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पूरे देश में वाटर रिचार्जिंग पर अब आई जागरूकता, मुख्यमंत्री ने 20 साल पहले पाटन में कराया था सफल प्रयोग, केंद्रीय अफसर बोेले – कमाल का काम हुआ

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2001 में गजरा नाले में हुआ था वाटर रिचार्ज का काम, केंद्र सरकार के जलशक्ति मंत्रालय के टास्क फोर्स के सदस्यों ने देखा गजरा वाटरशेड

सीजी न्यूज डॉट कॉम

केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय के टास्क फोर्स के सदस्य और आगा खान रुरल सपोर्ट प्रोग्राम के सीईओ अपूर्व ओझा, महाराष्ट्र सरकार में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के पूर्व प्रमुख सचिव अजय जैन व पीएचई विभाग के पूर्व चीफ इंजीनियर हरीश के हिंगोरानी ने आज पाटन में गजरा वाटरशेड का निरीक्षण किया। जिस वाटर रिचार्जिंग के कार्य को लोग आज गंभीरता से ले रहे हैं, उसे 2001 में तत्कालीन पीएचई मंत्री भूपेश बघेल ने पाटन क्षेत्र में बेहतर वाटर रिचार्जिंग करने के लिए ये काम करा दिया था। बघेल की दूरदर्शिता की केंद्रीय अफसरों ने जमकर तारीफ की।


जलशक्ति मंत्रालय द्वारा गठित टास्क फोर्स के सदस्यों ने गजरा वाटरशेड में हुए कार्यों को देखने के बाद प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि पूरे देश में लोग अब वाटर रिचार्ज की गंभीरता को समझ रहे हैं। यह कमाल की बात है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बीस साल पहले पीएचई मंत्री रहते हुए भविष्य में होने वाले संकट की गंभीरता को समझकर गजरा वाटर शेड के रूप में भू-जल संवर्धन की बेहतरीन योजना का क्रियान्वयन किया। इसी तर्ज पर उन्होंने पूरे प्रदेश में ग्राउंड वाटर रिचार्ज के लिए एक साल पहले नरवा योजना को शुरू किया है।

देश में पानी की एक-एक बूंद को सहेजने के लिए केंद्र सरकार ने जलशक्ति मंत्रालय का गठन किया है। इसके अंतर्गत गठित टास्क फोर्स देश भर में जल संरक्षण के सबसे अच्छे प्रयोगों को परख रही है। इनसे मिले फीडबैक पर जल संरक्षण के उपयोगी कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे। निर्माण के 20 साल बाद भी गजरा वाटरशेड क्षेत्र के लोगों के लिए उपयोगी साबित हो रहा है। इसके बनने के बाद भूमिगत जल स्तर तेजी से बढ़ा और आसपास के इलाकों का जलसंकट दूर हुआ। खेती के लिए बोर में पर्याप्त पानी मिलने लगा।

टास्क फोर्स के सदस्य रहे पूर्व चीफ इंजीनियर हिंगोरानी ने बताया कि प्रोजेक्ट के निर्माण के समय वे इसी विभाग में थे। उस समय पीएचई मंत्री भूपेश बघेल ने प्रोजेक्ट के लिए काफी मेहनत की और तकनीकी बिंदुओं सहित सभी पहलुओं पर मार्गदर्शन दिया। उन्होंने दूरदर्शिता का परिचय देते हुए जिस स्ट्रक्चर का निर्माण कराया, उससे 250 वर्ग किमी में फैले 46 गांवों में भूमिगत जलस्तर में कमाल का उछाल आया है।केंद्रीय अफसरों को जिला पंचायत सीईओ कुंदन कुमार ने जिले में चल रहे नरवा, गरवा, घुरूवा, बाड़ी के अंतर्गत नरवा कंपोनेट की  विस्तार से जानकारी दी। इस दौरान पीएचई के चीफ इंजीनियर एके साहू, एसडीएम विनय पोयाम, एसई एके लखेरा, ईई समीर शर्मा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।