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दुर्ग नगर निगम – महापौर पद की रेस में 8 पार्षद !!!

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सीजी न्यूज डॉट कॉम

सिटी सरकार के नुमाइंदे चुने जा चुके हैं। दुर्ग शहर के 60 वार्डों में कांग्रेस के 30 पार्षद चुने गए हैं जबकि भाजपा के 16 और 13 निर्दलीय पार्षद चुने गए हैं। एक पार्षद जनता कांग्रेस से चुना गया है। 20 साल तक भाजपा के कब्जे में रहे दुर्ग नगर निगम की सत्ता पर अब कांग्रेस का कब्जा हो चुका है। सत्ता के समीकरण स्पष्ट होने के बावजूद अभी भी यह तय नहीं है कि महापौर कौन बनेगा ? सभापति की जिम्मेदारी किसे मिलेगी ? और सिटी सरकार की केबिनेट में किन-किन चेहरों को शामिल किया जाएगा ?

दुर्ग शहर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के गृह जिला का मुख्यालय है। दिग्गज कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा का गृहनगर है। गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू भी इसी शहर में रहते हैं। बहुमत के बावजूद विधायक अरूण वोरा समेत कांग्रेस पार्टी के प्रमुख नेताओं के सामने  महापौर चयन में कई मुश्किलें आ रही है। किसे महापौर बनाएं और किसे नाराज करें। 8 पार्षद ऐसे हैं जिन्हें महापौर की रेस में सबसे ज्यादा दमदार माना जा रहा है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता मदन जैन, अब्दुल गनी और धीरज बाकलीवाल इस रेस में सबसे आगे बताए जा रहे हैं। मगर, अंदरखाने की खबर कुछ अलग तस्वीरें भी दिखा रही हैं।

अंदरूनी सूत्रों के अनुसार विधायक अरूण वोरा के बेहद विश्वस्त सहयोगी नंदू महोबिया के भाई भोला महोबिया, पूर्व महापौर आरएन वर्मा की पत्नी सत्यवती वर्मा, पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रामानुजलाल यादव के भतीजे राजेश यादव, पिछली निगम परिषद में सभापति चुने गए राजकुमार नारायणी, वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा के गृहवार्ड मोहन नगर के पार्षद संजय कोहले का नाम भी महापौर पद के दावेदारों में गिना जा रहा है।

कांग्रेस नेताओं के लिए यह मुश्किल ये है कि महापौर पद के लिए आखिर किसका नाम आगे करें ? एक प्रस्ताव यह चल रहा है कि पार्षदों की रायशुमारी कर महापौर का नाम आगे किया जाए। एक दूसरा प्रस्ताव यह भी है कि वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सहमति से महापौर का नाम तय कर लिया जाए। सूत्र बता रहे हैं कि अगले दो दिनों में सब कुछ तय कर लिया जाएगा।

मदन जैन और अब्दुल गनी प्रबलतम दावेदार

महापौर के प्रबलतम दावेदारों में दो पार्षद शामिल हैं। मदन जैन और अब्दुल गनी। दोनों पार्षदों के समर्थक खुले तौर पर महापौर पद के लिए लॉबिंग करने लगे हैं। दोनों पार्षदों को शीर्ष नेताओं से हरी झंडी का इंतजार है। वरिष्ठता के लिहाज से दोनों पार्षदों का लंबा राजनीतिक अनुभव है। नगर निगम में भी दोनों वरिष्ठ पार्षदों को अनुभवी माना जाता है। नगर निगम की प्रशासनिक समझ, शहर की जरूरतों और विकास की संभावनाओं के मामले में दोनों पार्षद सबसे ज्यादा प्रभाव रखते हैं। दोनों पार्षद तेजतर्रार हैं। अपने राजनीतिक जीवन में विपक्ष पर बयानों के बम-गोले बरसाने में पारंगत रहे हैं। कांग्रेस से कभी बगावत नहीं की। कांग्रेस के प्रति जबर्दस्त निष्ठावान होना उनकी सबसे बड़ी खूबी है। दोनों प्रदेश स्तर के पदाधिकारी रह चुके हैं। पिछले कई विधानसभा चुनावों में अरूण वोरा के इलेक्शन मैनेजमेंट में गनी की अहम भूमिका रही है।

वोरा के साथ सीएम हाउस से कनेक्शन के कारण सत्यवती का दावा मजबूत   

पूर्व महापौर आरएन वर्मा की पत्नी सत्यवती वर्मा संतराबाड़ी वार्ड 26 से दूसरी बार पार्षद चुनी गई हैं। आरएन वर्मा पिछले कई साल से शहर कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में मेहनत कर रहे हैं। विधायक अरूण वोरा के विश्वस्त सहयोगी भी हैं। पैतृक गांव मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के विधानसभा क्षेत्र पाटन में होने के कारण सीएम हाउस से वर्मा का गहरा कनेक्शन है। भूपेश बघेल के मुख्यमंत्री बनने के बाद निगम-मंडल अध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल रहे वर्मा अक्सर भिलाई स्थित सीएम हाउस में सक्रिय देखे गए हैं।

भोला, धीरज और राजेश का दावा इसलिए मजबूत

विधायक अरूण वोरा के बेहद करीबी धीरज बाकलीवाल पहली बार पार्षद बने हैं। लेकिन, वोरा के चुनाव प्रबंधन में पिछले 30 साल से अहम भूमिका निभाते रहे हैं। शांत स्वभाव, बेहद विनम्र और साफ सुथरी छवि उनके दावे को पुख्ता बनाते हैं। दुर्ग से कांग्रेस के प्रथम सांसद मोहनलाल बाकलीवाल और दिग्गज कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा के पारिवारिक, राजनीतिक संबंध आज के नहीं बल्कि 50 साल पुराने हैं। महापौर पद के बाकी दावेदारों की राजनीतिक पृष्ठभूमि बाद के दौर की है।

यही खूबियां राजेश यादव को महापौर का प्रबल दावेदार बना रही है। साइंस कॉलेज के छात्रसंघ अध्यक्ष और रविवि के पदाधिकारी रह चुके हैं। एनएसयूआई और युवा कांग्रेस के जिला अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल चुके राजेश पहली बार पार्षद चुने गए हैं। सांसद मोतीलाल वोरा ने मुख्यमंत्री बनने के बाद अपने करीबी रामानुजलाल यादव को अविभाजित मध्यप्रदेश में मत्स्य निगम का अध्यक्ष बनाकर मंत्री स्तर का ओहदा दिया था। बाद में वोरा ने उन्हें छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया। राजेश उन्हीं रामानुजलाल यादव के भतीजे हैं।

भोला महोबिया भी शांत छवि, विनम्र स्वभाव और साफ सुथरी छवि होने के कारण महापौर पद के प्रबल दावेदारों में गिने जा रहे हैं। उनके भाई नंदू महोबिया उन शख्सियतों में शामिल हैं जिन्हें विधायक अरूण वोरा का बेहद विश्वस्त माना जाता है। नंदू महोबिया ने युवक कांग्रेस से राजनीति शुरू की लेकिन उसके बाद पद प्रतिष्ठा की दौड़ से बाहर हो गए। राजनीतिक ओहदे लेने की होड़ में कभी शामिल नहीं हुए। उनके भाई भोला महोबिया भी नंदू की तरह स्वभाव से विनम्र और सीधे सरल हैं। वोरा से करीबी होने का फायदा उन्हें मिल सकता है।

नारायणी, कोहले भी दौड़ में शामिल

पिछले नगर निगम परिषद में सभापति रह चुके राजकुमार नारायणी महापौर पद की दौड़ में शामिल हैं। पिछले कार्यकाल में नगर निगम की सत्ता पर काबिज भाजपा की सिटी सरकार ने सबसे ज्यादा हमले नारायणी पर ही किए। नारायणी ने न सिर्फ इन हमलों का जवाब दिया बल्कि कई बार निगमसभा की आसंदी पर रहते हुए सत्तापक्ष की मुश्किलें भी बढ़ाई। विकास कार्यों में भ्रष्टाचार के मामले उठाकर वे पांच साल तक लगातार सुर्खियों में रहे।

सांसद मोतीलाल वोरा के गृह वार्ड मोहन नगर में रहने वाले संजय कोहले पड़ोस के वार्ड से चुनाव लड़ते हैं और करिश्माई अंदाज में पांच बार चुनाव जीत चुके हैं। चार बार वे खुद चुनाव लड़कर पार्षद बने। पिछली बार उनकी पत्नी सरला कोहले पार्षद चुनी गई। संजय ने हमेशा कांग्रेस पार्टी के साथ ही विधायक अरूण वोरा के प्रति हमेशा निष्ठा जताई है। बेदाग छवि और विनम्र स्वभाव के कारण उनके समर्थकों सहित कई पार्षद व पूर्व पार्षद उन्हें महापौर पद का दावेदार मान रहे हैं।