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प्लास्टिक की जगह पेपर कैरीबैग और केमिकल की जगह हर्बल साबुन बनाकर आत्मनिर्भर हो रही हैं सांकरा की महिलाएं

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  • गांव की 130 महिलाओं ने प्रशिक्षण के बाद साबुन, फिनाइल, कैरीबैग का उत्पादन शुरू किया
  • उत्पादन के साथ मार्केटिंग की गारंटी से मिली कामयाबी

सीजी न्यूज डॉट कॉम

दुर्ग जिले के पाटन ब्लॉक की महिलाओं ने आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में अपने कदम बढ़ा दिए हैं। धरती के लिए बेहद नुकसानदेह प्लास्टिक को नकारने के संकल्प के साथ सांकरा की 130 महिलाओं ने पेपर के कैरीबैग बनाना सीख लिया है। ताकि, धरती को सहेजा जा सके। केमिकल से भरे साबुन की जगह हर्बल साबुन बनाकर इन महिलाओं ने शुद्ध स्वदेशी उत्पाद को बढ़ावा देने का काम भी शुरू कर दिया है।  इन कार्यों से महिलाएं खुद को आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं। अपने गांव को  तरक्की की राह पर ले जाने का सपना साकार कर रही हैं।

सांकरा और आसपास के गांवों में स्वसहायता समूहों की महिलाओं के लिए जिला पंचायत ने आजीविका केंद्र बनवाया है। बहुत जल्दी यहां पर महिलाओं द्वारा तैयार उत्पादों का मार्केट शुरू किया जाएगा। स्वसहायता समूह की महिलाएं फिलहाल पंचायतों में अपने उत्पादों की सप्लाई कर रही हैं। सांकरा में महिलाओं को हर्बल फिनाइल बनाना सिखाया गया है। वे इसकी मार्केटिंग भी कर रही हैं। अस्पतालों में हर्बल फिनाइल का इस्तेमाल शुरू हो गया है। महिलाओं द्वारा तैयार गोबर के गमलों का उपयोग हार्टिकल्चर विभाग कर रहा है।

जय मां लक्ष्मी समूह अमलीडीह की सदस्य सुनीता बाई ने बताया कि हर्बल फिनाइल जैसे उत्पादों का उपयोग अस्पताल में होता है। बाजार में भी इसकी बिक्री हो रही है।  कैरी बैग बनाया जा रहा है। गांव और शहरों में सिंगल यूज प्लास्टिक प्रतिबंधित हो गया है लेकिन लोग अभी भी प्लास्टिक का उपयोग कर रहे हैं। इसे रोकने के लिए पेपर कैरीबैग तैयार किए जा रहे हैं।

बिहान संस्था से प्रशिक्षण लेने के बाद महिला समूहों ने कई उत्पादों को तैयार करने के बाद मार्केटिंग शुरू कर दी है। जय चंडी समूह मोतीपुर की सदस्य कलेंद्री बाई ने बताया कि हर्बल साबुन का अच्छा बाजार मिला है। इसे दो फ्लेवर में तैयार किया गया है। नीम के फ्लेवर में कीटनाशक गुण होने के कारण लोगों को काफी पसंद आ रहा है।

जनपद  पंचायत के सीईओ मनीष साहू ने बताया कि नवाचार से महिला स्वसहायता समूहों को आर्थिक स्वावलंबी बनाना हमारा मकसद है। प्राकृतिक संसाधनों को भी सहेजा जा रहा है। गोबर खाद को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे जमीन की उर्वरता सुरक्षित रहेगी। प्लास्टिक की तुलना में पेपर कैरीबैग का उपयोग होने से खेतों की जमीन नष्ट नहीं होगी। सिंगल यूज प्लास्टिक को खाने के कारण मवेशियों की मौतें हो रही थी। हर्बल फिनाइल और हर्बल साबुन के माध्यम से स्थानीय साधनों के आधार पर आत्मनिर्भर हो सकते हैं। ग्रामीण बाजारों में बिहान के उत्पाद अपनी जगह बनाने लगे हैं।