- मुख्यमंत्री ने प्रतापपुर के सर्किट हाउस में अधिकारियों के साथ आयोजित समीक्षा बैठक में कहा
- इलाके में पानी की कमी की स्थिति, वाटर रिचार्जिंग का काम तेजी से करें
- पात्र लोगों को वन अधिकार मान्यता पत्र दिलाना सुनिश्चित करें
- शिकायतों के निराकरण की ऑनलाइन व्यवस्था हो, कॉल सेंटर प्रारंभ किए जाएं
द सीजी न्यूज
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज प्रतापपुर में अधिकारियों के साथ आयोजित समीक्षा बैठक में कहा कि अधिकारी मुस्तैदी से काम करें और जनता के प्रति जवाबदार बनें। काम में लापरवाही बर्दाश्त नही की जाएगी। मुख्यमंत्री ने भेंट-मुलाकात अभियान के तहत कल प्रतापपुर विधानसभा क्षेत्र के भ्रमण के बाद प्रतापपुर सर्किट हाउस में बैठक में कहा कि इस इलाके में पानी की कमी की स्थिति है। भूजल स्तर में कमी को दूर करने विशेष ध्यान दें, नरवा के काम तेज़ी से पूरा करें। बैठक में नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री डॉ.शिवकुमार डहरिया, स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ.प्रेमसाय सिंह टेकाम, अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू उपस्थित थे।
बैठक में मुख्यमंत्री ने बताया कि हेलीकाप्टर से आते समय देखा कि एक नाला सूख गया है, लेकिन ट्रीटमेंट वाले नाले में पानी है। नरवा योजना के तहत नालों का ट्रीटमेंट तेजी से करें। प्रतापपुर में सरकारी बिल्डिंग में रेनवाटर हार्वेस्टिंग रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि रायपुर शहर के बाद सूरजपुर पहला जिला है, जहां 800 फ़ीट में पानी नहीं। वाटर रिचार्जिंग में ध्यान दें। बिना झिझक के अच्छा काम करें।
बघेल ने कहा कि वन भूमि में जिन लोगों का 13 दिसंबर 2005 के पहले से कब्जा है उन सभी को फारेस्ट लेंड पट्टा मिल जाए। भ्रमण के दौरान राजस्व विभाग की शिकायतें मिली हैं, उनका निराकरण करें। पटवारी की शिकायतें ज्यादा हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आवर्ती चराई के लिए पहाड़ी, बस्ती से दूर गौठान बन रहे हैं, इस पर अधिकारी ध्यान दें। गांवों के नजदीक गौठान बनाएं। गौठान योजना में गड़बड़ी या लापरवाही बर्दाश्त नही की जाएगी। गरीब लोगों के राशनकार्ड अवश्य बनाए जाएं। यदि किसी गरीब को राशन कार्ड न मिले तो यह हमारी गलती है। यदि कोई समस्या है तो अधिकारियों को अवगत कराएं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि लोगों से उनकी भाषा में बात करिए, उनको अच्छा लगेगा। गुड गवर्नेंस का यही तरीका है।
बघेल ने कहा कि जिले के प्रभारी सचिव समीक्षा कर यह सुनिश्चित करें कि जितनी भी घोषणाएं की गई हैं, निर्देश दिए गए हैं, वे पूरे हों। शिकायत निवारण के लिए ऑनलाइन कॉल सेंटर खोले जाएंगे। नालों से बालू की अवैध खुदाई के मामलों में कड़ाई से करवाई की जाएगी। अवैध उत्खनन पर कड़ाई से कार्यवाही होगी।
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