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महापौर प्रत्याशी के लिए समन्वय बनाने एआईसीसी मेंबर शानू वोरा दुर्ग पहुंचे, चारों दावेदारों को चर्चा के लिए बुलाया      

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एआईसीसी मेंबर शानू वोरा शाम के समय विधायक अरूण वोरा के निवास पहुंचे।

सीजी न्यूज डॉट कॉम

महापौर पद के लिए लामबंदी करने वाले चार दावेदारों के दिल्ली से लौटने के बाद कांग्रेसी राजनीति गरमा गई है। अंदरखाने से आ रही खबरों के अनुसार कांग्रेस के संगठन नेताओं ने दावेदारों की लामबंदी को गंभीरता से लिया है। प्रदेश स्तर के कई कांग्रेस नेताओं ने इस पर नाराजगी जताई है। सूत्र बता रहे हैं कि वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा के निर्देश पर एआईसीसी के सदस्य शानू वोरा शनिवार को शाम 7 बजे वोरा निवास पहुंचे। यहां लामबंदी करने वाले चारों दावेदारों को चर्चा के लिए बुलाया गया है।

वोरा निवास के बाहर गहमागहमी बढ़ी

गौरतलब है कि दुर्ग नगर निगम के लिए कांग्रेस पर्यवेक्षक धनेंद्र साहू ने 1 जनवरी को सभी कांग्रेस पार्षदों से वन टू वन चर्चा की थी। उन्होंने कांग्रेस के सीनियर नेताओं के साथ भी मंत्रणा की। पार्षदों से रायशुमारी के दौरान ज्यादातर कांग्रेस पार्षदों ने पर्यवेक्षक से कहा कि उन्हें कांग्रेस हाईकमान का फैसला मंजूर होगा। करीब आधा दर्जन पार्षदों ने महापौर पद के लिए दावा करने के साथ ही यह भी जोड़ा कि कांग्रेस हाईकमान से घोषित महापौर प्रत्याशी सभी को मान्य होगा।

इस कवायद के महज दो दिन बाद चार दावेदारों के दिल्ली रवाना होकर लामबंदी करने पर प्रदेश कांग्रेस के कई नेताओं ने नाराजगी जताई है। दुर्ग शहर कांग्रेस के कई नेताओं का कहना है कि कांग्रेस महासचिव मोतीलाल वोरा ने लामबंदी कर रहे चार में से तीन पार्षदों  को राजनीति में पर्याप्त अवसर दिए हैं। कांग्रेस पार्षद सत्यवती वर्मा के पति आरएन वर्मा 1994 में पहली बार पार्षद चुने गए थे। उस समय  कांग्रेस ने उन्हें महापौर बनाया। बाद में वे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में चले गए। कांग्रेस वापसी के बाद उन्हें शहर कांग्रेस अध्यक्ष बनाया गया। पिछले कई साल से वे शहर कांग्रेस अध्यक्ष हैं।

पिछले चुनाव में अब्दुल गनी ने सभापति पद के लिए दावेदारी की थी लेकिन कांग्रेस ने राजकुमार नारायणी को सभापति पद के लिए प्रत्याशी बनाया। मदन जैन ने 2004 में महापौर प्रत्याशी बनाने की मांग की और कांग्रेस ने उन्हें प्रत्याशी घोषित किया लेकिन वे बड़े अंतर से सरोज पांडेय से चुनाव हार गए। अब्दुल गनी ही ऐसे दावेदार हैं जिन्हें न तो महापौर की टिकट मिली न सभापति की कुर्सी के लिए चुना गया। अब तक सत्ता में भागीदारी न मिलने के कारण ही गनी महापौर पद के लिए दावेदारी कर रहे हैं।