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गौठानों में महिलाएं गोबर से बना रही हैं खूबसूरत गमले, नर्सरी से होगी मार्केटिंग

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सीजी न्यूज डॉट कॉम     

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के ड्रीम प्रोजेक्ट नरवा, गरुवा, घुरवा अऊ बारी योजना से ग्रामीण अर्थक्रांति लाने का सपना अब धीरे धीरे ही सही, साकार होने लगा है। इस प्रोजेक्ट के जरिये बने गौठानों में एकत्र गोबर से ग्रामीण इलाकों की महिलाओं ने खूबसूरत गमले बनाना शुरू कर दिया है। दुर्ग जिला पंचायत ने कई गांवों में गठित स्वसहायता समूह की महिलाओं को गोबर से गमले बनाने का प्रशिक्षण दिया। संसाधन जुटाकर इन महिलाओं ने नवाचार शुरू कर दिया। पाहंदा के समूह ने अब तक ३० क्विंटल कंडे और जैविक खाद का विक्रय कर लिया है।

अब गोबर के गमले बनाकर वे नई व्यावसायिक संभावनाओं की दिशा में बढ़ रही हैं। गोबर के गमलों की विशेषता ये है कि कंपोस्ट की जरूरत पौधों को गमलों से भी मिलेगी। अब इन गमलों की बिक्री नर्सरी में होगी। गमलों की बिक्री से महिलाओं की आमदनी बढ़ेगी। हाल ही में जिले में वाटरशेड प्रोजेक्ट्स का निरीक्षण करने पाटन के दौरे पर आए केंद्र सरकार के टास्क फोर्स के सदस्यों ने महिला समूहों के नवाचार को मुक्त कंठ से सराहा। पाहंदा में गोबर के गमले का नवाचार देख कर टास्क फोर्स के सदस्यों ने कहा कि इसी तरह के छोटे-छोटे नवाचार से महिलाओं की आर्थिक स्थिति सुधरेगी।

जिला पंचायत के अफसरों ने बताया कि गौठानों में महिला स्वसहायता समूहों की सदस्यों को प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के बाद पाहंदा, ढौर, अमलीडीह, बोरवाय, ढाबा जैसे माडल गौठानों में गोबर से गमले बनाए जा रहे हैं। महिला समूहों के लिए मार्केटिंग करने टिप्स भी दिए गए हैं। इन गमलों की बिक्री नर्सरी में की जाएगी। नर्सरी के लिए ये गमले काफी उपयोगी होंगे क्योंकि ये गोबर से बने हैं। गमले में पौधों को गोबर खाद से पोषण भी मिलेगा।

जिला पंचायत के सीईओ कुंदन कुमार ने बताया कि हर गौठान की जरूरतों के अनुसार अलग तरह का नवाचार का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। महिला स्वसहायता समूहों को विस्तारित बाजार देने की व्यवस्था की जा रही है। प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। गोबर के गमलों में पीली मिट्टी, काली मिट्टी और भूसा भी मिलाया गया है। काली और पीली मिट्टी में अलग-अलग तरह के पोषक तत्व होते हैं। गोबर में जैविक खाद के गुण होते हैं। इन सबके मिश्रण से पौधे के लिए खाद का अच्छा स्रोत तैयार होता है। ऐसा गमला नर्सरी के लिए काफी उपयोगी होता है। इन गुणों के कारण गोबर से बने गमलों को बढ़िया मार्केट मिलने की संभावना है।