द सीजी न्यूज
दुर्ग संभाग की यह तीसरी घटना है जब खुलेआम गुंडागर्दी हुई है और खुलेआम समाज का माहौल बिगाड़ा गया है। पिछले साल कवर्धा में राजनीतिक शह पर दो धर्मों के लोग आमने-सामने हो गए और कई दिनों तक शहर में कर्फ्यू लगा रहा। धर्म और राजनीति के नाम पर खुलेआम गुंडागर्दी हुई। दूसरी घटना इस साल दुर्ग शहर में एक धार्मिक कार्यक्रम के लिए चंदा वसूली को लेकर हुई, जिसमें हिंदू युवा मंच के कार्यकर्ताओं ने तमेर समाज के लोगों के साथ दुर्व्यवहार किया। लाठी डंडे के साथ पहुंचे युवकों की गुंडागर्दी के कारण दो दिनों तक तनाव की स्थिति रही। अब तीसरी घटना राजनांदगांव रोड पर कल हमारा ढाबा में हुई जिसमें मुस्लिम समाज के युवकों ने ढाबे में जाकर तोड़फोड़ मचाई। मारपीट करते हुए खुलेआम गुंडागर्दी की गई।
बड़ा सवाल ये है कि अगर सौ डेढ़ सौ लोगों की भीड़ का जमावड़ा नेशनल हाईवे पर हो रहा था और हाईवे पर स्थित एक ढाबे में जाकर भीड़ ने तोड़फोड़ कर रही थी, तो पेट्रोलिंग करने वाली पुलिस टीम क्या कर रही थी?
घटनाक्रम को समझिये। ये युवक राजनांदगांव शहर से लगे एक धार्मिक जलसे में उपस्थित हुए थे। सुबह के समय चाय पीने कुछ युवक ढाबे में आए और चाय की कीमत को लेकर विवाद होने पर यहां से लौट गए। कुछ देर बाद अपने साथियों को लेकर दोबारा ढाबे में आकर मारपीट के साथ तोड़फोड़ करने लगे।
जिस धार्मिक जलसे में मुस्लिम युवक शामिल होने गए थे, वहां पर पूरी रात पुलिस की ड्यूटी लगी होती है। इसी जगह से युवक ढाबा जाने के लिए निकले और विवाद होने पर इसी धार्मिक स्थल से युवकों की भीड़ लेकर दोबारा ढाबे में पहुंचे।
सवाल उठता है कि कार्यक्रम स्थल से अगर पचास या सौ युवकों का मूवमेंट एक साथ हो रहा है और तनाव के बीच वहां से युवक ढाबे के लिए रवाना हो रहे थे तो पुलिस को इसकी खबर क्यों नहीं लगी ?? पुलिस क्या कर रही थी ?? पेट्रोलिंग टीम क्या कर रही थी ??
सच ये है कि बीते कुछ वर्षों में अपराधियों, समाज कंटकों और छुटभैये गुंडों के मन में पुलिस विभाग का खौफ कम हुआ है। शायद समाज विरोधी तत्वों पर पुलिस के डंडे कम चल रहे हैं, जिसके कारण पुलिस के रुतबे में कमी आई है। जिस कड़क अंदाज में पुलिसिंग होनी चाहिए, वो अंदाज … वो सख्ती अब नजर नहीं आती। हालांकि, कोरोना काल में यह सख्ती काफी हद तक दिखी थी … दुकानें खोलने वालों या अकारण घूमने वालों पर सख्ती की गई। पुलिस प्रशासन ने मजदूरों को भोजन भी कराया और डंडा भी चमकाया। लेकिन, इसके बाद ढिलाई दिखने लगी है।
पुलिस प्रशासन को समझना होगा कि गली-नुक्कड़ों में अंडे से निकले नए-नए गुंडों पर जब तक कड़ी नजर नहीं रखी जाएगी … तब तक नेशनल हाईवे के ढाबे से लेकर दुर्ग के तमेर पारा और कवर्धा जैसी घटनाएं होती रहेगी। गुंडागर्दी करने वाले लोग चाहे जिस समाज से जुड़े हों, सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
सख्ती नहीं बरती गई तो भूपेश बघेल की सरकार के दामन पर गुंडागर्दी के ऐसे दाग लगते रहेंगे।
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