Breaking News

प्रशासनिक टीम ने रोका तीन नाबालिगों का बाल विवाह

  • अभिभावकों को समझाईश दी गई : 18 वर्ष से कम आयु की लड़कियों और 21 वर्ष से कम उम्र के लड़कों का विवाह नहीं होना चाहिए
  •  उल्लंघन होने पर 2 वर्ष का कठोर करावास या 1 लाख का जुर्माना या दोनों सजा से हो सकते हैं दंडित

द सीजी न्यूज डॉट कॉम


राजनांदगांव / जिले में तीन बाल विवाह होने की सूचना मिलते ही छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष तेजकुंवर नेताम द्वारा तत्काल बाल विवाह रोकने के निर्देश दिये गए। निर्देशों का पालन करते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग राजनांदगांव की जिला कार्यक्रम अधिकारी रेणुु प्रकाश द्वारा मैदानी अमले को दल के साथ मौके पर रवाना किया गया।

परियोजना अधिकारी सह बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी डोंगरगांव वीरेन्द्र सिंह साहू और जिला बाल संरक्षण अधिकारी  चन्द्रकिशोर लाड़े, संरक्षण अधिकारी गैर संस्थागत देखरेख विनोद जंघेल, सेक्टर पर्यवेक्षक वासड़ी आईसीडीएस मोहला सुरैैया कुरैशी व पुलिस प्रशासन और स्थानीय सरपंच, पटेल व आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर देर रात बाल विवाह रोका गया। बाल विवाह कराने वाले परिवार को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के प्रावधानों से अवगत कराते हुए बाल विवाह के दुष्परिणामों के बारे में जानकारी दी गई। इसके बाद दोनों पक्षों ने यह स्वीकार किया कि बालक-बालिकाओं की उम्र विवाह योग्य होने के बाद ही विवाह करेंगे। तीनों बाल विवाह रोकने में परियोजना अधिकारी सह बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी वीरेन्द्र सिंह साहू डोंगरगांव, सुनील साहू छुरिया और योगेश भगत छुरिया का विशेष योगदान रहा।
महिला एवं बाल विकास विभाग ने बाल विवाह होने की सूचना मोबाईल नम्बर 8319964100, 7987100143 और चाइल्ड लाइन के टोल फ्री नम्बर 1098 पर सूचना देकर बाल विवाह रोकथाम में अपनी भागीदारी देने की अपील की है। 
बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के प्रमुख प्रावधान 
अधिनियम के अंतर्गत 18 वर्ष से कम आयु के लड़कियों और 21 वर्ष से कम उम्र के लड़कों का विवाह बाल विवाह माना गया है। अधिनियम के अंतर्गत बाल विवाह किया जाना दंडनीय अपराध माना गया है। एक वयस्क पुरूष का विवाह किसी 18 वर्ष से कम उम्र आयु की लड़की के साथ बाल विवाह संपन्न होने पर बाल विवाह करने वाले वयस्क पुरूष और बाल विवाह संपन्न कराने वालों को 2 वर्ष का कठोर करावास या 1 लाख का जुर्माना या दोनों सजा से दंडित किया जा सकता है। इस अधिनियम के अंतर्गत अवयस्क बालकों के विवाह को अमान्य करने का भी प्रावधान है।

Check Also

पीएम मोदी ने छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस पर सीएम साय को लिखा आत्मीय पत्र : प्रदेशवासियों को दी शुभकामनाएं

छत्तीसगढ़ की माटी, संस्कृति और जनजीवन से अपने गहरे जुड़ाव को किया याद, सरगुजा से …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!