकर्ता निर्दलीय प्रत्याशी दीपक जैन के समर्थन में भीतरघात करने से नहीं चूके। यहां भाजपा ने जबर्दस्त एकजुटता दिखाई। कसारीडीह ( पश्चिम ) वार्ड 42 में कांग्रेस प्रत्याशी मनीबाई गीते के खिलाफ वार्ड के ही एक कांग्रेस नेता ने जमकर घात किया। कांग्रेस प्रत्याशी ने इसकी शिकायत कर दी है। भाजपा कार्यकर्ताओं ने पार्टी के घोषित प्रत्याशी सरिता साहू के खिलाफ भीतरघात किया। भीतरघातियों ने पार्टी से बगावत करने वाले पूर्व एल्डरमैन प्रतीक उमरे की माता पुष्पा उमरे ( निर्दलीय प्रत्याशी ) को समर्थन दिया।   

बोरसी पश्चिम वार्ड 49 में टिकट वितरण से नाराज भाजपा कार्यकर्ता दो भागों में बंट गए। आधे इधर और आधे उधर। यहां के आधे भाजपा कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस प्रत्याशी राकेश शर्मा का साथ दिया। शेष बचे कार्यकर्ता निर्दलीय प्रत्याशी भास्कर कुंडले के पक्ष में पार्टी से भीतरघात करते रहे।  कातुलबोड (उत्तर) वार्ड 59 में भाजपा की टिकट चंद्रकला खिचरिया को मिली लेकिन ज्यादातर कार्यकर्ता शिवेंद्र परिहार के साथ रहे। कई कार्यकर्ताओं ने खुलेआम शिवेंद्र का साथ दिया तो कई ने भीतर से समर्थन देकर घात लगाया।

( पूरी खबर विश्वस्त सूत्रों के हवाले से )