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हिंदुस्तान जिंदाबाद के नारों के बीच सीएए और एनआरसी का कड़ा विरोध, हजारों लोगों ने धरना देकर चेतावनी दी, डिवाइड एंड रूल का मंसूबा पूरा नहीं होने देंगे 

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सीजी न्यूज डॉट कॉम

नागरिकता संशोधन एक्ट ( सीएए )और एनआरसी के विरोध में आज दुर्ग में हजारों लोगों ने धरना दिया। शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद सभी मस्जिदों से मुस्लिम समाज के नागरिक काली पट्‌टी बांधकर जुलूस की शक्ल में पुराना बस स्टैंड पहुंचे। यहां सभी मस्जिदों के इमामों की मौजूदगी में धरना प्रदर्शन किया गया। करीब 3 घंटे तक धरना स्थल पर मजहबी एकता के साथ हिंदुस्तान जिंदाबाद के नारे गूंजते रहे। इन्हीं नारों के बीच सीएए और एनआरसी के खिलाफ आवाज बुलंद होती रही। धरना सभा में सिख समाज, बौध्द समाज, क्रिश्चियन समाज और हिंदू समाज के नागरिकों ने मौजूद रहकर सीएए और एनआरसी का कड़ा विरोध किया।

सीएए और एनआरसी के विरोध में काली पट्‌टी बांधकर आए हजारों लोगों को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि यह देश हर धर्म और समाज का है। अनेकता में एकता और धर्मनिरपेक्षता इस देश की पहचान है। केंद्र सरकार देश में धर्म के आधार पर नागरिकता देने का कानून लागू कर देश के संविधान की हत्या करना चाहती है। इसके विरोध में पूरे देश में प्रदर्शन हो रहे हैं। अंग्रेजों ने डिवाइड एंड रूल की नीति अपनाकर देश में सैकड़ों साल तक राज किया। मौजूदा केंद्र सरकार भी इसी तर्ज पर देश में सत्ता पर काबिज रहना चाहते हैं। वोट बैंक की राजनीति करने के लिए हिंदुओं और मुसलमानों को लड़ाने की साजिश की जा रही है।

वक्ताओं ने कहा कि देश के सभी धर्मों के नागरिक इस काले कानून का विरोध कर रहे हैं। यह देश भाईचारे की मिसाल है। देश में हर धर्म से जुड़े नागरिकों ने संविधान से छेड़छाड़ का विरोध किया है। सरकार चलाने में नाकाम रही केंद्र सरकार लोगों को धर्म के आधार पर बांटने के लिए कानून बना रही है। उनका मंसूबा पूरा नहीं होने दिया जाएगा। केंद्र सरकार इस कानून को तत्काल वापस लेकर मुल्क में अमन का माहौल बनाने का काम करे। वक्ताओं ने कहा कि ये लड़ाई किसी एक मजहब की लड़ाई नहीं है,बल्कि देश को और संविधान को बचाने की लड़ाई है।

धरना सभा के दौरान हिंदुस्तान जिंदाबाद और हिंदी हैं हम वतन हैं से गुलिस्तां हमारा के नारे के बीच वक्ताओं ने साफ कहा कि हिंदुस्तान की आजादी ऐ लिए सभी मजहब के लोगों ने खून बहाया है। आजादी की लड़ाई में हर धर्म के लोगों ने हिस्सा लिया और यह देश सबका है। जामा मस्जिद दुर्ग के पेश इमाम मुफ्ती शाहनवाज ने कहा कि 6 अप्रैल 1980 को जिस भाजपा का जन्म हुआ, उसके नेता देश के नागरिकों से 1971 के पहले का रिकॉर्ड कैसे मांग रहे हैं। जो इस देश में रहता है, वो इस देश का नागरिक है। नागरिकों से उनकी नागरिकता का सबूत नहीं मांगा जाना चाहिए। हम सबूत नहीं देंगे।

विधायक अरूण वोरा ने कहा कि यह देश सबका है। किसी से नागरिकता का सबूत नहीं मांगा जाना चाहिए। देश चलाने में एनडीए सरकार पूरी तरह नाकाम रही है। अपनी नाकामी छिपाने के लिए नागरिकता कानून और एनआरसी के जरिये देश के नागरिकों को लड़ाने की कोशिश की जा रही है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस कानून का कड़ा विरोध किया है। हमारा विरोध लगातार जारी रहेगा। सभा के अंत में एसडीएम को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया।

ज्ञापन में कहा गया है कि सीएए और एनआरसी का पूरे देश में विरोध होने के कारण इस कानून को तत्काल वापस लिया जाना चाहिए। ताकि, देश में अमन और शांति का माहौल बना रहे। धरना सभा को मौलाना अरशद रिजवी, बौद्ध समाज के अनिल मेश्राम, सिख समाज से फत्ते सिंह भाटिया, मौलाना शमशेर अहमद, मौलाना कलीम अशरफी, अब्दुल गनी, हमीद खोखर, हाजी सलीम, अब्दुल लतीफ, जहांगीर आजमी, अय्यूब खान, विलसन डिसूजा, शेख सिराज, शराफत अली, गुरदीप सिंह भाटिया, शफी जुनैद, नासिर खोखर, जुनैद आजमी सहित बड़ी तादाद में मुस्लिम नागरिकों सहित अन्य समाजों के नागरिक मौजूद थे।