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मांगें पूरी कराने भूख हड़ताल पर रहे बीएसएनएल कर्मचारी

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सीजी न्यूज डॉट कॉम

अखिल भारतीय आल यूनियंस एंड एसोसिएशंस आफ बीएसएनएल के आह्वान पर दुर्ग के बीएसएनएल आफिस के सामने एकदिवसीय भूख हड़ताल में केंद्र सरकार की नीतियों की जमकर आलोचना की गई। बीएसएनएल कर्मचारियों की समस्याओं के निराकरण की मांग को लेकर  आयोजित भूख हड़ताल में यूनियन के परिमंडल सचिव आर एस भट्ट ने कहा कि यूनियन केबिनेट ने  69000 करोड़ रूपए का रिवाइवल पैकेज बीएसएनएल और एमटीएनएल के लिए स्वीकृत किया है।

स्वीकृत राशि में 4जी स्पेक्ट्रम, सावेरिन गारंटी बांड के जरिये 15000 करोड़ रु. जुटाने दीर्घ कालीन बांड जारी करने, बीएसएनएल प्रापर्टी के मोनेटाईजेशन से मिली राशि से व्हीआरएस का भुगतान करने का निर्णय लिया गया। भट्ट ने कहा कि केबिनेट ने बीएसएनएल को लाभकारी बनाने के यह निर्णय लिया था, लेकिन बीते 4 महीनों से केवल कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति का काम हो रहा है। कर्मचारियों की कमी के कारण बीएसएनएल की सर्विस पर असर पड़ रहा है। 

समय पर काम न होने के कारण केबिनेट से मंजूर भारी भरकम मदद भी उपयोगी नही रहेगी और जनता की पैसों के दुरुपयोग का ठीकरा भी बीएसएनएल पर फूटेगा।  निजी आपरेटरों के भारी भरकम बकाये की वसूली पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के कारण कोई भी बैंक दूरसंचार कंपनियों को ऋण नहीं देना चाहता। ऐसी परिस्थितियों में दिसंबर तक बीएसएनएल की 4जी सेवा शुरू नहीं हो पाएगी। इन समस्याओं की ओर  सरकार का ध्यान आकर्षित करने यूनियन के आव्हान पर एकदिवसीय भूख हड़ताल की गई।

भट्‌ट ने कहा कि  पिछले माह का वेतन कर्मचारियों को नहीं मिल पाया है। बीते 10 माह से कांट्रेक्ट लेबरों का भुगतान नहीं किया गया है।  कर्मचारियों के वेतन से काटे गए बैंक लोन, सोसायटी लोन, एलआईसी प्रीमियम, जीपीएफ, ईपीएफ की राशि बीएसएनएल मेनेजमेंट ने जमा नही की है। इसके कारण कर्मचारियों को बैंक से नोटिस मिल रहा है। जीपीएफ के जमा पैसों का भुगतान भी नही हो रहा है। भूख हड़ताल में सीएस गुप्ता, एके अग्रवाल, डीके सिंह, आरआर पटेल, प्रमोद साहू, जीवन देब, आरडी साहू, एससी दत्ता, चन्द्रिका, रामप्यारी, अमिता चंद्राकर सहित अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे।