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आज छत्तीसगढ़ सहित देश के लगभग सभी राज्यों में रमजान का चांद नजर आ गया है। कल रविवार को पहला रोजा रखा जाएगा। आज शाम रमजान का चांद नजर आने के साथ ही मुसलमानों ने एक दूसरे को माहे रमजान की मुबारकबाद दी। मुस्लिम समुदाय ने दो दिन पहले से ही रमजान की तैयारियां शुरू कर दी थी।
रमजान का मुकद्दस महीना रोजा (उपवास) इबादत, गुनाहों से माफी, दुआओं के मुकम्मल और हर तरह की बुराइयों से बचने का महीना है। इस महीने में इबादत का सवाब 70 गुना बढ़ जाता है। अल्लाह रोजेदारों के गुनाह माफ करते हैं और उनकी दुआएं कुबूल की जाती हैं।
रायपुर स्थित मदरसा इस्लाहुल कमेटी के काजी ए शहर हजरत मौलाना मोहम्मद अली फारुकी ने बताया कि 2 अप्रैल को पहली तरावीह होगी। 3 अप्रैल को रमजान की पहली तारीख होगी। इसी दिन पहला रोजा रखा जाएगा।
पिछले दो साल से कोरोना संक्रमण के खतरे से बचाव के लिए पाबंदियां लगी थी जिनके हटने के बाद इस बार रमजान के मौके पर रौनक दिख रही है। मस्जिदों में पांच वक्त की नमाज, इफ्तार और रात को विशेष रूप से अदा की जाने वाली नमाज ए तरावीह में बड़ी संख्या में रोजेदारों की मौजूदगी रहेगी।
इस्लामिक कैलेंडर में चांद के अनुसार महीने के दिन गिने जाते हैं, जो 30 या 29 दिन के होते हैं। इबादत, रहमत, मगफिरत और बरकत का यह मुकद्दस महीना इस्लामी कैलेंडर का नौवां महीना है।
रमजान के महीने को तीन असरों (दस-दस दिन) में बांटा गया है।
पहला अशरा अल्लाह की रहमत यानी कृपा का होता है।
दूसरा अशरा मगफिरत यानी माफी का और आखिरी अशरा जहन्नुम की आग से खुद को बचाने का होता है।
आखिरी अशरे की पांच रातों (शबे 21, 23, 25, 27 और 29) में से एक रात शब-ए-कद्र की होती है, जो हजार महीनों से भी अफजल होती है।
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