- मुस्कुराती मान्या इस दुनिया में नहीं रही … भावभीनी श्रद्धांजलि …
द सीजी न्यूज
10 अगस्त को दुर्ग शहर में 13 साल की बच्ची मान्या देशलहरा की मौत हो गई। यह मासूम बच्ची अपनी मां के साथ एक्टिवा पर सवार थी।पोटिया चौक के पास सड़क पर गड्ढे में एक्टिवा का पहिया आने के बाद मां-बेटी अनबैलेंस होकर गिर गए। इसी दौरान वहां से गुजर रहे एक ट्रक ने मासूम बच्ची को अपनी चपेट में ले लिया। बच्ची की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। मां के सामने ही मान्या चल बसी। घटनास्थल पर बच्ची के शव के सामने उसकी मां के विलाप का वीडियो देखकर हर किसी की आंखे छलछला गई।
क्यों याद आ रहे हैं मूणत ???
पिछली सरकार में एक चर्चित तेजतर्रार मंत्री थे … राजेश मूणत। रमन सरकार के कार्यकाल में दूरदराज की गांव-देहात की सड़कों के खस्ताहाल होने की रिपोर्ट तैयार करते समय जब भी राजेश मूणत से वर्जन लेने के लिए फोन करने पर हमेशा बहस होती और फिर फोन कट। मूणत की कार्यप्रणाली को लेकर कई-कई स्तरों पर वैचारिक मतभेद होने के बावजूद जब भी सड़कों पर गड्ढे दिखते हैं या गड्ढों के कारण हादसे होते हैं … मूणत याद आते हैं … याद आते रहते हैं।
याद आने की वजह ये है कि रमन सरकार के कार्यकाल में हर तीन चार माह के अंतराल में पीडब्लूडी मंत्री राजेश मूणत का बयान जारी होता था ,,, पीडब्लूडी की सड़कों पर गड्ढे नहीं दिखने चाहिए। अगर सड़क पर गड्ढे दिखे तो जिम्मेदार अधिकारी को सस्पेंड कर दूंगा।
मूणत के इस बयान का खौफ इतना होता कि अमूमन हर 6 महीने में गड्ढे भर दिये जाते थे। मूणत के पीडब्लूडी मंत्री रहते इस विभाग में भ्रष्टाचार खत्म नहीं हुआ ( न कभी खत्म होगा … ) ,,, विभाग का सिस्टम भी सौ फीसदी नहीं सुधर पाया। लेकिन, मूणत की चेतावनी का असर ये होता कि अफसर खौफ में रहते और सड़कों के गड्ढे भरने सहित मेंटेनेंस के काम समय-समय पर होते रहे। खास तौर पर मूणत के आगमन से पहले सभी सड़कों के गड्ढे भर जाते।
लेकिन …
मौजूदा भूपेश सरकार में पीडब्लूडी मंत्री ताम्रध्वज साहू का पिछले साढ़े तीन साल में ऐसा एक बार भी बयान नहीं आया। अगर ये दावा किया जा रहा हो कि बयानबाजी नहीं, काम करने पर विश्वास करते हैं … तो ये दावा भी फुस्सी पटाखा ही साबित होगा। पीडब्लूडी मंत्री का काम नई सड़कें बनाने और इसके लिए फंड मंजूर करने या खासमखास को टेंडर दिलाने तक सीमित नहीं है। बीते साढ़े तीन साल में पीडब्लूडी में भ्रष्टाचार और अफसरों की मनमानी का लेवल जिस चरम पर पहुंच चुका है, उसकी मिसाल राज्य निर्माण के बाद पिछले 22 वर्षों में कभी देखने नहीं मिली। बेहद पैने और तेजतर्रार माने जाने वाले सीएम भूपेश बघेल ने इस पर अब तक कोई एक्शन क्यों नहीं लिया ? यह शोध का विषय हो सकता है।
कल के हादसे से शहर सदमे में … तथाकथित बाबूजी को कोई फर्क नहीं
इस हादसे को लेकर कई जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों, कई अफसरों ने व्यथित होकर अपनी संवेदनाएं जताई। लेकिन, घटनास्थल से कुछ सौ मीटर के फासले पर रहने वाले पीडब्लूडी के तथाकथित बाबूजी ने न तो अपने विभाग को कोई निर्देश दिये, न अपने विभाग के नकारे सिस्टम को फटकार लगाई, न पीड़ित परिवार के प्रति कोई संवेदना जताई।
तो गलत क्या लिखा हमने … ठीक ही तो लिखा है …
तथाकथित बाबूजी …
मूणत याद आ रहे हैं … उनके घर के पास ये दर्दनाक हादसा हुआ होता तो अब तक जिम्मेदार अफसरों की खाल उधेड़ चुके होते …
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